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19 मार्च 2011

बिहारःलेना ही होगा गरीब बच्चों का दाखिला

राज्य सरकार ने आज विधान परिषद में साफ कर दिया है कि निजी स्कूलों को किसी भी हालत में पच्चीस प्रतिशत सीट पर कमजोर वर्ग के बच्चों का नामांकन लेना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो सरकार उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेगी। कार्रवाई करने की जिम्मेवारी जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी को दी गयी है। भाकपा के केदारनाथ पांडेय के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्री पीके शाही ने कहा कि कुछ स्कूलों द्वारा सरकार के निर्देश के बाद भी मनमानी की शिकायतें सरकार को मिल रही हैं। वैसे स्कूल संचालकों की सूची बनाकर उन पर कार्रवाई की जायेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि व्यवस्था को पटरी पर लाने में समय लगता है। इसी वर्ष से इस व्यवस्था को लागू किया गया है। धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलाधिकारियों एवं जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सीबीएसई और आईसीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों के प्रथम वर्ग में प्रवेश हेतु 25 प्रतिशत सीट पर कमजोर वर्ग के बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जा चुका है तथा आमजन को भी समाचार पत्र के माध्यम से सूचित किया जा चुका है। यह व्यवस्था सत्र 2011-12 के एक अप्रैल 2011 से प्रारंभ होगी। एक अन्य सवाल के जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि बेगूसराय के तालिमी मरकज केन्द्रों पर मिड-डे मील उपलब्ध नहीं कराये जाने को लेकर सरकार ने जिला शिक्षा अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि तालिमी मरकज केन्द्रों पर कार्यरत शिक्षकों के मानदेय का भुगतान एक माह के अन्दर कर दिया जायेगा। तालिमी मरकज केन्द्रों पर मिड-डे मील उपलब्ध नहीं कराये जाने की शिकायत पर जांच के बाद यह पाया गया कि बच्चों को भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है जबकि इस बाबत सरकार द्वारा लगातार राशि निर्गत की जाती रही है। इस सवाल को राजद के तनवीर हसन ने उठाया था।
(राष्ट्रीय सहारा,पटना,19.3.11)

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