छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामंडलम के अध्यक्ष डॉ. गणेश कौशिक ने कहा है कि राज्य में संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन को बेहतर बनाने के साथ ही इसे रोजगारपरक बनाने की पहल शुरू कर दी गई है।
विभिन्न जिलों में नए संस्कृत विद्यालय शुरू किए जाने की संभावना का अध्ययन बोर्ड कर रही है। आगामी शिक्षा सत्र से राज्य में कम से कम 100 नए संस्कृत विद्यालय प्रारंभ करने की योजना पर बोर्ड काम कर रहा है।
डॉ. कौशिक यहां सर्किट हाउस में शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं नागरिकों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने जिले में संस्कृत को बढ़ावा देने के संबंध में विस्तार से चर्चा की और उनसे सुझाव भी लिए। संस्कृत मूल भाषा है। उन्होंने कहा कक्षा 6वीं से लेकर 8वीं तक प्रथमा, नवमीं एवं दसवीं में पूर्व मध्यमा तथा ग्यारहवीं एवं बारहवीं में उत्तर मध्यमा की पढ़ाई होगी।
इन विद्यालयों में व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की भी शिक्षा दी जाएगी। संस्कृत विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी पीईटी, पीएमटी, बीसीए, बीबीए जैसे पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश ले सकेंगे। संस्कृत के अलावा अन्य विषयों का अध्ययन-अध्यापन हिन्दी में होगा(दैनिक भास्कर,राजनंदगांव-रायपुर,7.9.11)।
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