लंबे समय से फरार चल रहे झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. दिलीप प्रसाद शुक्रवार को दिन के 3.30 बजे अचानक सिविल कोर्ट पहुंचे और सरेंडर कर दिया। निगरानी की विशेष अदालत के जज विनयकांत खान ने उन्हें 14 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
आयोग में हुए नियुक्ति घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ. प्रसाद की तलाश में निगरानी ने कई स्थानों पर छापेमारी की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। उनके खिलाफ कुर्की-जब्ती का आदेश भी निकला था।
क्या हैं आरोप:
डॉ. प्रसाद ने आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पैसे और पैरवी के आधार पर अयोग्य परीक्षार्थियों का चयन करवाया। नतीजन मेधावी छात्र सफल नहीं हो सके। उन्होंने अपने भाई डॉ. प्रीतम कुमार को रांची विवि के डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर नियुक्त कराया। कई अन्य रिश्तेदारों को भी आयोग के माध्यम से नौकरी दिलाई।
किन परीक्षाओं में हुई धांधली:
डॉ. प्रसाद के कार्यकाल में जेपीएससी ने जितनी परीक्षाएं कराईं, सभी में गड़बड़ी का आरोप लगा। निगरानी ब्यूरो प्रथम और द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा, लेक्चरर नियुक्ति परीक्षा, बाजार पर्यवेक्षक परीक्षा, सहकारिता प्रसार पदाधिकारी परीक्षा, प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति परीक्षा, अभियंता नियुक्ति और डिप्टी रजिस्ट्रार नियुक्ति परीक्षा सहित कुल 18 परीक्षाओं में धांधली की जांच कर रहा है।
पूर्व सचिव पहले से ही जेल में:
जेपीएससी की पूर्व सचिव और परीक्षा नियंत्रक एलिस उषा रानी को इसी मामले में हजारीबाग से पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। फिलहाल वह रांची की बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में बंद हैं।
राज्यपाल ने दिया था जांच का आदेश:
झारखंड के तत्कालीन राज्यपाल सिब्ते रजी ने तीन अगस्त 2009 को जांच का आदेश दिया था। जांच के बाद 12 जून 2010 को निगरानी थाने में मामला (कांड संख्या 23/10) दर्ज किया गया। आरोपियों पर भादवि की धारा 420, 423, 424, 467, 468, 469, 474, 477 (ए), 120(बी), 109, 201 तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2) लगाई गई है।
19 हो चुके हैं बर्खास्त:
द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा में सफल 19 परीक्षार्थियों को बर्खास्त किया जा चुका है। इनमें राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, वित्त सेवा के अफसर शामिल हैं। जेपीएससी ने प्रारंभिक दौर में 39 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की थी। इसमें 19 की कॉपी में गड़बड़ी पाई गई थी।
32 पर मुकदमा
द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में 32 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें प्रमुख हैं पूर्व चेयरमैन डॉ. दिलीप प्रसाद, पूर्व सदस्य राधागोविंद नागेश, गोपाल प्रसाद सिंह, प्रो. शांति देवी, पूर्व सचिव एलिस उषा रानी, कोऑर्डिनेटर डॉ. रवींद्र कुमार, प्रो एसएस खामता, बटेश्वर पंडित, प्रो. परमानंद सिंह, प्रो. सोहन राम, नंदलाल (सभी जेपीएससी पदाधिकारी), प्रशांत कुमार लायक, रजनीश कुमार, संजय प्रसाद, मौसमी नागेश, मुकेश कुमार महतो (सभी लाभार्थी)।
धांधली की एक बानगी
द्वितीय सिविल सेवा के परीक्षार्थी प्रकाश कुमार ने परीक्षा में 160 अंक प्राप्त किए थे। जेपीएससी के अफसरों ने इसे 180 कर दिया। डॉ. प्रसाद के रिश्तेदार संजय प्रसाद भी परीक्षा में शामिल थे। डॉ.प्रसाद को यह घोषणा पत्र देना था कि परीक्षा में उनका कोई रिश्तेदार शामिल नहीं है। दिए गए घोषणा पत्र में डॉ.प्रसाद ने संबंधी का नाम व रोल नंबर नहीं लिखा। इंटरव्यू बोर्ड में भी बैठे। संजय प्रसाद को सफल घोषित कर दिया गया(दैनिक भास्कर,रांची,5.2.11)।
ऐसे लोगों को सज़ा मिलनी ही चाहिए।
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