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26 मई 2012

नौकरी के लिए इन्टरव्यू देने जाने से पहले.......

आज जहां एक ओर निजी क्षेत्रों में नौकरियों की भरमार दिखाई पड़ती है। वहीं दूसरी ओर प्रतियोगिता भी कड़ी है। स्थिति ‘एक अनार सौ बीमार’ वाली है। ऐसे में किसी भी जॉब के लिए न्यूनतम शैक्षणिक व व्यावसायिक योग्यता के साथ-साथ अनुभव भी वांछित है। लेकिन जॉब पाने में आपका व्यक्तित्व व इंटरव्यू में सफलता बहुत जरूरी है। बहुत बार आपकी शैक्षणिक योग्यता से ज्यादा आपका व्यक्तित्व व आत्मविश्वास काम आता है। अगर आप इंटरव्यू पर जा रहे हैं तो जरा यह भी जानिये। 

आपका बायोडाटा अर्थात रेज्यूम बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए। इसमें आपकी शैक्षणिक, व्यावसायिक योग्यताओं के साथ-साथ कार्य अनुभव स्पष्ट रूप से अंकित हो। इसमें अनावश्यक रुचियों का जिक्र न हो। आपको स्पष्ट जानकारी होनी चाहिये कि आप जिस कंपनी में जॉब के लिए इंटरव्यू देने जा रहे हैं, वहां की आवश्यकताएं क्या हैं? वह किस प्रकार की जॉब आपसे चाहता है। 

-कंपनी के बॉस या चयनकर्ता के संदर्भ में यदि आप कुछ जानकारी जुटा सकें तो यह बेहतर होगा। लेकिन इसका प्रयोग सिफारिश आदि के लिए न करें। विपरीत असर पड़ता है। 

-अगर आपको कंप्यूटर आदि की जानकारी है तो उसमें अपनी दक्षता न केवल अपने रेज्यूम में दर्ज करें अपितु आपको नवीनतम जावा, फेसबुक, ट्विटर, इंटरनेट आदि की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। विशेषत: जब आप कंप्यूटर आदि जॉब के लिए इंटरव्यू दे रहे हों। 

-आपके सभी सर्टिफिकेट व अन्य कागजात सलीके से लगे होने चाहिये। फाइल में कायदे से इनका लगा होना बहुत जरूरी है। जैसे ही आपसे जो प्रमाणपत्र मांगा जाये उसे आप तुरंत प्रस्तुत कर सकें, बिना कनफ्यूज हुए। 

-ड्रेस इंटरव्यू में बहुत मायने रखती है। फॉर्मल ड्रेस ही इंटरव्यू पर डाल कर जानी चाहिए। जींस, टी-शर्ट आदि से परहेज करें। ज्यादा भड़कीले रंगों वाली ड्रेस से बचें। 

-परफ्यूम या डीओ ज्यादा तीव्र गंध वाले नहीं होने चाहिये। 

-औपचारिकताओं का निर्वहन करने के बाद रूम में जाने के बाद जब आप बैठें तो हाथ न ज्यादा खोलकर बैठें, न ही ज्यादा संकुचित होकर बैठें। 

-प्रश्न यदि समझ में न आये तो सॉरी कहकर दोबारा समझने का प्रयास करें। आपका स्वर न तो ज्यादा ऊंचा या तेज होना चाहिए और न ही ज्यादा मंदा। 

-जब आपसे वेतन (सेलरी) पैकेज की बात की जाये तो सही-सही आकलन करके आत्मविश्वास से अपनी अपेक्षा एम्पालयर के सामने रखें। क्षमता से कम या बहुत ज्यादा मांग नुकसानदेह ही होती है। 

-इंटरव्यू समाप्त होने के पश्चात जब आप कक्ष से बाहर निकलें तो बाहर आकर किसी भी प्रकार की टिप्पणी कंपनी या चयनकर्ता के बारे में न करें(अतुल कुमार शर्मा,शिक्षालोक,दैनिक ट्रिब्यून,1.5.12)।

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25 मई 2012

आईआईटी टॉपर अर्पित अग्रवाल से जानिए सफलता के गुर

आईआईटी की तायारी में कब से लगें, यह स्टूडेंट की क्षमता पर निर्भर है। कुछ आठवीं-नौवीं से लग जाते हैं, तो कुछ 10वीं के बाद सीरियस होते हैं। अहम बात यह है कि अगर हम रैंक लाना चाहते हैं, तो हमें प्लानिंग के साथ तैयारी करने की जरूरत होती है। यह कहना है आईआईटी टॉपर अर्पित अग्रवाल का। 

अग्रवाल के मुताबिक हमें अपनी प्लानिंग को दो हिस्सों में बांटना चाहिए: 

लांग टर्म : लांग टर्म प्लानिंग का मतलब है बिगर पिक्चर को देखना यानी प्लानिंग में सारी चीजों को शामिल करना। जैसे कि हमें कब सिलेबस खत्म करना है, कब से रिवीजन करना है, अपनी खूबियों और खामियों को पहचानना। 

शॉर्ट टर्म : शॉर्ट टर्म प्लानिंग सब विशेष जरूरतों को ध्यान में रखकर करते हैं। इसमें रिवीजन से लेकर पिछले बरसों के सवालों को पूरी तरह से हल करना भी शामिल है। 

सक्सेस के लिए क्या हो स्टेप 
एंट्रेस एग्जाम में अच्छा करने के लिए सैंपल पेपर्स की रेग्युलर प्रैक्टिस जरूरी है। सैंपल पेपर्स की मदद से खास तरह के सवालों के लिए स्ट्रेटजी बनाने में मदद मिलती है। इसका फायदा अल्टीमेटली एग्जाम में मिलता है। इससे ध्यान केंद्रित करने में भी मदद मिलती है। सक्सेस के लिए इस तरह स्टेप ले सकते हैं: 

- एनसीईआरटी की किताबें 9वीं से 12वीं तक ठीक तरह पढ़े। 

- अहम हिस्सों का नोट बनाएं और उसे बार-बार दोहराएं। 

- सवाल रेग्युलरली हल करें और कठिन सवालों को अलग से मार्क करें। - पिछले 10 साल के सवाल हल करें। 

सक्सेस का मूलमंत्र 
समय से एक प्लानिंग और मेथॉडिकल तरीके से तैयारी में जुटना ही सफलता का मूल मंत्र है। तीनों सब्जेक्ट पर बराबर ध्यान देना भी जरूरी है , चूंकि आपको तीनों ही सब्जेक्ट में एक मिनिमम कट - ऑफ फेस करना होता है। सभी सब्जेक्ट्स पर बराबर ध्यान देना तभी संभव है , जब आप सभी सब्जेक्ट्स को रोज पढ़ेंगे। आप किसी एक सब्जेक्ट के मजेदार या चैलेंजिंग लगने के बावजूद उसके पीछे न पड़े। देखा जाए तो यह आम गलती है और स्टूडेंट्स इस वजह से टाइम फ्रेम में सिलेबस पूरा नहीं कर पाते हैं। हमारी तैयारी की रणनीति में आईआईटी - जी सिलेबस के अनुसार चेप्टरों का वजन होना चाहिए। 

वन टाइम इवेंट नहीं 
यह कोई वन टाइम इवेंट नहीं है। यह तो लगातार चलने वाली प्रक्रिया है जो एक से दो साल लंबी होती है। फिटजी से कोचिंग और एमवीएन , फरीदाबाद से स्कूलिंग करने वाले अर्पित के मुताबिक सफलता के लिए यह भी जरूरी है कि आप अच्छे कोचिंग का चुनाव करें जहां आपको गाइड करने लायक टीचर्स हों। क्लास रेग्युलरली अटेंड करें और अपने टीचर्स से सुझावों को इमानदारी से फॉलो करें। लेकिन पढ़ाई सब्जेक्ट के हिसाब से ही करनी चाहि ए(निर्भय कुमार,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,23.5.12)।

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16 दिसंबर 2011

काफी रोजगार मिलते हैं एसिस्टेंट ग्रेड एग्जाम्स से

केंद्र सरकार से जुड़े विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, स्वायत्तशासी संस्थाओं तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हर साल एसिस्टेंट ग्रेड के पदों पर काफी बड़ी संख्या में युवाओं की भर्तियां की जाती हैं। कमोबेश इसी प्रकार की नियुक्तियां अर्ध सैन्य बलों और पुलिस संगठनों में भी होती हैं। यह संख्या प्रति वर्ष हजारों में होती है लेकिन यह निश्चित नहीं होती है। इसकी चयन प्रक्रिया में २० से २५ वर्ष तक के ग्रेजुएट युवा शामिल हो सकते हैं। प्रमुख रूप से स्टाफ सलेक्शन कमीशन या कर्मचारी चयन आयोग द्वारा इस प्रकार की चयन परीक्षा का आयोजन केंद्र सरकार के अधिकांश मंत्रालयों और विभागों के लिए उपयुक्त प्रत्याशियों के चयन के लिए किया जाता है पर कई संस्थाएं और निकाय स्वयं भी ऐसी परीक्षाएं संचालित करते हैं। आइए बात करते हैं इस परीक्षा के स्वरूप और इसमें सफल होने संबंधित कुछ कारगर टिप्स की।

कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्रति वर्ष एसिस्टेंट ग्रेड एग्जाम का संचालन किया जाता है। इसके जरिए रेलवे बोर्ड सेक्रेटेरिएट सर्विस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट सर्विस, आर्म्ड फोर्सेस हेडक्वार्टर तथा भारत सरकार के अन्य विभागों में चयनित प्रत्याशियों को नियुक्त किया जाता है। परीक्षा के दो चरण प्रीलियम और मेन एग्जाम के तौर पर होते हैं। पहले चरण में ऑब्जेक्टिव टाइप के प्रश्नों पर आधारित तीन घंटे की परीक्षा होती है इसमें चार विषयों की परीक्षा ली जाती है।

ये विषय हैं :- रीजनिंग एबिलिटी, जनरल अवेयरनेस अर्थमेटिक और लैंग्वेज (हिंदी या अंग्रेजी)। इनके ७५-७५ प्रश्न होते हैं। कुल ३०० अंकों के ये समस्त प्रश्नपत्र होते हैं। इसमें सफल उम्मीदवारों को ही मेन एग्जाम में शामिल होने की अनुमति मिल पाती है। प्रत्येक विषय के लिए अलग से टेस्ट पेपर दिया जाता है। प्रश्न अंग्रेजी और हिंदी दोनों ही भाषाओं में होते हैं। लैंग्वेज प्रश्न पत्र सिर्फ पास करने की जरूरत होती है। इसके अंक मेरिट बनाते समय जोड़े नहीं किए जाते हैं। बहुविकल्पी प्रश्न होते हैं जिनमें से एक उत्तर पर निशान लगाना होता है।

रीजनिंग एबिलिटी के प्रश्न पत्र में सामान्य ज्ञान पर आधारित प्रश्न होते हैं। इसके लिए प्रैक्टिस गाइड्स, कंपीटिशन पर आधारित पत्रिकाओं तथा नेट पर उपलब्ध सामग्री का लाभ उठाया जा सकता है। जनरल अवेयरनेस के खंड में इतिहास, भूगोल, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मामलों, भारतीय अर्थव्यवस्था तथा सामान्य विज्ञान पर प्रश्न पूछे जाते हैं। जनरल नॉलेज की कोई भी नामी पुस्तक इसमें उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

अर्थमेटिक्स के पेपर में बुनियादी गणित से संबंधित प्रश्नों पर ज्यादा जोर होता है। प्रमुख टॉपिक्स में अंकगणित, नंबर्स, स्टैटिस्टिक्स, ग्राफ तथा टाइम-डिस्टेंस आदि का नाम लिया जा सकता है। इस खंड में अपेक्षित सफलता पाने के लिए प्रैक्टिस ही एकमात्र विकल्प है।

भाषा (हिंदी/अंग्रेजी) के प्रश्न पत्र का स्तर क्वालीफाइंग टाइप का ही होता है। प्रत्याशी के भाषा के व्यावहारिक ज्ञान की परख करना मात्र ही इस प्रश्न पत्र का एकमात्र उद्देश्य होता है।

मुख्य परीक्षा

प्रीलियम परीक्षा में सफल प्रत्याशियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिल जाती है। इसमें प्रत्याशियों के भाषा ज्ञान के अतिरिक्त स्वयं को व्यक्त कर पाने की क्षमता की भी जांच की जाती है। उत्तर विस्तृत तरीके से लिखने की बाध्यता होती है। कमोबेश इसी प्रकार का टेस्ट अंकगणित का होता है जिसमें एसिस्टेंट के कार्यों के अनुरूप गणितीय कैलकुलेशन कर पाने की क्षमता को परखा जाता है। इसमें भाषा और गणित पर आधारित दो प्रश्न पत्र होते हैं। इस परीक्षा में २०० अंकों का अंग्रेजी और १०० अंकों का गणित आधारित प्रश्न पत्र होता है।


लैंग्वेज कॉम्प्रिहेंशन :- इसमें ५० अंकों का जनरल अंग्रेजी का एक खंड होता है जबकि शेष १५० अंकों के खंड में कम्युनिकेशन एवं लेखन कौशल पर आधारित प्रश्न शामिल किए जाते हैं। अंकगणित :- कुल सौ अंकों के इस दो घंटे की अवधि के प्रश्न पत्र में भी एलिमेंटरी मैथ्स और सामान्य इस्तेमाल में आने वाले गणितीय अवधारणाओं से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।


गुरुमंत्र
१. अंग्रेजी या हिंदी भाषा की तैयारी के लिए व्याकरण की तैयारी के अलावा रोजाना लिखने की आदत भी डालें।

२. जनरल अवेयरनेस के लिए अखबारों और करंट अफेयर्स पर आधारित पत्रिकाओं को पढ़ने से काफी लाभ मिलता है।

३. लॉजिकल रीजनिंग के लिए सैंपल टेस्ट पेपर्स जितने कर सकें उतना ही फायदा पेपर्स के समय मिलेगा।

४. गणित में आठवीं से दसवीं तक की एनसीईआरटी की टेक्स्ट बुक्स का अभ्यास करने से काफी बुनियादी जानकारी मिल जाएगी।

५. शब्दों के अर्थ के साथ उनके इस्तेमाल का ज्ञान भी होना चाहिए।

६. कैलकुलेशंस के शॉर्टकट फॉर्मूलों को याद करके जाए। इससे समय की काफी बचत होगी।

७. कम समय में अधिक प्रश्नों को करने की बाध्यता को देखते हुए अपने टाइम मैनेजमेंट को दुरुस्त रखें(अशोक सिंह,नई दुनिया,12.12.11)।

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14 दिसंबर 2011

सफलता में मेहनत का कोई विकल्प नहीं

करिअर निर्माण में लाखों छात्र अपने-अपने ढंग से सफलता के लिए जद्दोजहद करते नज़र आते हैं। परन्तु अधिकांश छात्रों को यह शिकायत रहती है कि उन्हें सफलता नहीं मिली जबकि उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी। आखिर अधिकतर छात्रों को यह शिकायत क्यों होती है? क्यों उन्हें लगता है कि सफलता उन्हें नहीं मिली जबकि वे इसके लिए सतत प्रयासरत थे। अधिकतर छात्र इससे निराश हो जाते हैं तथा उनका मनोबल गिरता जाता है और इससे उनकी क्षमता अत्यधिक प्रभावित होती है। इससे उनकी रुचि तथा यहां तक कि याददाश्त क्षमता भी प्रभावित हो जाती है। इससे अगली विफलता का मार्ग प्रशस्त हो जाता है और उनकी सारी योजनाएं धरी रह जाती हैं।

विफलता अगली सफलता को प्रभावित करती है जबकि छात्रों को विफलता का उपयोग अगली बार सफलता को प्राप्त करने में करना चाहिए। यह मान्य तथ्य है कि छात्रों के पास समय का अभाव होता है तथा एक निश्चित अवधि के भीतर ही उन्हें अपनी सभी योजनाओं को कार्यान्वित करना होता है। फलस्वरूप अधिकांश छात्र किसी ऐसे मंत्र या जादू की तलाश में लग जाते हैं जो पलक झपकते ही उनकी मुश्किलें आसान कर दे।


छात्रों को एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए या यूं कहें कि गांठ बाध लेनी चाहिए कि मेहनत का कोई अन्य विकल्प न तो किसी जमाने में था, न अब है और न ही किसी जमाने में होगा। सफलता के लिए आपको खुद ही एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाना होगा। आप खुद अवलोकन करें तो संभव है कि आप कुछ ऐसी बातों को समझ पाएंगे कि कौन-कौन सी बातें आपको सहायता प्रदान कर सकती हैं यथा किस वक्त आप अधिक स्मरण कर सकते हैं, किस वक्त आपको कौन-सी सामग्री का अध्ययन अधिक रमता है, किस वक्त आपको सो जाना चाहिए, किस वक्त आप उठकर अधिक गहनता से अध्ययन कर पाते हैं। ये कुछ ऐसी बातें हैं जो निश्चय ही आपकी क्षमता में वृद्धि कर सकती हैं। परन्तु यहां इस बात को समझ लें कि यह मेहनत का विकल्प नहीं, बल्कि कुछ सहायक बातें हैं, जो आपके द्वारा की जा सकती हैं। इससे आपकी कड़ी मेहनत को आयाम मिलेगा तथा उसके द्वारा अधिक से अधिक सफलता मिलने की संभावना बढ़ेगी।

कई प्रकार के सर्वेक्षणों में भी यह बात सामने आई है कि अधिक मेहनती व्यक्ति, जो सामान्य बुद्धि वाला होता है, सफलता प्राप्त करता है। उनके मुकाबले जो कुशाग्र तो होते हैं, किन्तु कम मेहनत करते हैं, सफलता तक नहीं पहुंच पाते। छात्रों को यह बात अपने जेहन में हमेशा याद रखनी चाहिए कि उनका कार्य कड़ी मेहनत करना है, जिसकी दिशा एवं दशा ठीक और समयानुकूल होनी चाहिए। उसके पश्चात अगर इन्हें असफलता मिलती है तो भी धैर्य खोने की आवश्यकता नहीं अपितु यह देखना चाहिए कि आखिर कहां चूक हो गई। उसमें सुधार कर वे अगली सफलता सुनिश्चित कर सकते हैं। याद रखिए कि सफलता उन्हें ही मिलती है जो सफलता के लिए दृढ़ संकल्प होकर प्रयास करते हैं(अनिल कुमार,दैनिक ट्रिब्यून,7.12.11)।

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06 दिसंबर 2011

राजस्थान ग्रेड सैकंड शिक्षक भर्ती : परीक्षा से पहले हर वो बात, जो आप जानना चाहते हैं!

ग्रेड सैकंड शिक्षक भर्ती परीक्षा में सिर्फ एक दिन शेष रहा है। 33 हजार 500 अभ्यर्थी इसमें शामिल होंगे। परीक्षा में कम देखते हुए अभ्यर्थियों के दिल में कई सवाल उमड़ रहे हैं। चूंकी उनके पास तैयारी के लिए अब बिल्कुल भी समय नहीं रहा है।

एक्सपर्ट्स की राय है कि वे रिवीजन पर जोर दें। दैनिक भास्कर ने अभ्यर्थियों से बातचीत कर उनके दिल में उमड़ रहे कुछ सवालों को टटोला। यह सवाल लेकर हम एक्सपर्ट्स के पास गए। उनसे जाना कि वे अपनी जिज्ञासाओं को कैसे शांत कर सकते हैं।

परीक्षा से जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब

1. परीक्षा कक्ष में जाने से पहले ही घबराहट रहती है। क्या करूं?

: परीक्षा से पहले यानी मंगलवार रात्रि को अधिक समय तक नहीं जागें। नींद पर्याप्त मात्रा में लें। अपने आप पर पूरा विश्वास रखें कि आपने जो पढ़ा है, वह काफी अच्छा है। हमेशा विश्वास रखें कि आप औरों से बेहतर कर सकते हैं।


2. परीक्षा में कितने प्रतिशत तक प्रश्न हल करने चाहिए?
: प्रश्न-पत्र को पढ़ने पर यह मालूम चल जाता है कि प्रश्न किस स्तर का आया है। यदि सवाल आप पूरे विश्वास से सही-सही हल करते जा रहे हैं तो हल करते रहना चाहिए। अधिकतर परीक्षाओं की कट-ऑफ 60-70 प्रतिशत के बीच रहती है। अत: इतने प्रश्न सही हल हो जाने पर नेगेटिव मार्किग से बचना चाहिए। इससे अधिक रिस्क लेने की जरूरत नहीं है। सामान्य ज्ञान के प्रश्न-पत्र में 65-70 प्रश्न और संबंधित विषय में 100-110 प्रश्न यदि पूर्ण सही है तो आगे रिस्क उठाने की आवश्यकता नहीं है।

3. किस प्रकार के प्रश्नों को हल नहीं करना चाहिए?

: ऐसे प्रश्न जो तैयारी करते समय आपके सामने कभी नहीं आए, उन्हें हल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। क्योंकि आपने अपने अनुसार अच्छी तैयारी की है, फिर भी वह प्रश्न आपके सामने नहीं आया तो अन्य अभ्यर्थियों ने भी उसे नहीं पढ़ा होगा। यह सोचकर उसे हल नहीं करना चाहिए।

4. कुछ प्रश्नों में दो विकल्प तो बिल्कुल गलत प्रतीत होते हैं, लेकिन दो विकल्पों में संदेह होने की स्थिति में क्या करें?

: यदि आप पहले राउंड में बिना किसी रिस्क के 60-70 प्रतिशत प्रश्न सही कर चुके हैं तो फिर ऐसे प्रश्नों में भी रिस्क लेने की आवश्यकता नहीं है। मगर पहले राउंड में आप 50-55 प्रतिशत तक ही पहुंच रहे हैं तो फिर थोड़ा सोच-विचार करके ऐसे प्रश्नों को हल करने का प्रयास करना चाहिए। याद रखें, केबीसी में पांच करोड़ विजेता बिहार के सुशील कुमार ने भी अंतिम प्रश्न में डबल डीप लाइफ लाइन का प्रयोग करके ही पांच करोड़ रुपए हासिल किए थे।

5. कुछ सवाल डाउटफुल होते हैं, जिनके चार ऑप्शन गलत होते हैं, क्या करूं?

: ऐसे प्रश्नों को जवाब नहीं देना ही बेहतर होता है। आयोग ऐसे प्रश्नों को फैसला बाद में करता है। कभी बोनस अंक भी मिल जाते हैं।

6. परीक्षा पर और क्या महत्वपूर्ण बातें ध्यान रखनी चाहिए?

: प्रवेश पत्र जरूर लेकर जाए। ओएमआर शीट भरने में नीला बॉल पेल का ही इस्तेमाल करें। याद रखें कि प्रश्न-पत्र व ओएमआर शीट का लिफाफा सील पैक है या नहीं। अगर नहीं है तो उसे लौटा दें। यह आपको पांच मिनट पहले मिलेगा। उत्तर पुस्तिका व ओएमआर सीट का क्रमांक एक ही हो, जरूर देख लें। अलग-अलग भरने पर आपका परिणाम रुक सकता है। वहीं परीक्षा के बाद प्रश्न-पत्र आप साथ ले जा सकेंगे।

कुछ खास बातें

-धैर्यपूर्वक आत्मविश्वास से प्रश्न-पत्र हल करें। तनावमुक्त रहें।

-परीक्षा कक्ष में बैठे अन्य अभ्यर्थी को देखकर कहीं नेगेटिव मार्किग नहीं कर बैठें, क्योंकि कई बार अपने आसपास बैठे अभ्यर्थी जोखिम उठाकर पूरी ओएमआर शीट भर देते हैं। उनको देखकर हमारे मन में भी रिस्क लेने की भावना उत्पन्न होती है। परंतु कभी भी पांच-सात प्रश्नों से अधिक रिस्क नहीं लेनी चाहिए।

-शुरुआती पांच-सात प्रश्न यदि कठिन प्रतीत हो रहे हो तो अंत से प्रश्न हल करना शुरू कर दें। अंत में कठिनता हो तो पांच-सात मिनट अच्छी तरह सोचकर बीच में से (प्रश्न सं. 51 से) धैर्यपूर्वक प्रश्न हल करना शुरू करें। 

-छह दिसंबर को केवल दोहराव में समय दें। शिक्षा मनोविज्ञान व सम-सामयिकी घटनाओं को एक बार फिर से अवश्य देख लें।

-संबंधित विषय की परीक्षा से पहले दिन महत्वपूर्ण तथ्यों का रिवीजन करें। शिक्षण विधियों को एक बार फिर से अवश्य देखें।

106 केंद्रों पर चार दिन का अवकाश घोषित

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जिले के 106 परीक्षा केंद्रों पर सात से दस दिसंबर तक शैक्षणिक अवकाश घोषित किया है। उपनिदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इसके निर्देश सोमवार को भेज दिए हैं। डीईओ बिरदासिंह रावत ने बताया कि ग्रेड सैकंड शिक्षक भर्ती परीक्षा के मद्देनजर सात से दस दिसंबर तक परीक्षा केंद्रों पर शैक्षणिक अवकाश रहेगा।

कॉलेज परीक्षा के यहां होंगे आवेदन पत्र जमा

शिक्षक भर्ती परीक्षा के कारण राजस्थान विश्वविद्यालय की ऑनलाइन एग्जाम के आवेदन जमा कराने की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। एसके कॉलेज प्राचार्य डा. बीएल जांगिड़ ने बताया कि सभी कक्षाओं के लिए आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी सात से दस दिसंबर तक कॉलेज के प्रशासनिक भवन में जमा होगी(दैनिक भास्कर,सीकर,6.12.11)।

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02 दिसंबर 2011

एआईईईई : मॉक टेस्ट के बहाने प्रैक्टिस का मौका

सीबीएसई की ऑल इंडिया इंजिनियरिंग एंट्रेंस में ( एआई ट्रिपल ई ) में चाहे ऑनलाइन एग्जाम हो या ऑफलाइन , कैंडिडेट को अप्लाई ऑनलाइन ही करना है। वेबसाइट www.cbse.nic.in और www.aieee.nic.in के जरिए ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है। ऑनलाइन एग्जाम के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट को एग्जामिनेशन फीस में भी 300 रुपये का फायदा होगा।

डायरेक्टर ने बताया कि 15 दिसंबर के बाद स्टूडेंट्स को वेब बेस्ड मॉक टेस्ट करने का मौका भी मिल सकेगा। सीबीएसई की वेबसाइट पर मॉक टेस्ट देकर स्टूडेंट्स ऑनलाइन एग्जाम की प्रैक्टिस कर सकते हैं। इसके अलावा सीबीएसई अपने सभी स्कूलों को मॉक टेस्ट की कॉपी ईमेल भी करेगी। ताकि वे स्कूल अपने लेवल पर स्टूडेंट्स को मॉक टेस्ट की प्रैक्टिस भी करवा सकें। सीबीएसई एक कॉल सेंटर भी बना रही है। अगर स्टूडेंट्स को एआई ट्रिपल ई को लेकर कोई समस्या आ रही है तो वे कॉल सेंटर पर फोन करके मदद ले सकते हैं। इस एग्जाम के लिए देश भर में करीब 12 लाख कैंडिडेट अप्लाई करते हैं।


इस एग्जाम के जरिए देश भर में नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी ( एनआईटी ), इंडियन इंस्टिट्यूट्स ऑफ इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी ( आईआईआईटी ), डीम्ड यूनिवर्सिटीज और सरकारी सहायता प्राप्त इंस्टिट्यूशन में बीई / बीटेक , बी . आर्क / बी . प्लानिंग कोर्सेज में एडमिशन होता है। पिछले साल बीई / बीटेक की सीटें करीब 26816 और बी . आर्क / बी . प्लानिंग की सीटें 900 से अधिक थी(भूपेंद्र,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,28.11.11)।

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17 नवंबर 2011

गणित को आसान बनाती हैं ये वेबसाइट्स

क्लास कोई भी हो मैथ्स एक ऐसा विषय है, जो हरेक के लिए आसान नहीं होता। इसे समझने के लिए अभ्यास की जरूरत होती है। साथ ही कहीं उलझने पर पारंगत शख्स की मदद लेनी पड़ती है। स्कूल में तो यह काम टीचर कर देते हैं, लेकिन घर पर.. इसके लिए जानें मैथ्स में मदद करने वाली कुछ वेबसाइट्स के बारे में-

क्लास 6 से 12 तक के छात्रों को मैथ्स समझाने की व्यवस्था है। अलग-अलग क्लास के हिसाब से प्रश्नपत्र हल करने की भी सुविधा है। इसका उपयोग करने के लिए पहले इस साइट पर स्वयं को इनरोल कराना होगा।

अगर आपने उच्च शिक्षा में मैथ्स ली है, तो यह साइट काम की साबित होगी। यहां प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों द्वारा मैथ्स पर तैयार पेपर समेत रिसर्च भी मिल जाएगी। सर्च आसान बनाने के लिए टॉपिक्स दिए गए हैं।

मैथ्स की अन्य साइट्स के लिंक हैं। ऐसी यूनिवर्सिटी का ब्यौरा भी मौजूद है, जो मैथ्स के लिए जानी जाती हैं।

मैथ्स की समस्याओं को सुलझाने के साथ इसमें पारंगत होने की टिप्स दी गई हैं। इसमें रीजनिंग और कैलकुलेटिव क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सेट पेपर भी हैं।

प्राइमरी स्तर से मैथ्स समझाने की व्यवस्था है। गणितीय सिद्धांतों के लिए सरल तरीकों का सहारा लिया गया है। चरणबद्ध तरीके से मैथ्स को समझाया जाता है।


यह स्टूडेंट्स में मैथ्स के प्रति डर को खत्म करने के लिहाज से उपयुक्त है। क्लास के हिसाब से टॉपिक्स और पेपर स्टूडेंट की गणितीय क्षमता बढ़ाते हैं।

इसके द्वारा छोटे बच्चों के लिए मैथ किट मिल सकती है, जो खेल-खेल में विषय को समझाने में मदद करती है(दैनिक भास्कर,9.11.11)।

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19 अक्टूबर 2011

ग्रुप-डिस्कशन

ग्रुप-डिस्कशन अथवा सामूहिक विचार-विमर्श, एक प्रकार का वार्तालाप है, जिसमें एक समूह में विभिन्न सदस्य भाग लेते हैं तथा किसी विषय पर अपने-अपने विचार प्रकट करते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के चयन में ग्रुप डिस्कशन का बहुत महत्व है। सुलझे विचार, नेतृत्व क्षमता और सामूहिक स्वीकृति विद्यार्थी को सफलता प्रदान करती है।
आज जिस प्रकार से बाजार में विभिन्न कंपनियां अपने उत्पादों को उपभोक्ताओं के समक्ष पेश कर रही है, बैंक तथा बीमा क्षेत्र में बदलाव आ रहे हैं, वैसी परिस्थितियों में उच्चाधिकारियों द्वारा मिल-बैठ कर विचार-विमर्श के पश्चात ही कोई ठोस आर्थिक कदम उठाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में ग्रुप डिस्कशन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
ग्रुप डिस्कशन के द्वारा सदस्यों के आत्मविश्वास, मानसिक सजगता, स्वयं के प्रभावी विचार, दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान, किसी भी विषय पर अपना आपा खोए बिना विचार-विमर्श करने की क्षमता, तार्किक शक्ति आदि की जांच की जाती है। ग्रुप डिस्कशन में सामान्यत: आठ सदस्य होते हैं जो वृत्ताकार अथवा अद्र्धवृत्ताकार ढंग से एक-दूसरे के सम्मुख स्थान ग्रहण करते हैं। प्रतियोगियों में ग्रुप डिस्कशन के लिए प्राय: दिए गए दो विषयों में से किसी एक विषय का चयन बहुमत के आधार पर किया जाता है। जैसे ही ग्रुप डिस्कशन आफिसर (जीटीओ) की घोषणा करते हैं, सदस्यों को चाहिए कि वे अपने मनोनुकूल एक विषय का चुनाव कर शीघ्रता से उससे संबंधित तथ्यों का आत्मंथन करें। जीटीओ द्वारा डिस्कशन शुरू करने का संकेत देने के साथ ही वार्तालाप प्रारंभ हो जाना चाहिए। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक होगा कि प्रत्येक डिस्कशन के लिए एक निश्चित समय सीमा तय कर दी जाती है। जो सदस्य जैसी योग्यता का प्रदर्शन करता है वैसे ही अंक प्राप्त करता है।
ग्रुप डिस्कशन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान अवश्य रखें :
अगर चर्चा की शुरूआत आपको करनी है, तो उसी विषय पर बातचीत करनी चाहिए जिस विषय पर आपका ज्ञान अच्छा है।
अपना पक्ष प्रभावी रूप से रखने के लिए भाषा पर आपकी पकड़ होना बहुत ज़रूरी है।
डिस्कशन के दौरान ठहाका लगाकर हंसना या किसी साथी के कमजोर तर्क या भाषा आदि का मजाक उड़ाना असभ्यता माना जाता है।
वक्ता होने के साथ ही आपको अच्छा श्रोता भी होना जरूरी है। अगर किसी प्रतियोगी की बात पर आपको सहमति या असहमति व्यक्त करनी हो तो शालीनता के साथ अपना पक्ष रखें।
अन्य प्रतियोगियों को कमजोर या खुद को दूसरों से कमतर न आंकें।
किसी प्रतियोगी पर हावी होने की कोशिश न करें। जिद्दी और नकारात्मक रवैया आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
अगर भटके हुए विषय को आप सूझबूझ से वापस प्रवाह में ला सकें, तो आपका अच्छा प्रभाव पड़ेगा(अनिल कुमार,दैनिक ट्रिब्यून,5.10.11)।

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लाइब्रेरी जाने की आदत डालें

लगभग सभी स्कूल व कालेजों में पुस्तकालय की सुविधा होती है और सभी विद्यार्थियों को लाइब्रेरी कार्ड भी इश्यू होते हैं लेकिन प्राय: देखा गया है कि अनेक विद्यार्थी कभी पुस्तकालय जाते ही नहीं और न ही वे वहां से किताबें इश्यू कराते हैं। बस लाइब्रेरी कार्ड घर पर रखे रखते हैं। उन्हें घर पर रखी किताबें पढऩे की फुरसत नहीं होती, वे लाइब्रेरी की किताबें कब पढ़ेंगे? और ऐसे विद्यार्थी परीक्षा में पिछड़ जाते हैं वे ज्यादा अच्छे अंक नहीं ला पाते।
अकसर ऐसा भी देखा गया है कि कुछ विद्यार्थी कोर्स की या सिलेबस की पुस्तकें तो लाइब्रेरी जाकर पढ़ लेते हैं लेकिन अखबार पढऩा वे समय की बरबादी मानते हैं जबकि सच तो यह है कि समाचार-पत्र सामाजिक ज्ञान का असीम भंडार होते हैं। आपके शहर, राज्य व देश-विदेश में घटित घटनाओं की जानकारियों के अलावा और भी बहुत-सी नयी-नयी बातें समाचार-पत्रों के माध्यम से सीखने को मिलती हैं। समाचार-पत्रों के संपादकीय पढ़कर हमारे ज्ञान के साथ शब्द भंडार में भी वृद्धि होती है। हमें अपना भाषा-ज्ञान सुधारने में मदद मिलती है। अत: पुस्तकालय जाकर नियमित तौर पर अखबार पढऩा चाहिए।
जो विद्यार्थी अपनी पढ़ाई और करिअर के प्रति गंभीर होते हैं वे पुस्तकालय का लाभ जरूर उठाते हैं। वहां आपको एक ही विषय पर विभिन्न लेखकों की पुस्तकें उपलब्ध होती हैं जिन्हें पढ़कर आप अपने नोट्स तैयार कर सकते हैं। एक ही विषय पर विभिन्न लेखकों की पुस्तकें पढऩे से जहां विषय की अवधारणा आपके मन में स्पष्ट होती है वहीं लिखने की अलग-अलग शैलियों से भी आप परिचित होते हैं जिससे आप परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं और जिन्दगी में मनचाहा मुकाम हासिल कर सकते हैं।
अगर आप भी उन विद्यार्थियों में से हैं जो पुस्तकालय नहीं जाते तो आज ही अपनी आदत बदल डालिए और संकल्प लें कि आप अपने स्कूल-कालेज की लाइब्रेरी में नियमित रूप से जाएंगे और वहां उपलब्ध पुस्तकों, पत्रिकाओं और समाचार-पत्रों से लाभ उठाएंगे(सुरेन्द्र राणा,दैनिक ट्रिब्यून,19.10.11)।

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10 अक्टूबर 2011

ऑनलाइन एआईईईई: समस्या के समाधान के लिए मॉक टेस्ट

इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से आयोजित हो रहा ऑनलाइन एआईईईई छात्रों के लिए सरल होने जा रहा है।

परीक्षा को लेकर छात्रों की तमाम उलझनों को दूर करने के लिए बोर्ड खास तरह की अभ्यास परीक्षा (मॉक टेस्ट) का इंतजाम कर रहा है। इसके तहत इस बार ऑनलाइन परीक्षा का विकल्प चुनने वालों को तैयारी के लिए भरपूर सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। परीक्षा की जिम्मेदारी मुख्य परीक्षा का आयोजन कर रही एजेंसी को सौंपा गया है। सीबीएसई के स्पेशल एग्जामिनेशन (निदेशक) पीतम सिंह के मुताबिक मॉक टेस्ट उम्मीदवारों के मन में पैदा होने वाली शंकाओं के निवारण के लिए तैयार किया जा रहे हैं। इनकी मदद से छात्र पहले से ही कम्प्यूटर आधारित ऑनलाइन परीक्षा के लिए तैयार हो सकेंगे। ऑनलाइन एग्जाम का आयोजन कराने के लिए एजेंसियों के चयन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इस माह के अंत तक जिस एजेंसी का चुनाव किया जाएगा उसे ही मॉक टेस्ट तैयार करने का जिम्मा भी सौंपा जाएगा। बोर्ड के अनुसार यह टेस्ट सिर्फ ऑनलाइन एग्जाम का विकल्प भरने वालों के लिए होंगे। इससे उन्हें कम्प्यूटर पर ही प्रश्नपत्र हल करने की तरकीब समझने में मदद मिलेगी। यह मॉक टेस्ट उम्मीदवारों को वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाएंगे। संभावना जताई जा रही है कि यह टेस्ट छात्रों का तैयारी के लिए दिसबंर से पहले ही अपलोड कर दिए जाएंगे। सिंह ने कहा कि उम्मीदवारों को सलाह है कि जो भी ऑनलाइन का विकल्प भरें वह पहले से ही कंप्यूटर पर इसे अंजाम देने की प्रक्रिया को सीख लें(दैनिक भास्कर,दिल्ली,10.10.11)।

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28 सितंबर 2011

बैंक पीओ के लिए कैसी हो स्ट्रैटिजी

बैंक पीओ का करियर आज युवाओं को काफी लुभा रहा है। विभिन्न सरकारी बैंकों में आने वाले रिक्तियों को देखकर स्टूडेंट फार्म तो भरने देते हैं, लेकिन रणनीति के अभाव में वे असफल हो जाते हैं। बेहतर रणनीति और समय प्रबंधन के साथ अगर तैयारी की जाय तो यकीनन बाजी मारी जा सकती है।

योग्यता
पीओ की परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी को कम से कम 55 प्रतिशत के साथ स्नातक होना चाहिए। कुछ बैंकों में प्रथम श्रेणी से स्नातक मांगा जाता है। इसके लिए कैंडिडेट्स की उम्र 21 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। ओबीसी के लिए तीन और एससी व एसटी के पांच वर्ष की छूट है।

परीक्षा

परीक्षा दो चरणों में संपन्न होती है: लिखित और इसके बाद ग्रुप डिस्कशन और साक्षात्कार। लिखित परीक्षा के लिए 250 अंक और ग्रुप डिस्कशन व इंटरव्यू के लिए 50 अंकों का प्रावधान होता है। इस प्रकार बैंक पीओ परीक्षा कुल 300 अंक की होती है। लिखित परीक्षा का आयोजन भी दो सत्रों में किया जाता है : कम्बाइंड ऑब्जेक्टिव टेस्ट तथा डिस्क्रिप्टिव। फर्स्ट पेपर 200 अंकों का होता है जबकि दूसरा पेपर 50 अंकों का होता है। फर्स्ट पेपर में 200 अंकों के लिए रीजनिंग, डाटा, एनालिसस व इंटरप्रिटेशन, मार्केटिंग व कम्प्यूटर अवेयरनेस, सामान्य अंग्रेजी तथा सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। 

रीजनिंग टेस्ट 
उच्चस्तरीय रीजनिंग टेस्ट से 50 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसमें 30 प्रश्न वर्बल रीजनिंग के होते हैं। वर्बल रीजनिंग में टीम फॉरमेशन, पजल, एनालिटिकल रीजनिंग तथा स्टेटमेंट पर आधारित सवाल होते हैं। स्टेटमेंट आधारित सवालों में किसी स्टेटमेंट से निष्कर्ष निकालना, और पूर्वानुमान आदि लगाना होता है। इसके लिए उत्तर उस स्टेटमेंट से ही संबंधित होना चाहिए न कि इसमें अपने विचार शामिल हो। 

इसके प्रश्न ज्यादातर समसामयिक, सामाजिक और आर्थिक मसलों पर आधारित होते हैं। वर्बल रीजनिंग में सामान्य रीजनिंग से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। नॉन-वर्बल में रेखाचित्र पर आधारित सवाल पूछे जाते हैं, जिसमें सफलता आपके प्रैक्टिस और प्रिपरेशन पर निर्भर करती है। 

डाटा एनालिसिस और इंटरप्रिटेशन 
इसी प्रकार डाटा एनालिसिस तथा इंटरप्रिटेशन खंड से 50 प्रश्न पूछे जाते हैं जिसमें डाटा इंटरप्रिटेशन से 35 और डाटा एनालिसिस के 15 प्रश्न शामिल होते हैं। इसमें व्यवहारिक गणित तथा वाणिज्यिक गणित पर आधारित प्रश्न डाटा और ग्राफिक्स से संबंधित होते हैं। इसके लिए दशमलव, भिन्न, लाभ-हानि, बट्टा, साधारण ब्याज, चक्रवृद्धि ब्याज, औसत, अनुपात-समानुपात, काम-समय, चाल-समय, प्रतिशतता और मेंसुरेशन की तैयारी अच्छे ढंग से कर लेनी चाहिए। मार्केटिंग और कंप्यूटर अवेयनेरस से भी 50 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें 30 प्रश्न सामान्य ज्ञान से, 10 प्रश्न मार्केटिंग से और 10 सवाल कंप्यूटर अवेयरनेस से होते हैं। 

सामान्य ज्ञान 
इसके तहत सामाजिक-आर्थिक व राजनैतिक रूप से जुड़े राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके अलावा पारंपरिक सामान्य ज्ञान पर आधारित प्रश्न भी पूछे जाते हैं, मार्केटिंग एप्टिट्यूड के अंतर्गत मार्केटिंग और बैंकिंग से संबंधित बेसिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि कंप्यूटर अवेयरनेस के अंतर्गत कंप्यूटर, इंटरनेट तथा एमएस आफिस पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। 

अंग्रेजी 
इसी तरह सामान्य अंग्रेजी के खंड में 50 प्रश्न पूछे जाते हैं, जो इंग्लिश ग्रामर, पैसेज, पैराग्राफ्स, फिल इन द ब्लैंक्स, करैक्ट द सेंटसेंज, एंटोनिम, सिनोनिम आदि से संबंधित होते हैं। दूसरे सत्र में आयोजित होने वाला डिसक्रिप्टिव टेस्ट अंगेजी भाषा पर आधारित होता है, जिसमें शॉर्ट प्रॉसेस, लेटर राइटिंग और आर्टिकल से संबंधित प्रश्न होते हैं। इसमें 50 अंक के पांच प्रश्न होते हैं, जिनके 200 से 250 शब्दों में वर्णन करने और लिखने की क्षमता, करेंट डिवेलपमेंट और कम्यूनिकेशन स्किल्स की दक्षता का आंकलन किया जाता है। मेरिट सूची में बने रहने के लिए इस पेपर में न्यूनतम अंक हासिल करना जरूरी है। 

ग्रुप डिस्कशन तथा इंटरव्यू 
कंबाइंड ऑब्जेक्टिव और डिस्क्रिप्टिव टेस्ट के मॉर्क्स को जोड़कर मेरिट लिस्ट में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कैंडिडेट्स को पदों की संख्या के आधार पर दूसरे चरण में गुप डिस्कशन तथा इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। यह कुल 50 अंकों का होता है, जिसमें 20 अंकों का ग्रुप डिस्कशन तथा 30 अंकों का इंटरव्यू होता है। इसमें भी न्यूनतम 40 फीसदी अंक प्राप्त करने के बाद ही अंतिम रूप से चयन के लिए बुलाया जाता है। 
(अर्चना कुमारी,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,28.9.11)

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मैट से मैनेजमेंट की राह

बिजनेस स्कूलों में ऐडमिशन लेने के लिए कैट और मैट, दो एग्जाम्स प्रमुख हैं। मैट की खासियत यह है कि यह एग्जाम साल में चार बार होता है: फरवरी, मई, सितंबर और दिसंबर। इस एग्जाम में बैठने के लिए स्टूडेंट का ग्रैजुएट या ग्रैजुएशन अंतिम वर्ष का स्टूडेंट होना जरूरी है। परसेंटेज की बात करें तो अलग अलग बिजनेस स्कूलों या यूनिवर्सिटीज के अपने-अपने मापदंड हैं और इसके लिए आपको अपने पसंद के संस्थान से ही पता करना होता है।

मैट के साल में चार बार होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि असफल हो जाने पर भी आपका साल बर्बाद होने जैसी बात नहीं है। आपको एक बार में हुई गलती को दूर करने का मौका चार महीने बाद ही मिल जाता है। मैट का पैटर्न भी फिक्सड है। पेपर में कुल पांच हिस्से होते हैं: मैथ्स, डाटा इंटरप्रेटेशन, रीजनिंग, लैंग्वेज कॉम्प्रीहेंशन और जनरल नॉलेज (भारतीय व वैश्विक परिवेश)। मैट का पेपर कठिन तो होता है, लेकिन इतना भी नहीं कि आप कर नहीं सकते। बेसिक कॉन्सेप्ट क्लीयर हो, तो आप इसमें बेहतर प्रर्दशन कर सकते हैं।

सिक्शनल कट ऑफ नहीं
मैट में सबसे अच्छी बात है कि इसमें सिक्शनल कट ऑफ नहीं होता है। आप अगर अपने मजबूत पक्ष पर ध्यान देंगे तो इसमें अच्छा स्कोर कर सकते हैं। अगर आप ने दो सौ में से आधे सवाल भी ठीक-ठीक कर दिए तो अच्छा परसेंटाइल लाना पक्का है। याद रखें पढ़ाई के साथ सक्सेस के लिए प्रैक्टिस अहम है। गणित की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकों से मदद लें और चाहें तो कोचिंग करें। कोचिंग लेने से आपको डाटा इंटरप्रेटेशन में भी मदद मिलेगी। और सबसे बड़ी बात कि समय का ख्याल रख ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करें। अगर डमी टेस्ट में 90 से ज्यादा परसेंटाइल ला रहे हैं तो आप अच्छे कॉलेज में प्रवेश पाने की उम्मीद कर सकते हैं। लैंग्वेज कॉप्रीहेंशन की बेहतर तैयारी के लिए रीडिंग अच्छी होनी चाहिए। साथ ही वॉकेबलरी का भी अच्छा होना जरूरी है। मॉक टेस्ट से काफी मदद मिल सकती है। जहां तक माकिंर्ग की बात है तो नेगेटिव मार्किंग भी होती है। सही प्रश्न के चार अंक मिलते हैं और गलत होने पर एक अंक काट लिए जाते हैं।

एग्जाम में क्या

पेपर में नेगेटिव मार्किंग भी होती है। इसलिए उतने ही प्रश्न करें जो आपको आते हैं। हां, हल किए गए प्रश्नों में से कम से कम 80-85 फीसदी और कुल प्रश्नों के हिसाब से 50 फीसदी से ऊपर प्रश्न सही होने चाहिए। स्पीड, एक्युरेसी और टाइम लिमिट को ध्यान में रखते हुए तैयारी करनी चाहिए। 
पेपर के पांच सेक्शन 
सभी सेक्शनों में 40-40 सवाल होते हैं। कुल 200 सवाल होते हैं। 

मैथ्स 
यह पेपर बेसिक और कैलकुलेटिव होता है। ज्यादा तर सवाल फॉर्म्युले पर आधारित होते हैं। इसी आधार पर सवालों को हल करना होता है। हर प्रश्न के चार विकल्प होते हैं। इसमें अर्थमेटिक्स, परसेंटेज, प्रॉफिट एंड लॉस, सिंपल एंड कंपाउंड इंट्रेस्ट, स्पीड व डिस्टेंस वगैरह पर सवाल होते हैं। लेवल की बात करें तो कुछ टॉपिक 12वीं स्तर तक के भी होते हैं। 

जनरल नॉलेज 
इस सब्जेक्ट के स्कोर को परसेंटाइल में शामिल नहीं किया जाता है। कई कॉलेज हालांकि जीके के स्कोर को भी देखते हैं। ध्यान रहे अन्य विषयों के लिए जहां 30 से 40 मिनट का समय मान कर चला जाता है वहीं जीके के लिए 15 मिनट का ही समय एग्जाम आयोजकों की ओर से माना गया है। 

मैथ्स 
ज्यादा तर सवाल फॉर्म्युले पर आधारित होते हैं। इसी आधार पर सवालों को हल करना होता है। लेवल की बात करें तो कुछ टॉपिक 12स्तर तक के भी होते हैं। लेकिन कुल मिलाकर यह पेपर बेसिक और कैलकुलेटिव होता है। इसमें अर्थमैटिक्स, परसेंटेज, प्रॉफि़ट ऐंड लॉस, सिंपल ऐंड कंपाउंड इंटरेस्ट, स्पीड व डिस्टेंट वगैरह पर सवाल होते हैं। लेवल की बात करें तो कुछ टॉपिक 12स्तर तक के भी होते हैं। 

रीजनिंग 
इसमें कोडिंग ऐंड डीकोडिंग, डायरेक्शन सेंस, रीजन ऐंड एसरशन, ब्लड रिलेशन, स्टेटमेंट कनक्लूजन, इंफ़रेंशियल रीजनिंग, एनालिटिकल रीजनिंग आदि टॉपिक्स पर सवाल पूछे जाते हैं। 

लैंग्वेज 
इसमें रीडिंग कॉम्प्रीहेंशन, पैरा जंबल, ग्रामर आदि से संबंधित प्रश्न आते हैं। 

डेटा इंटरप्रेटेशन 
इसमें टेबल, बार ग्राफ़, लाइन ग्राफ़, पाइ चार्ट, डेटा सफि़शिएंस के टॉपिक्स आते हैं।
(निर्भय कुमार,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,28.9.11)

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08 सितंबर 2011

श्रेष्ठ बी स्कूलों में प्रवेश की कुंजी

सीएटी, एक्सएटी और एमएटी जैसी महत्त्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं के बारे में यहां हम आपको दे रहे हैं ताजातरीन जानकारियां।

हर साल लाखों छात्र, भारत के सर्वश्रेष्ठ एमबीए इंस्टीटय़ूट्स में प्रवेश लेने के लिए कॉमन एप्टीटय़ूड टेस्ट (सीएटी) और दूसरी प्रवेश परीक्षाओं में बैठते हैं। इनमें से कुछ छात्र ही इन प्रवेश परीक्षाओं में सफल हो पाते हैं। यहां हम आपको देश के सबसे अहम बी स्कूलों की प्रवेश परीक्षाओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

कैट से जुड़ने के लिए

दो साल पहले तक, कॉमन एप्टीटय़ूड टेस्ट (सीएटी) को कागज और पेंसिल के इसके मूल स्वरूप से कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदला गया था। इस साल सभी आईआईएम ने इसमें एक और बदलाव किया है। कैट में अब 30-30 सवालों के दो सेक्शन होंगे और हर सेक्शन के लिए छात्रों को 75 मिनट का समय मिलेगा। छह नये स्थापित आईआईएम ने भी ग्रुप डिस्कशन को छोड़ने का फैसला किया है। इसकी बजाय ये भी अब व्यक्तिगत इंटरव्यू और लिखित एनालिसिस टेस्ट कंडक्ट करेंगे।
एक्सएलआरआई, एसपी जैन 
एक्सएटी का आयोजन हर साल एक्सएलआरआई कराता है। लगभग 70 ऐसे बी स्कूल हैं, जो इस परीक्षा के आधार पर छात्रों को प्रवेश देते हैं। इनमें एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (मुंबई), गोवा इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट और एक्सआईएम (भुवनेश्वर) भी शामिल हैं। सबसे चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले इस टेस्ट-एक्सएटी-2011 में लगभग एक लाख छात्रों ने भाग लिया। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल यह परीक्षा काफी मुश्किल थी। हालांकि इसमें सवालों की संख्या 101 थी, जिन्हें तीन भागों में बांटा गया था। कुल मिले अंकों में से एक चौथाई अंक हर गलत जवाब के लिए कम कर दिये गये। हर सवाल एक से पांच अंक के बीच का था। पिछले साल की तुलना में इस साल दो सेक्शंस-क्वांटिटेटिव एबिलिटी व डाटा इंटरप्रिटेशन, एनालिटिकल रीजनिंग और डिसिजन मेकिंग-बहुत ज्यादा ट्रिकी और टाइम लेने वाले थे।
वर्बल एबिलिटी और लॉजिकल रीजनिंग सेक्शन में 69 मार्क्स के 34 सवाल थे। पूरे टेस्ट में यही सेक्शन सबसे आसान था। पंक्चुएशन मार्क्स और फिल इन दि ब्लैंक्स के रूप में ग्रामर और वोकेबलरी पर पहली बार सवाल थे। एक्सएटी में कन्क्लूडिंग पार्ट के रूप में एक पेज का 20 मिनट का एक एस्से लिखना था। इसके लिए छात्रों को आसान भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
एफएमएस में जाने के लिए
फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली अपनी खुद की प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करती है। इस साल भी एफएमएस ने पिछले साल के पैटर्न को ही फॉलो किया। इसमें, चार भागों में 200 सवाल थे। हर गलत सवाल के लिए एक अंक की पैनल्टी थी। पूरा पेपर चार भागों में बंटा था-रीडिंग कॉप्रिहेंशन, लॉजिकल रीजनिंग, वर्बल एबिलिटी, क्वांटिटेटिव एबिलिटी। इनमें से प्रत्येक सेक्शन 50 अंकों का था और पूरे पेपर के लिए 120 मिनट का समय था।
क्या आईआईएफटी आपके लिए सही है?
आईआईएफटी, उन छात्रों के लिए एक लोकप्रिय परीक्षा है, जो इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ फॉरेन ट्रेड, दिल्ली में प्रवेश लेना चाहते हैं। नवंबर के चौथे सप्ताह में होने वाली इस परीक्षा में आसान और मुश्किल, दोनों ही तरह के सवाल होते हैं। आईआईएफटी 2010 में कुल 135 सवाल थे। 100 अंकों का यह पेपर चार भागों में था। हर गलत जवाब के लिए एक तिहाई अंक काट लेने का प्रावधान था। चौथे भाग में छात्रों का सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर का ज्ञान टैस्ट किया गया था। छात्रों से पब्लिक बैंकों, ब्रांड एम्बेसडर, महिला सीईओज से संबंधित सवाल पूछे गये थे। इसके अलावा रिपब्लिक डे पर चीफ गेस्ट कौन था, इंटरनेशनल संगठनों की लोकेशंस आदि से संबंधित सवाल भी पूछे गये थे। पेपर काफी लंबा था।
मैट (एमएटी) में मास्टरी
मैनेजमेंट एप्टीटय़ूट टेस्ट या मैट (एमएटी) परीक्षा साल में चार बार होती है। मई 2010 में पहली बार छात्रों को पेपर बेस्ड टैस्ट की जगह कंप्यूटर बेस्ड टैस्ट का विकल्प दिया गया था। इस टैस्ट में, पांच भागों में 200 सवाल थे, जिसमें छात्रों की विभिन्न तरह की योग्यताओं को परखा गया था। जैसे क्रिटिकल रीजनिंग, मैथमैटिकल स्किल्स, डाटा एनालिसिस एंड सफिशिएंसी, लैंग्वेज कम्पेरिजन और जनरल अवेयरनेस। इसके अलग-अलग पेपरों में कठिन सवालों का स्तर भी अलग होता है। छात्रों का मुख्य फोकस फंडामेंटल्स ऑफ क्वांट, न्यूमेरिकल डाटा की जानकारी और अंग्रेजी भाषा पर अच्छी कमांड, रीडिंग हैबिट, प्रैक्टिकल एनालिटिकल प्रश्न पर होना चाहिए। ऑनलाइन मॉक टेस्ट इसमें आपकी मदद कर सकते हैं।
(अभिषेक गुप्ता,हिंदुस्तान,दिल्ली,6.9.11)

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30 अगस्त 2011

बैंक कॉमन रिटन एग्जामःनए पैटर्न में आजमाएं खुद को

बैंकिंग सेक्टर हमेशा से युवाओं का पसंदीदा करियर रहा है। अभी तक वह बैंक में जॉब हासिल करने के लिए अलग-अलग परीक्षाओं से जूझता था, लेकिन अब देश के प्रमुख 19 राष्ट्रीयकृत बैंक कॉमन रिटन एग्जाम का आयोजन कर रहे हैं। 

परीक्षा की तिथि - 18 सितंबर 2011

बैंकिंग सेक्टर शुरू से ही युवाओं के लिए रोजगार देने वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहा है। आजकल यह सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। मैकिन्स की रिपोर्ट ‘इंडिया बैंकिंग 2010’ की मानें तो भारत में बैंकिंग सेक्टर 2001 से ही 51 प्रतिशत की वार्षिक दर से विकास कर रहा है। लगभग 7,500 अरब के बाजार पर स्थापित हो चुका यह सेक्टर 7.7 प्रतिशत की जीडीपी भी हासिल कर चुका है। साथ ही यह 1.5 मिलियन (लगभग 15 लाख) जॉब भी प्रदान करने वाला सेक्टर बन चुका है। प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंकों में कई ऐसे पदों की बड़े पैमाने पर रिक्तियां निकलती हैं, जिनसे बेरोजगारी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। इन्हीं पदों में से एक प्रोबेशनरी ऑफिसर एवं मैनेजमेंट ट्रेनी भी है। पहले इन पदों के लिए प्रमुख बैंक अलग-अलग एग्जाम करवाते थे, लेकिन इस बार इसमें नया नियम लागू हुआ है। करीब 19 पब्लिक सेक्टर बैंक मिल कर एक कॉमन रिटन एग्जाम (सीडब्ल्यूई) का आयोजन करने जा रहे हैं, जिसे इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) द्वारा दिशा-निर्देशित किया जाएगा। इस प्रोबेशनरी ऑफीसर एवं मैनेजमेंट ट्रेनी पदों के लिए एग्जाम का आयोजन इंस्टीटय़ूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) द्वारा किया जाएगा।

परीक्षा बैंक पीओ के पैटर्न पर
इस परीक्षा का पैटर्न काफी कुछ इससे पहले होने वाली बैंक पीओ परीक्षा के समान ही है। फिर भी उम्मीदवार के लिए सलाह है कि वे मूल विज्ञापन अथवा परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था की वेबसाइट से अवश्य जानकारी प्राप्त कर लें। इसमें रीजनिंग, इंग्लिश लेंग्वेज, क्वांटिटेटिव एप्टीटय़ूड, जनरल अवेयरनेस, कम्प्यूटर नॉलेज से संबंधित कुल 250 प्रश्न पूछे जाने की संभावना है। कुल अंक 250 तथा समय 150 मिनट का होता है।
इंग्लिश कंपोजिशन को छोड़ शेष प्रश्न ऑब्जेक्टिव
इसमें पूछे जाने वाले सभी सेक्शनों के प्रश्न ऑब्जेक्टिव होते हैं, जबकि इंग्लिश सेक्शन के अंतर्गत आने वाले इंग्लिश कंपोजिशन के प्रश्न डिस्क्रिप्टिव होते हैं। इसके लिए कुल 25 अंक तथा समय 60 मिनट निर्धारित हैं। इंग्लिश वाले भाग को छोड़ कर शेष सभी प्रश्न दोनों माध्यम अर्थात हिन्दी व अंग्रेजी में होते हैं।

गलत उत्तर पर निगेटिव मार्किग
इस एग्जाम में उम्मीदवार को सोच-समझ कर प्रश्नों के उत्तर देने होंगे, क्योंकि गलत उत्तर दिए जाने पर निगेटिव मार्किग का प्रावधान है। यदि कोई उम्मीदवार गलत उत्तर देता है तो उसके एक चौथाई अंक काट लिए जाएंगे, इसलिए जिन प्रश्नों को लेकर मन में किसी प्रकार की दुविधा हो तो उसे छोड़ कर आगे बढ़ जाएं। बाद में समय मिलने पर उन्हें एकबारगी देख सकते हैं।

तार्किक शक्ति विकसित करें
रीजनिंग सेक्शन के माध्यम से उम्मीदवार की तार्किक क्षमता का पता लगाने की कोशिश की जाती है। यह सेक्शन पूरी तरह से उम्मीदवार की सोच एवं समझ पर निर्भर करता है। इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। यह आंशिक रूप से शब्दों, आकृति एवं रेखाचित्रों पर आधारित होते हैं, जिन्हें भाषिक या गैर भाषिक की संज्ञा दी जाती है।

सारणी एवं आलेख की प्रैक्टिस करें
क्वांटिटेटिव एबिलिटी के भाग में प्रश्न सारणी अथवा आलेख पर निर्भर होते हैं। इसका उद्देश्य संख्यात्मक गणनाओं, जैसे संगणन, संख्यात्मक तर्कसंगतता, सारणियों एवं आलेखों से निष्कर्ष निकालने आदि में आपकी गति एवं सटीकता को जांचना है। इसमें प्रत्येक आलेख या सारणी का सावधानीपूर्वक परीक्षण कर उन्हें कॉपी में अंकित करना होगा।

ग्रामर पर अधिक ध्यान दें
उम्मीदवार की अंग्रेजी भाषा पर कितनी पकड़ है तथा वह कितनी दक्षता के साथ इसके शब्दों को लिख-पढ़ सकता है, यह इंग्लिश लेंग्वेज सेक्शन के माध्यम से आंका जाता है। वोकेबलरी, एंटानिम्स, सिनानिम्स, वाक्य प्रयोग तथा फिल इन दि ब्लैंक्स पर प्रश्न भी होते हैं।
इसमें एस्से राइटिंग व लेटर राइटिंग का भी निरंतर अभ्यास करें।

घटनाक्रमों पर नजर रखें
उम्मीदवार को अपने आस-पास घटने वाली समकालीन घटनाओं के अलावा बैंकिंग इंडस्ट्री पर अपनी जानकारी अपडेट रखनी चाहिए। इसमें पूछे जाने वाले प्रश्न वर्तमान घटनाक्रम, भूगोल, इतिहास, देश की राजनीति, सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम व भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताओं पर भी हो सकते हैं।

कम्प्यूटर के बेसिक्स क्लीयर करें
ऐसी जानकारी, जो रोजमर्रा के कम्प्यूटर के प्रयोग के लिए जरूरी है या उनके पार्ट्स का पूरा नाम भी इस भाग में पूछा जा सकता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में पूरी तरह से अवगत रहें, क्योंकि अधिकांश सवाल उसी से पूछे जाते हैं। कॉललेटर डाउनलोड करने के लिए वेबसाइट www.ibps.in विजिट करें(संजीव कुमार सिंह
,हिंदुस्तान,दिल्ली,30.8.11)।

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19 अगस्त 2011

असिस्टेंट लोको पायलट परीक्षा

रेलवे ने असिस्टेंट लोको पायलट के लिए 16595 रिक्त पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक आवेदक इसके लिए आवेदन कर रेलवे में जॉब पाने के अपने सपने को सच कर सकते हैं। जॉब से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्तान जॉब्स के इस सप्ताह के अंक को देख सकते हैं। परीक्षा की तैयारी कैसे करें, यहां इस बारे में बताया जा रहा है।

इन बातों का रखें ध्यान
निगेटिव मार्किंग के कारण प्रश्नों का उत्तर ध्यान से दें
शुरू से ही स्पीड मेंटेन करने की कोशिश करें
कोई प्रश्न नहीं आता तो दूसरे प्रश्न को हल करें
परीक्षा से पूर्व दिमाग पूरी तरह से कूल रखें
पिछले कुछ साल के पेपरों को हल करें
रेगुलर प्रैक्टिस को अमल में लाएं
आवेदन की अंतिम तिथि- 12 सितम्बर 2011
परीक्षा की तिथि व स्थान- बाद में घोषणा होगी
भारतीय रेल हमेशा से देश के युवाओं को बड़ी संख्या में जॉब उपलब्ध करवाने वाली रही है। समय-समय पर इसकी विभिन्न शाखाओं से संबंधित रिक्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं, पर इस बार जितनी रिक्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, वे देश के अनेक बेरोजगार युवाओं के रोजगार प्राप्त करने के सपनों को साकार करने में सक्षम हैं। रेलवे ने असिस्टेंट लोको पायलट के 16,595 पदों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं।

हादसों को रोकने व रेलवे की व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए रेल मंत्रालय ने विभिन्न पदों पर इस बंपर भर्ती प्रक्रिया को शुरू किया है। इन पदों के लिए निकाली गई इन रिक्तियों का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। रेलवे अपने 21 भर्ती बोर्डो के जरिए इन पदों को भरने का कार्य करेगा।
योग्यता 
असिस्टेंट लोको पायलट के लिए वही छात्र योग्य माने जाएंगे, जिन्होंने मैट्रिक अथवा उसके समकक्ष कोई योग्यता हासिल की हो। इसके अलावा संबंधित विभिन्न ट्रेडों में आईटीआई डिग्री या एआईसीटीई से मान्यताप्राप्त डिप्लोमा सर्टिफिकेट अनिवार्य है। शैक्षिक योग्यता के साथ-साथ छात्रों के लिए आयु-सीमा का भी बंधन रखा गया है। इसके तहत उनकी आयु 18-30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित श्रेणी के छात्रों को नियमानुसार छूट का भी प्रावधान है।
परीक्षा तीन चरणों में
असिस्टेंट लोको पायलट बनने का सपना तभी पूरा हो पाता है, जब उम्मीदवार बोर्ड द्वारा आयोजित तीनों चरणों को पार कर ले। ये तीन चरण निम्न हैं-
रिटन टेस्ट
एप्टीटय़ूड टेस्ट 
डॉक्यूमेंट की जांच
ऑब्जेक्टिव प्रश्न और निगेटिव मार्किंग
इस परीक्षा में कुल 120 प्रश्न पूछे जाते हैं तथा उनके लिए डेढ़ घंटे का समय निर्धारित होता है। प्रश्नों का स्वरूप ऑब्जेक्टिव होता है तथा उनके माध्यम हिन्दी और अंग्रेजी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी होंगे। इस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग का प्रावधान किया गया है यानी तीन गलत उत्तर देने पर एक सही उत्तर के अंक काट लिए जाएंगे। रिटन टेस्ट में सफल होने के बाद ही एप्टीटय़ूड टेस्ट में बैठने का मौका मिलता है। प्रश्न जनरल अवेयरनेस, अर्थमेटिक्स, जनरल इंटेलीजेंस और रीजनिंग, जनरल साइंस और संबंधित टेक्निकल योग्यता से जुड़े पूछे जाते हैं। इनका लेवल दसवीं का ही होता है।
एनसीईआरटी की किताबें सहायक
सामान्य अध्ययन एवं अन्य विषयों के अध्ययन के लिए एनसीईआरटी की किताबें सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। इनके प्रश्नों में मुख्य रूप से इतिहास, राजव्यवस्था, भूगोल, अर्थव्यवस्था सहित करेंट अफेयर्स आदि शामिल होते हैं। इसी तरह से विज्ञान के सेक्शन में भौतिकी व रसायन विज्ञान से संबंधित प्रश्न होते हैं।
प्रेजेंस ऑफ माइंड की दरकार
जनरल इंटेलिजेंस एवं रीजनिंग के प्रश्नों को तभी हल किया जा सकता है, जब उम्मीदवार अपने प्रेजेंस ऑफ माइंड का तत्परता से प्रयोग करेंगे। तर्कशक्ति के प्रश्नों में वर्बल और नॉन वर्बल, दोनों तरह के प्रश्न शामिल होते हैं, जिसमें मुख्य रूप से क्लाक, मैच फंडिंग, कैलेंडर आदि शामिल होते हैं। रेगुलर प्रैक्टिस के जरिए इन प्रश्नों पर पकड़ बनाई जा सकती है।
फॉर्मूलों को प्रयोग में लाएं
मैथ्स में पूछे गए प्रश्न दसवीं लेवल के होते हैं तथा इनमें मुख्य रूप से लाभ-हानि, ज्यामिति, समय-दूरी, त्रिकोणमिति, वर्ग, प्रतिशत शामिल होते हैं। इन प्रश्नों को हल करने के लिए फॉर्मूलों को लगातार प्रयोग में लाना आवश्यक है। इस सेक्शन को रटने की बजाए निरंतर अभ्यास से हल करने की कोशिश करें।
साइंस एवं टेक्निकल एबिलिटी पर फोकस
पूर्व में पूछे गए प्रश्नों को देखने पर स्पष्ट है कि इसमें साइंस एवं टेक्निकल एबिलिटी के प्रश्न भी स्कोरिंग होते हैं। कुछ प्रश्न अंग्रेजी के भी हो सकते हैं। विज्ञान में भौतिकी व रसायन के साथ-साथ रेलवे से जुड़े कुछ तकनीकी शब्दों एवं उनके पहलुओं की जानकारी हासिल करें।
अधिक जानकारी के लिए बोर्ड की वेबसाइट www.indianrail.gov.in विजिट करें(संजीव कुमार सिंह,हिंदुस्तान,दिल्ली,17.8.11)।

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18 अगस्त 2011

प्रैक्टिस बनाए परफेक्ट

किसी भी काम की आप जितनी प्रैक्टिस करेंगे, सफलता की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी।

सिर्फ प्लानिंग से ही बात नहीं बनती, बल्कि किसी भी उद्देश्य को लेकर की गई प्लानिंग तभी सफलता की ओर ले जाती है, जब उससे संबंधित कार्यों की प्रैक्टिस की जाए। असल में उचित योजना और निरंतर अभ्यास के बल पर ही मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। आपके पास क्षमता हो सकती है, आप प्रतिभावान हो सकते हैं, आपमें दृढ़ इच्छाशक्ति हो सकती है और आपमें आत्मविश्वास भी हो सकता है। इसके बावजूद यदि अपने काम का अभ्यास आप नहीं करेंगे, तो आपका प्रदर्शन उस हद तक नहीं हो सकता, जैसी आपकी अपेक्षा थी। यदि आप परफेक्ट होना चाहते हैं तो प्रैक्टिस जरूरी है।


यदि मानव जीवन पर नजर डालें तो बचपन से ही सीखने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और यह सीखना सतत अभ्यास के माध्यम से ही होता है। चाहे चलना हो या बोलना, अभ्यास से बच्चा सबकुछ सीखता है। वह बार-बार गिरता है, फिर उठकर चल देता है। धीरे-धीरे वह चलना सीख जाता है। बार-बार वह गलत बोलता है, पर बोलते-बोलते सही बोलना सीख जाता है। सिर्फ बचपन में ही नहीं, बल्कि ताउम्र अभ्यास की यही प्रक्रिया व्यक्ति को संपूर्ण ज्ञानोपार्जन में मदद करती है।
कोई भी फील्ड हो, चाहे वह स्टडी हो, डांस हो, स्पोर्ट्स हो, म्यूजिक हो, लेखन हो, पेंटिंग हो, परफेक्शन के लिए प्रैक्टिस की जरूरत होती है। न तो एक बार की पढ़ाई से कोई एग्जाम पास कर सकता है और न ही किसी कला में माहिर हो सकता है। कई बार तो शुरू में जिस काम को करना बिल्कुल असंभव सा लगता है, प्रैक्टिस के बाद उस में मास्टरी हासिल हो जाती है। यदि व्यक्ति में कोई गुण जन्मजात हो तो भी प्रैक्टिस के बगैर उसमें निखार नहीं लाया जा सकता। 

प्रैक्टिस एक ऐसा मंत्र है, जो हमारे शारीरिक और मानसिक दोनों ही विकास के लिए फिट बैठता है। चाहे मानसिक स्तर पर हमें अपनी क्रिएटिविटी बढ़ानी हो अथवा शारीरिक फिटनेस प्राप्त करनी हो, रोजाना अभ्यास के बल पर ही हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। प्रैक्टिस से ही किसी काम में विशेषज्ञता हासिल होती है और फिर जीवन में निर्धारित मंजिल की ओर कदम तेजी से बढ़ने लगते हैं। 

आप चाहे जो भी काम करते हों, उसमें अपना एक लक्ष्य निर्धारित कर लें। फिर उस तक पहुंचने की सुव्यवस्थित योजना बना लें। इसके बाद उस योजना के तहत काम करना शुरू कर दें। एक बार नहीं, बल्कि बार-बार...यही प्रैक्टिस है। इससे आप अपनी गलतियों को जानेंगे और आपको उन 
गलतियों को सुधारने का मौका भी मिलेगा। मंजिल तभी मिलेगी!(डॉ. मनीषा गिल,अमर उजाला,17.8.11)

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16 अगस्त 2011

सुपर सफलता के पांच सूत्र

स्टेप 1 : 
‘आई’ का करो यूज तुम कि तनी देर तक कि सी चीज पर कॉन्सन्ट्रे शन क र पाते हो? हमने यह क्वेश्चन पिछले तीन सालों में क रीब 50,000 स्टू डें ट् स से कि या। इ नमें से 99 प्रतिशत ने ‘न’ में आंसर दिया। कै से बढ़ाओगे कॉन्सन्ट्रे शन पावर ? जब तुम अपनी पसंद की फि ल्म देखने जाते हो तो तीन घंटे उसी में आंखें गड़ाए बैठे रहते हो। उसी तरह क्रि के ट मैच में खाना-पीना छोड़क र एक टक उ से देखते रहते हो। तुम खुद को उ सी में लगा देते हो, लेकि न पढ़ाई क रते हु ए ध्यान बंटने में ज्यादा टाइ म नहीं लगता। अगर मीलों दूर म्यूजिक बज रहा हो तो जैसे पढ़ाई से ध्यान हटाने का बहाना मिल गया हो, तुम्हारा ध्यान तुरं त पढ़ाई से हट जाता है । पहले समझो कॉन्सन्ट्रे शन का मीनिंग इसे समझने के लिए हमें ‘रुचि’ को अच्छे ढं ग से समझना होगा। इ मेजिन क रो कि तुम्हें पिछले वीक पार्टी के फोटो दिए जाते हैं , जिसमें तुम भी थे। तुम उन फोटो में क्या देखोगे? जाहिर है , तुम उन फोटो में अपनी फोटो देखने की कोशिश क रोगे। ज्यादातर टाइ म तुम्हारी रु चि अपने आप को देखने में रहती है । इसका मतलब, जिस सब्जेक्ट में तुम ज्यादा रु चि लेते हो, उसमें कॉन्सन्ट्रे शन ज्यादा क र पाते हो। तुम उ स सब्जेक्ट को जल्दी सीख भी लेते हो। एग्जांपल एक मेमोरी टेस्ट में हमने क्लास 6 के स्टूडेंट्स को दो ग्रुप में डि वाइ ड कि या और उ न्हें प्राचीन मानव और उनके विकास के बारे में बताया। पहले ग्रुप को यह बताया गयाप्राचीन मानव गुफा में रहा क रता था। उन्होंने दो पत्थरों को आपस में रगड़क र आग की खोज की। वे पत्ते पहना क रते थे...। दूसरे ग्रुप से कहा, वे अपने आपको आदिमानव के रूप में सोचें और उन्हें बताया‘तुम गुफा में रहा क रते थे। तुमने पत्थरों को रगड़क र आग की खोज की। तुम शरीर में पत्तियां और जानवरों की खाल पहनते थे...!’ क्या पता चला दूसरे ग्रुप के स्टू डें ट् स ने जल्दी पाठ सीखा और एक साल बाद क रीब-क रीब ठीक उसी ढं ग से क हानी दोहराई भी। इम्पॉर्टें ट क्लू खुद को शामिल क रो। 

स्टेप 2 : 
रिपीट करो हमें यह मानना पड़ेगा कि ‘मजबूत मेमोरी उ तनी अच्छी नहीं, जितना एक वीक प्वाइं ट !’ जब तक हम रि पीट न क रें , कि सी चीज को पढ़ने और सीखने का कोई महत्व नहीं है । तुम हम सब जानते हो कि दोहराना कि तना जरू री है , लेकि न अच्छा रि जल्ट पाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से रि पीट क र ना इम्पॉर्टें ट है । वैज्ञानिक तरीके से रि पीट क र ना इसे हम एक उदाहरण से समझने की कोशिश क रते हैं । अगर हम कि सी टॉपिक को दो घंटे दिन में याद क रते हैं , तो इसे क ब रि पीट क र ना चाहिए? वैज्ञानिक तौर पर क हे ं तो पह ले 24 घंटे खत्म होने तक हो जाना चाहिए। इ सका एक कारण है । हमारा दिमाग नई सीखी हु ई चीज या सूचना 80 से 100 प्रतिशत तक के वल 24 घंटे के लिए ही धारण  कर पाता है । अगर इस दौरान दोबारा न पढ़ा जाए या रि पीट न कि या जाए तो उतनी ही तेजी से भूलने का चक्र भी शुरू हो जाता है । इसलिए पहला रिवीजन 24 घंटे खत्म होने तक जरूर हो जाना चाहिए। 24 घंटे में एक बार रि पीट क र ने के बाद हमारा दिमाग इस सूचना को लगभग सात दिन तक याद र खता है । सात दिन के बाद भूलने का चक्र दोबारा तेजी से शुरू हो जाता है । अगला रिवीजन सात दिन बाद होना चाहि ए अगर हम 24 घंटे में पहला और सात दिन बाद दूसरी बार रिवाइज करें , तो हमारा रि पीट क र ने का टाइ म के वल 10 प्रतिशत ही रह जाता है । यह दस प्रतिशत उस समय का है , जो टॉपिक को सीखने में लगा है । इम्पॉर्टेंट क्लू: 24 घंटे/ सात दिन 

स्टेप 3 : 
बेहतर ढंग से पढ़ाई सोचो कि एक ह फ्ते बाद तुम्हारा एग्जाम है । तुम्हें सारे सब्जेक्ट् स की तैय् क र नी है । अब तुम कौन सा तरीक अपनाओगे? तरीका 1एक दिन में एक टॉपिक पढ़ो और छठे दिन अंतिम रू प से सभी विषय रि पीट क रो। तरीका 2सभी विषयों को एक साथ पढ़ो, जैसे दो घंटे मैथ्स, फि र अगले दो घंटे इतिहास आदि। आओ अब देखें कि क्या हु आ? जब हम कोई सब्जेक्ट जैसे मैथ्स पढ़ते हैं तो दिमाग के एक खास भाग पर ज्यादा दबाव बनता है , जो कि ठीक नहीं है । इसलिए सभी सब्जेक्ट्स को बदल-बदल कर संयुक्त रूप से पढ़ें, जैसे दो से तीन घंटे गणित पढ़ने के बाद, भूगोल फि र अगले दो घंटे में अन्य विषय। 

स्टेप 4 : आराम करने का महत्व हर 40 से 50 मिनट की पढ़ाई के बाद रेस्ट करना जरूरी होता है । यह आराम क रीब 10 मिनट का होना चाहि ए। 10 मिनट के आराम का अर्थ है , इस दौरान पूर्ण आराम। नहीं तो अलग-अलग पढ़ा हुआ ज्ञान व सूचना, दिमाग को उलझाए रखेंगे और दिमाग में गड़ बड़ी होती रहेगी। 10 मिनट में तुम अपना मनपसंद संगीत सुन सक ते हो या हल्की आरामदायक एक्सर साइज भी कर सकते हो। इम्पॉर्टेंट क्लू : 45 मिनट/ 10 मिनट 

स्टेप 5 : खुद को प्रेरणा दो बाजार में दिमाग तेज क रने वाली क ई दवाइयां मौजूद हैं, क्या ये दवाइयां या टॉनिक वाक ई में काम कर ते हैं ? यह जानने के लिए हमने एक प्रयोग कि या। हमने तीस लोगों का एक ग्रुप बनाया, जो एक ही बैक ग्राउंड से थे। हमने उनसे कहा कि हमारे पास एक ऐसा स्मृति टॉनिक है, जो तीन महीने में याददाश्त में वृद्धि क रने में हेल्पफुल होगा। फि र हमने एक छोटा टेस्ट लिया और उस ग्रुप में से 15 लोगों को जाने-माने ब्रांड की बोतल में रंगीन पानी दिया। इस तर ह सभी लोगों को तीन महीने तक वही पानी, टॉनिक बोलक र पिलाया गया । इसके बाद हमने फिर टेस्ट लिया। 

रिजल्ट : सभी को टेस्ट में बराबर के अंक मिले थे। 

क्यों हु आ ऐसा: सभी ने यही विश्वास कि या कि वे दिमाग तेज क रने के लिए कुछ अलग कोशिश क र रहे हैं , जिससे उनकी मेमोरी पावर में सुधार होगा। यह उनका सेल्फ कॉन्फिडें स ही था, जिसने उन्हें टेस्ट में अच्छा क रने के लिए प्रोत्साहित कि या। हमें हे नरी फोर्ड की यह बात भी याद रखनी चाहिए कि जैसा तुम सोचते हो वैसा ही कर भी सकते हो। अगर अच्छा सोचते हो तो अच्छा ही पर फॉर्म क रते हो, नहीं तो उ सका उलट(बिस्वरूप राय चौधरी,हिंदुस्तान,दिल्ली,16.8.11) ।

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एप्टीट्यूड टेस्ट

समाज में किसी व्यक्ति की क्षमता का आकलन एप्टीट्यूट टेस्ट से ही हो पाता है। उसमें इंजीनियर बनने की क्षमता है या ड्राइवर या कलाकार, इसे पता लगाने का सटीक उपाय है एप्टीट्यूट टेस्ट। दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्र अमोल संगीतज्ञ बनना चाहता है लेकिन उसके माता-पिता उसे इंजीनियर के रूप में देखना चाहते हैं। पिता और अमोल के बीच करियर के चुनाव को लेकर काफी दिनों तक खींचतान चलती रही। घर में इस कलह को दूर करने के लिए उसे काउंसलरों ने एप्टीट्यूट टेस्ट कराने की सलाह दी। अमोल के एप्टीट्यूट टेस्ट के बाद ही यह पता लगाया गया कि वह सफल संगीतज्ञ बन सकता है। टेस्ट में उसमें क्रिएटिव इनोवेशन के लक्षण ज्यादा पाए गये । इस क्षेत्र में उसकी विशेष रुचि भी देखी गई। अमोल अकेला ऐसा छात्र नहीं। उसकी तरह कई और भी छात्र हैं जिसके जीवन को सही दिशा देने के लिए माता-पिता अब एप्टीट्यूट टेस्ट कराने लगे हैं। दिल्ली विविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रो. एनके चड्ढा कहते हैं, करियर का सही चुनाव और उसमें मौजूद क्षमता के आकलन के लिए एप्टीट्यूट के साथ उसकी रुचि भी देखी जाती है। ऐसा करने पर करियर के चुनाव में खासी मदद मिलती है। एप्टीट्यूट और इंटरेस्ट दोनों एक-दूसरे के साथ जुड़े हैं और साथ-साथ चलते हैं। अगर एक है और दूसरा नहीं तो करियर को सही दिशा नहीं मिलती। काउंसलर गीतांजलि कुमार करियर और जीवन को सही दिशा देने में एप्टीट्यूट और इंटरेस्ट के साथ व्यक्ति के व्यक्तित्व और शारीरिक क्षमता को भी एक कड़ी मानती हैं। वह कहती हैं, तीनों को मिलाकर ही किसी को करियर या जीवन में कोई राह चुनने की सलाह दी जाती है। अगर किसी में किसी कार्य के प्रति एप्टीट्यूट है पर रुचि या करने की इच्छा नहीं तो उस दिशा में भेजना बेकार है। इसी तरह पहली दोनों चीजे हैं लेकिन शारीरिक क्षमता या उचित एप्टीट शारीरिक क्षमता, व्यक्तित्व नहीं तो ऐसे करियर के चुनाव की सलाह देना बेकार है। वह कहती हैं, व्यक्तित्व भी पॉजिटिव मोटिव देता है। इसलिए तीनों को देखना जरूरी है।

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लॉजिकल रीजनिंग : 
एप्टीट्यूट टेस्ट के कई आयाम हैं जिनमें एक है लॉजिकल रीजनिंग। इसके तहत कार्य कारण संबंध पर जोर होता है। किसी व्यक्ति में मानसिक स्तर पर कलकुलेशन की क्षमता कितनी है, इसका आकलन लॉजिकल रीजनिंग करता है। अगर वह लॉजिकल रीजनिंग में ज्यादा स्कोर करता है तो इससे पता चलता है कि वह कायदे-कानून में रहकर कठिन से कठिन समस्याओं को हल कर सकता है। इस क्षमता से लैस युवा मैनेजर, वैज्ञानिक और व्हाइट कॉलर जॉब में जाने के उपयुक्त होते हैं।

ऑब्सट्रैक्ट रीजनिंग :

इसके तहत युवा बिखरी हुई चीजों को एकत्रित करके प्लान के साथ काम करने में विशेष हुनर रखता है। इसमें एप्टीट्यूट किस तरफ जा रहा है, उसकी दिशा क्या है। वह एक एरिया से दूसरे एरिया में लिंक कर रहा है या नहीं, आदि भी देखा जाता है। सिविल और इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग में बेहतर करने वाले युवाओं में ऑबस्ट्रक्ट रीजनिंग हल करने की क्षमता ज्यादा पाई गई है।

न्यूमेरिकल रीजनिंग :

यह किसी व्यक्ति की गणितीय क्षमता की जानकारी देता है। वह गुणा-भाग करने और सांख्यिकीय सवालों को हल करने की कितनी क्षमता रखता है, इसका आकलन किया जाता है। इसे देखकर ही उसे इस विषय या क्षेत्र से जुड़े करियर में जाने की सलाह दी जाती है। मसलन सीए, गणितज्ञ और लेखाकार आदि बनने के लिए न्यूमेरिकल रीजनिंग में बेहतर होनी चाहिए।

आई हैंड कोऑर्डिनेशन :

आमतौर से टेक्निकल काम मसलन ड्राइविंग हो या पायलट या फिर किसी मशीन को चलाने के लिए मशीनमैन, उनमें यह एप्टीट्यूट जरूर होनी चाहिए। इसमें व्यक्ति हाथ, पैर व आंख को काम करते वक्त कितना केन्द्रित कर पाता है, आदि देखा जाता है। ऐसा व्यक्ति दुर्घटनाओं को कम करने में काफी मददगार साबित होता है। ड्राइवर, पायलट, मशीनमैन और ऐसे मैकेनिकल जॉब के लिए यह एप्टीट्यूट बढ़िया माना जाता है।

क्रिएटिव इनोवेशन :


इसमें किसी व्यक्ति की रचनात्मक क्षमता का आकलन किया जाता है। उसमें कलात्मक रुझान व रुचि का पता लगाया जाता है। आमतौर पर व्हाइट कॉलर जॉब में इस तरह के लोगों की जरूरत पड़ती है । इसके तहत यह भी देखा जाता है कि वह निर्णय कितना शीघ्र और सही रूप में लेता है। उसमें फ्लेक्सिबिलिटी भी होनी चाहिए। कोई व्यक्ति स्वभाव में अड़ियल तो नहीं है। उसमें जिद्दीपना तो नहीं है। अगर उसमें फ्लेक्सिबिलिटी का स्तर बेहतर है तो उसे ऊपरी यानी उच्चतम पदों की जिम्मेदारी दी जाती है। इसमें उसके अंदर बड़प्पन कितना है, इसका आकलन भी किया जाता है। एप्टीट्यूट टेस्ट में ओरिजनैलिटी और मौलिकता को भी देखा जाता है । ऐसे चंद ही व्यक्ति होते हैं, जो अलग किस्म के आइडिया से लैस होते हैं। इस टेस्ट में ओरिजनल आइडिया को देखा व समझा जाता है। इसे बहुविध सोच के रूप में भी देखा जाता है। यह गुण जिसमें है, उसमें अध्यापक, लेखक, अभिनेता, संगीतज्ञ और अविष्कारक बनने की क्षमता होती है।


उचित मनोदशा में हो टेस्ट

गीताजंलि कुमार, काउंसलर

एप्टीट्यूट टेस्ट में एप्टीट्यूट, इंटरेस्ट और व्यक्तित्व या शारीरिक क्षमता, तीनों को देखा जाता है। तीनों को मिलाकर ही किसी को करियर या जीवन में कोई राह चुनने की सलाह दी जाती है। अगर किसी में किसी कार्य के प्रति एप्टीट्यूट है पर रुचि या करने की इच्छा नहीं है तो उस दिशा में भेजना बेकार है। इसी तरह पहली दोनों चीजे हैं लेकिन शारीरिक क्षमता या व्यक्तित्व नहीं है तो ऐसे करियर में किसी व्यक्ति को भेजना बेकार है। व्यक्तित्व भी पॉजिटिव मोटिव देता है, इसलिए तीनों को देखना जरूरी है। आज नौकरी के क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों का होना जरूरी है लेकिन ऐसे लोग कम ही उपलब्ध हैं। किसी कार्य या करियर के लिए कौन उपयुक्त है या नहीं इसकी पहचान के लिए प्रशिक्षित या दक्ष साइकोलॉजिस्ट का भी होना अनिवार्य है। एक और बात यह कि इस तरह के टेस्ट हर समय नहीं किए जाते। सही रिजल्ट जानने के लिए व्यक्ति की मानसिक स्थिति से भी रूबरू होना जरूरी है । जैसे कि वह तनावग्रस्त या थका हुआ नहीं हो। उसे जबर्दस्ती टेस्ट के लिए भी बाध्य नहीं करना चाहिए। सामान्य स्थिति या मनोदशा में ही इस तरह के टेस्ट होने चाहिए।


क्यों है जरूरी

एप्टीट्यूट टेस्ट ही किसी छात्र या व्यक्ति के करियर और काम की दिशा बताता है। उसकी क्षमता और रुचि को बताता है। इसके बाद उसे सही प्रोफेशन चुनने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर ऐसा नहीं होता तो अमुक व्यक्ति में आगे चलकर कुंठा का जन्म होता है। वह काम को एन्जाय नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में उसके अंदर नकारात्मक सोच हावी हो जाता है। वह विध्वंसात्मक दिमाग का हो जाता है। उसमें पहचान का संकट भी पैदा होने लगता है। एप्टीट्यूट, रुचि और व्यक्तित्व के हिसाब से काम नहीं मिलने पर वह अपने पेशे में उतना सक्षम साबित नहीं होता जितना दूसरे लोग। ऐसी स्थिति में वह दूसरों को नीचा दिखाने के लिए कई बार उल्टे-सीधे हथकंडे भी अपनाता है। सफलता नहीं मिलने पर वह कई बार अवसाद की स्थिति में आ जाता है और आत्महत्या को मजबूर हो जाता है। इसलिए संस्थानों को सरकार ने बच्चों का करियर की दिशा तैयार करने को कहा। शिक्षण संस्थाओं में करियर एंड काउंसलिंग सेंटर आए दिन इसी वजह से खोले जा रहे हैं। यह हर संस्थान और काम की जगह की जरूरत बनती जा रही है। भारत में इस तरह की समस्याओं के लिए निजी प्रैक्टिशनर की ओर से जगह-जगह नगरों व महानगरों में काउंसलिंग सेंटर खुल गए हैं लेकिन इसे चलाने वाले बंदे आमतौर पर क्वालिफाइड नहीं हैं। काउंसलिंग के लिए कौन-सा व्यक्ति उपयुक्त है या नहीं, इसके लिए नेशनल एजेंसी बनी है। वह क्वालिफिकेशन तय करती है।

(
अनुपम,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,16.8.11)।

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11 अगस्त 2011

भारतीय आर्थिकी सेवा की तैयारी

आईएएस की भांति इंडियन इकोनॉमिक सर्विस (आईईएस) और इंडियन स्टैटिस्टिकल सर्विस (आईएसएस) को भी देश की प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक माना जाता है। अखिल भारतीय स्तर की इस चयन परीक्षा का आयोजन भी संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है। सफल प्रत्याशियों की नियुक्तियां केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के अलावा टैरिफ कमीशन, प्लानिंग कमीशन, लेबर ब्यूरो, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी, योजना आयोग आदि में उच्च पदों पर की जाती है।

योग्यता
जिन विद्यार्थियों के पास इकोनॉमिक्स, अप्लायड इकोनॉमिक्स, बिजनेस इकोनॉमिक्स या इकोनॉमेट्रिक्स अथवा स्टैटिस्टिक्स, मैथमेटिकल स्टैटिस्टिक्स या अप्लायड स्टैटिस्टिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हो, वही इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। आवेदक की आयु 21 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

परीक्षा का स्वरूप

लिखित परीक्षा के अंकों का कुल मान 1000 होता है और इसमें अंग्रेजी और जनरल स्टडीज के अलावा इकोनॉमिक्स व स्टैटिस्टिक्स पर आधारित चार-चार प्रश्न-पत्र होते हैं। इकोनॉमिक्स व स्टैटिस्टिक्स के प्रश्न-पत्रों का स्तर मास्टर्स डिग्री का होता है। अंग्रेजी व जनरल स्टडीज के प्रश्न-पत्रों के लिए 100-100 अंक निर्धारित हैं, जबकि इकोनॉमिक्स व स्टैटिस्टिक्स का प्रत्येक पेपर 200 अंकों का होता है। प्रत्येक प्रश्न-पत्र की अवधि 3 घंटे की होती है और उत्तर सब्जेक्टिव टाइप ही लिखने की अनिवार्यता होती है। लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को साक्षात्कार (200 अंक) से भी रूबरू होना पड़ता है।

अंग्रेजी
इस प्रश्न-पत्र का स्तर प्रायः ग्रेजुएशन के स्तर का होता है। इसमें निबंध लेखन के अतिरिक्त अंग्रेजी शब्दों के इस्तेमाल करने की क्षमता की जांच और अनुच्छेद पर आधारित प्रश्न होते हैं। विविध विषयों पर तय शब्द सीमा में निबंध लिखने की प्रैक्टिस करना ठीक रहता है। इसी प्रकार वर्ड पॉवर बढ़ाने के लिए नित कुछ नए शब्दों का इस्तेमाल फायदेमंद कहा जा सकता है।

जनरल स्टडीज
इसमें सामयिक घटनाओं से जुड़े प्रश्न होते हैं। रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी घटनाओं से संबंधित तार्किक जानकारी भी इस खंड के लिए उपयोगी कही जा सकती है। इसके अलावा भारतीय राजनीति के विविध आयामों से परिचित होना भी प्रत्याशियों के लिए आवश्यक है। अन्य प्रश्न इतिहास, भूगोल तथा ऐसे ही सब्जेक्ट्स पर आधारित हो सकते हैं।

इकोनॉमिक्स
जनरल इकोनोमिक्स 1- इसके सिलेबस में थ्योरी ऑफ कंज्यूमर डिमांड, थ्योरी ऑफ प्रोडक्शन, थ्योरी ऑफ वैल्यू, थ्योरी ऑफ डिस्ट्रिब्यूशन, वेलफेयर कोनॉमिक्स, नेशनल इनकम एंड सोशल एकाउंटिंग, थ्योरी ऑफ एम्प्लॉयमेंट, मैथमेटिकल मेथड्स इन इकोनॉमिक्स आदि पर आधारित प्रश्न होते हैं। 

जनरल इकोनोमिक्स 2- इस पेपर में इकोनॉमिक ग्रोथ, डेवलपमेंट ऐंड मेजरमेंट, इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स, बैलेंस ऑफ पेमेंट्स, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन, मनी एंड बैंकिंग आदि टॉपिक्स से प्रश्न होते हैं।

जनरल इकोनॉमिक्स 3- इसमें एन्वॉयरनमेंट इकोनॉमिक्स, अर्बनाइजेशन एंड माइग्रेशन, प्रोजेक्ट अप्रेजल, फाइनेंशियल एंड कैपिटल मार्केट, फिस्कल पालिसी, स्टेट मार्केट ऐंड प्लानिंग आदि विषयों को शामिल किया जाता है।

इंडियन इकोनॉमिक्स- हिस्ट्री ऑफ डेवलपमेंट एंड प्लानिंग, डीसेंट्रलाइज्ड प्लानिंग, यूनियन स्टेट फाइनेंशियल रिलेशंस, एग्रीकल्चर ऐंड ह्यूमन डेवलपमेंट, इंडस्ट्रियल लेबर, फॉरन ट्रेड, मनी एंड बैंकिंग, बजट एंड फिस्कल पालिसी जैसे विषयों को इस पेपर में रखा जाता है। 

स्टैटिस्टिक्स
इंडियन स्टैटिस्टिक्ल सर्विस में जाने के इच्छुक प्रत्याशियों को अंग्रेजी और जनरल स्टडीज के अतिरिक्त इकोनॉमिक्स के विभिन्न पेपर्स के बदले स्टैटिस्टिक्स के निम्न पेपर्स में सम्मिलित होने की जरूरत होती हैं-
स्टैटिस्टिक्स 1- इसमें प्रोबैबिलिटी, स्टैटिस्टिकल मेथड्स व न्यूमेरिकल एनालिसिस से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं। 
स्टैटिस्टिक्स 2- इस पेपर में लीनियर मॉडल्स, एस्टीमेशन, हायपोथिसिस टेस्टिंग एंड स्टैटिस्टिकल क्वालिटी कंट्रोल, मल्टी वैरियेट एनालिसिस आदि के प्रश्न होते हैं। 
स्टैटिस्टिक्स 3- इस पेपर में सैम्पलिंग टेक्नीक्स, डिजाइन ऐंड एनालिसिस ऑफ एक्सपेरिमेंट्स, इकोनॉमिक स्टैटिस्टिक्स, इकोनॉमीट्रिक्स से संबंधित प्रश्न होते हैं। 
स्टैटिस्टिक्स 4- ऑपरेशनल रिसर्च, डेमोग्राफी ऐंड वाइटल स्टैटिस्टिक्स और कंप्यूटर एप्लीकेशन एंड डेटा प्रोसेसिंग से संबंधित प्रश्न इसमें पूछे जाते हैं(अशोक सिंह,अमरउजाला,10.8.11)।

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09 अगस्त 2011

राजस्थान लोक सेवा आयोग की जूनियर सिविल जज परीक्षा

यदि आप राजस्थान की सामाजिक विविधताओं को समझते हैं और विवाद को तार्कि क और सटीक मत के जरिए सुलझाने में रुचि रखते हैं तो आपके लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) मौका दे रही है सिविल जज (जूनियर) बनने का। एक सौ एक रिक्त पदों के लिए इच्छुक उम्मीदवार आरपीएससी की वेबसाइट पर 25 अगस्त, 2011 तक ऑनलाइन आवेदनकर सकते हैं।

अर्हताएं: उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विविद्यालय से अधिवक्ता अधिनियम 1961 के तहत मान्य एलएलबी की डिग्री होनी चाहिए। साथ ही उम्मीदवार को राजस्थानी भाषा, लीपि और परिवेश की समझ होनी चाहिए। आवेदन करने वाले की उम्र पहली जनवरी, 2012 को कम से कम 23 साल लेकिन 35 साल से अधिक न हो। आरक्षण और उम्र सीमा में छूट का लाभ सरकारी प्रावधानों के अनुसार दी जाएगी।

चयन प्रक्रिया: चयन प्रक्रिया तीन स्तरीय प्रतियोगिता के माध्यम से होगी- प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। साक्षात्कार में सफल होने पर उम्मीदवार को राजस्थान न्यायिक सेवा के तहत (न्यायिक) डय़ूटी दी जाएगी।

पहला चरण : प्रारंभिक परीक्षा इसमें बहुवैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएंगे। मुख्य परीक्षा के दो प्रश्न पत्र लॉ- प्रथम और लॉ-द्वितीय से संबंधित होंगे। प्रारंभिक परीक्षा में इन दोनों प्रश्नपत्रों से 70 फीसद प्रश्न होंगे। शेष 30 फीसद प्रश्न हिंदी और अंग्रेजी भाषा संबंधी प्रश्न होंगे। इसमें प्राप्त अंकों के आधार पर कैटेगरी वाइज मेधावी सूची बनाई जाएगी। रिक्त पदों की कुल संख्या का पन्द्रह गुणो उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चयन किया जाएगा। सफल उम्मीदवारों को दोबारा फार्म भरने होंगे, जो आरपीएससी से मुफ्त मिलेंगे।


दूसरा चरण : मुख्य परीक्षा मुख्य परीक्षा में चार प्रश्नपत्र होंगे। इसमें दो प्रश्नपत्र सौ-सौ अंकों के लॉ संबंधी हों गे। तीसरा प्रश्नपत्र हिंदी निबंध पचास अंकों का और चौथा प्रश्नपत्र अंग्रेजी निबंध का होगा। सभी के प्रश्न सब्जेक्टिव/ नरेटिव टाइप होंगे।

पहला प्रश्नपत्र लॉ प्रथम : इसमें भारतीय संविधान, सिविल प्रोसिजर कोड, लॉ ऑफ कांट्रेक्ट एंड पार्टनरशिप, लॉ ऑफ टोर्ट एंड एसेसमेंट, लॉ ऑफ मोटर एक्सीडेंट क्लेम, लॉ ऑफ अरबिट्रेशन, रेंट कंट्रोल लॉ, राजस्थान का रेवन्यू लॉ, लॉ ऑफ स्पेसिफिक लॉ, हिंदू लॉ, मुस्लिम लॉ, लॉ ऑफ ट्रांसफर प्रॉपर्टी, लॉ ऑफ लिमिटेशन, लॉ ऑफ लोक अदालत और स्थायी लोक अदालत, घरेलू हिंसा संबं धी नियम आदि संबंधी प्रश्न पूछे जाएंगे।

दूसरा प्रश्न पत्र सिविल लॉ सेकेंड : इसके तहत क्रिमिनल प्रोसिजर कोड, लॉ ऑफ एविडेंस कोड, आईपीसी, लॉ ऑफ नारकोटिक ड्रग, एससी/एसटी संबंधी प्रोटेक्शन क्रिमिनल लॉ, बाल अपराध नियम, चेक डिसऑनर संबंधी नियम, बिजली चोरी संबंधी नियम, साइबर क्राइम, सामान्य अपराध और जजों के आदेश संबंधी प्रश्न हों गे। दोनों प्रश्नपत्रों के सिलेबस की प्रैक्टिकल जानकारी उम्मीवारों को होनी चाहिए।

तीसरा प्रश्न हिंदी निबंध : इसके अंतर्गत हिंदी लेखन क्षमता और व्याकरण संबंधी प्रश्न होंगे।

चौथा प्रश्न पत्र अंग्रेजी (निबंध/लेख) : इस प्रश्नपत्र में अंग्रेजी लेखन, अनुवाद हिंदी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिंदी, ग्रामर को परखा जाएगा। मुख्य परीक्षा के सभी प्रश्नपत्रों की परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है। पहले और दूसरे प्रश्नपत्रों में न्यूनतम 35 फीसद अंक लाना अनिवार्य है। सभी प्रश्नपत्रों के पूर्णाक 300 का 40 फीसद यानी 120 अंक और उससे अधिक प्राप्तांक लाने वाले उम्मीदवारों की मेधावी सूची कैटेगरी वाइज बनाई जाएगी। एसटी/एससी उम्मीदवारों के लिए प्राप्तांक में पांच फीसद की छूट दी गई है। मेधावी सूची के आधार पर रिक्त पदों की कुल संख्या के तीन गुणो उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

तीसरा चरण : इंटरव्यू इंटरव्यू के बाद कैटेगरी वाइज मेधावी सूची बनाई जाएगी और रिक्त पदों की संख्या के अनुसार मेधावी उम्मीदवारों का चयन कर लिया जाएगा।
(दीपक राजा,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,9.8.11)

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