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14 मार्च 2011

यूपीःबोर्ड परीक्षा 17 मार्च से

शासन द्वारा यूपी बोर्ड एग्जाम में बनाये गये 106 परीक्षा केंद्रों में से 13 वित्तविहीन स्कूलों को हटाने से माध्यमिक शिक्षा विभाग की मुश्किल बढ़ गयी है। बोर्ड परीक्षाओं में इस बार हाईस्कूल व इंटर के परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ने व सेंटर कम होने से अन्य सेंटरों की शामत आ गयी है। तमाम परीक्षा केंद्रों पर क्षमता से ज्यादा परीक्षार्थियों का सेंटर पड़ने व केंद्रों पर फर्नीचर की कमी सेंटर इंचार्ज के लिए सिरदर्द बनी हुई है। इसी के चलते तकरीबन एक दजर्न स्कूलों ने विभागीय अधिकारियों से फर्नीचर की व्यवस्था करने की गुहार लगायी है। अगर समय रहते फर्नीचर व बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती है तो छात्रों को बरामदों में टाट पट्टी पर बैठकर परीक्षा देनी पड़ सकती है।

बोर्ड परीक्षाओं में सिर्फ दो दिन शेष रहने से व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के विभागीय प्रयास तेज हो गये हैं। उल्लेखनीय है कि यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में इस बार 79153 छात्र बैठेंगे, जो कि गत वर्ष से 8 हजार ज्यादा हैं। पिछले साल छात्रों की संख्या कम होने के बावजूद जनपदीय शिक्षा समिति की ओर से 105 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे, वहीं वित्तविहीन स्कूलों को हटाने से इस वर्ष केंद्रों की संख्या घटकर 93 रह गयी है। परीक्षाओं से एक माह पहले शासन की ओर से वित्तविहीन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाये जाने से इंकार कर दिया गया। इससे अधिकांश परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की तादात बढ़ गयी है। सबसे ज्यादा परेशानी देहात में सेंटर बनाये गये स्कूलों को ङोलनी पड़ रही है। पहले से संसाधन की कमी ङोल रहे एक दजर्न से ज्यादा स्कूलों ने डीआईओएस को लिखित पत्र देकर फर्नीचर की व्यवस्था कराने को कहा है।

एक कमरे में 40 छात्रों के बैठने का है मानक
यूपी बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार परीक्षा केंद्रों पर एक कमरे में सिर्फ 40 छात्र बैठ सकते हैं। कमरा बड़ा होने पर छात्रों की संख्या अधिकतम 60 हो सकती है। लेकिन इस बार सेंटरों की संख्या घटने से छात्रों को बैठाने में स्कूलों को मुसीबत ङोलनी पड़ सकती है। कमरे में जगह कम पड़ने से इस बार छात्र बरामदे में परीक्षा दें तो हैरान होने की जरूरत नहीं है।

मंगलवार तक फर्नीचर की समस्या होगी दूर

डीआईओएस रविंद्र सिंह ने कहा कि वित्तविहीन स्कूलों के एग्जामिनेशन सेंटर हटाये जाने से थोड़ी अव्यवस्था हो गयी है। जिसे एक-दो दिन में दूर कर दिया जाएगा। जिन स्कूलों में फर्नीचर की कमी है, उन्हें नया फर्नीचर खरीदकर दिया जा रहा है। वहीं कई स्कूलों की स्कूल प्रबंधन कमेटी को फर्नीचर खरीदने के आदेश जारी किये गये हैं। फिर भी अगर किसी स्कूल में दिक्कत होगी तो उसके पास वाले स्कूल से फर्नीचर की व्यवस्था करायी जाएगी। कोई भी बच्चा जमीन पर बैठकर परीक्षा नहीं देगा।

छात्रों की अधिकता व फर्नीचर की कमी ङोलने वाले परीक्षा केंद्र- 
- नवजीवन इंटर कॉलेज, फरुखनगर
- जनता इंटर कॉलेज, सिरौली
- किसान इंटर कॉलेज, बम्हैटा
- आदर्श जनता इंटर कॉलेज, फरीदनगर
- जनहित इंटर कॉलेज
- डीएस इंटर कॉलेज
- नानक चंद जनता इंटर कॉलेज
- मनोहरी इंटर कॉलेज
- संजयगांधी इंटर कॉलेज
- जनता इंटर कॉलेज, छज्जूपुर(लाईवहिंदुस्तान डॉटकॉम,गाजियाबाद,14.3.11)।

उधर,शासन ने एक लाख 29 हजार फर्जी छात्रों को बोर्ड परीक्षा में सशर्त बैठने की इजाजत दे दी है। लेकिन यह छात्र रेगुलर के बजाए अब प्राइवेट परीक्षार्थी के रूप में बोर्ड परीक्षा देंगे।

इनके अभिलेखों की फिर से जाँच कराने के बाद परीक्षा के नतीजे घोषित किए जाएंगे। समाजवादी पार्टी के 17 मार्च के प्रस्तावित आंदोलन से घबराए अफसरों को यह फैसला मजबूरी में लेना पड़ा है। 17 मार्च से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। पहले दिन हाईस्कूल की विज्ञान व गणित की परीक्षा है। अफसरों को डर था कि परीक्षा से वंचित किए गए छात्र सपा कार्यकर्ताओं से मिलकर बवाल कर सकते हैं। इस बीच शासन ने फर्जी छात्रों के पंजीकरण के मामले में बदायूं के डीआईओएस को निलंबित कर दिया है। मेरठ समेत अन्य क्षेत्रीय कार्यालायों के अन्य अफसर कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने सोमवार को यहां इस मसले पर अफसरों के साथ बैठक की। फर्जी छात्रों को बोर्ड परीक्षा में बैठने की इजाजत के कानूनी पहलुओं पर चर्चा हुई। फर्जी छात्रों को बोर्ड परीक्षा से वंचित करने का फैसला उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद का था। बोर्ड के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैँ। कानूनी तौर पर यह छात्र बोर्ड परीक्षा के लिए अर्ह नहीं हैं। इनके दस्तावेज भी फर्जी हैं। सरकार के इस फैसले को कोई भी कानूनी चुनौती दे सकता है। बोर्ड ने इसके लिए सुरक्षित रास्ता निकाला है। शासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने तय किया है कि इन परीक्षार्थियों के आवेदन फार्म की फिर से जाँच की जाएगी। यदि इनके आवेदन फार्म फर्जी पाए गए तो रिजल्ट रोक दिया जाएगा।

पिछले दिनों परिषद ने पहली बार नकल माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई करते हुए वर्ष 2011 की परीक्षा से लगभग एक लाख 29 हजार फर्जी छात्रों को बोर्ड परीक्षा से बाहर कर दिया था। यूपी बोर्ड को प्रदेश के करीब 906 कॉलेजों के परीक्षार्थियों के आवेदन फार्म पर संदेह था। इनमें कई ऐसे थे जिनका ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में पंजीकरण तक नहीं था। अब पुराने फैसले को स्थगित करके सरकार ने फिर से जाँच कराने का निर्णय लिया है। वे परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। जाँच में दोषी पाए जाने पर इनका रिजल्ट जारी नहीं होगा। यदि सही पाए गए तो रिजल्ट जारी किया जाएगा।

गौरतलब है कि बीते नौ मार्च को इलाहाबाद सीमेट में हुई बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने यह कहा था कि इन परीक्षार्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही विद्यालय के प्रधानाचार्यो के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी। मामले में अब तक एटा, आगरा, अलीगढ़ और बदायूं के जिला विद्यालय निरीक्षक निलंबित भी हो चुके हैं।
यूपी बोर्ड निदेशक संजय मोहन ने बताया कि यह निर्णय छात्रहित को देखते हुए लिया गया है। छात्रों को बतौर प्रोविजनल परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई है। परीक्षा के बाद उनको अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करनी पड़ेगी। अनुमान है कि कई मामलों में छात्र दोषी न हों, अधिकारियों का अधिक दोष हो(लाईवहिंदुस्तान डॉटकॉम,इलाहाबाद-लखनऊ,14.3.11)।

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