असली-नकली के फेर में जिले के छह हजार बोर्ड परीक्षार्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। साढ़े पांच हजार छात्रों के फॉर्मो को पहले ही क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ ने निरस्त कर दिया है। अब छह हजार छात्रों के प्रवेश पत्र न आने से प्रबंधकों में खलबली मची है। गुरुवार को उ.प्र. शिक्षा संस्थान प्रबंधक परिषद के बैनर तले स्कूल संचालकों ने जिला विद्यालय निरीक्षक को छात्रों की संख्या और प्रमाण पत्र समेत साक्ष्य देते हुए अनुमोदन सौंपा।
बोर्ड परीक्षा में फर्जीवाड़ा कर सैकड़ों की संख्या में छात्र बैठाने वाले कॉलेजों पर क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ की तिरछी नजर है। बुधवार को शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों की बैठक ली। जिसमें फर्जी छात्र बैठाने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया गया है। इधर जिले के 53 विद्यालयों के 6,423 छात्रों के प्रवेश पत्र बोर्ड ने रोक लिये हैं। कहा जा रहा है कि इन छात्रों के प्रमाण पत्र क्षेत्रीय कार्यालय के पास नहीं हैं। जिसके विरोध में स्कूल संचालकों ने डीआइओएस से मुलाकात कर समस्या रखी। प्रबंधक परिषद के अध्यक्ष जितेंद्र लवानिया का कहना है कि स्कूल पहले ही सारे प्रमाण पत्र जमा कर चुके हैं। उनके पास छात्रों से संबंधित सभी प्रमाण पत्र हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज गिरि ने कॉलेजों को सभी छात्रों के प्रमाण पत्र समेत अनुमोदन क्षेत्रीय कार्यालय में भेजने को कहा है। प्रमाण पत्र पहुंचने के दो दिन के अंदर इन छात्रों के भविष्य का निर्णय ले लिया जाएगा।
प्रबंधकों ने कहा- बोर्ड ने भी की है गलती
ऐसा नहीं कि सभी विद्यालयों में फर्जीवाड़ा है। अशर्फी देवी छिद्दू सिंह विद्यालय नवांमील के प्रधानाचार्य चंद्रवीर सिंह ने बताया कि उनके विद्यालय में168 पंजीकृत हैं। इसके अलावा 10 बाहरी और 68 पिछले साल के फेलों को मिलाकर कुल 246 छात्र हैं। लेकिन बोर्ड ने मात्र 146 के प्रवेश पत्र ही भेजे हैं। ऐसे में शेष 100 छात्रों को बिना गलती के दंड दिया जा रहा है(दैनिक जागरण संवाददाता,आगरा,10.3.11)।
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