गुरु गोविंद सिंह इंदप्रस्थ (आईपी) यूनिवर्सिटी से जुड़े सेल्फ फाइनैंसिंग इंस्टिट्यूशन में 10 पर्सेंट सीटें मैनेजमेंट कोटे के जरिए भरी जाती हैं। इन सीटों पर एडमिशन के समय 12वीं के मार्क्स तो देखे ही जाते हैं लेकिन सीटों की रेट लिस्ट भी तय होती है। कोसेर्ज और इंस्टिट्यूट के हिसाब से रेट तय होता है, इसे डोनेशन भी कहा जा सकता है।
मैनेजमेंट कोटे की सीटों का हिसाब- किताब देखें तो बीटेक कोर्स की एक सीट की कीमत सबसे अधिक होती है। दिलचस्प बात यह है कि सीटों के रेट में मेट्रो फैक्टर की भूमिका भी काफी अहम साबित हो रही है। जो इंस्टिट्यूट मेट्रो स्टेशन के आसपास हैं, वहां पर स्टूडेंट्स एडमिशन लेना अधिक पसंद करते हैं।
सूत्रों के मुताबिक आईपी यूनिवर्सिटी के टॉप इंस्टिट्यूट में तो मैनेजमेंट कोटे की सारी सीटें भर जाती हैं लेकिन कुछ इंस्टिट्यूट ऐसे भी हैं, जहां पर बीबीए, बीसीए समेत कुछ कोसेर्ज में सारी सीटें नहीं भरतीं। सूत्र बताते हैं कि बीटेक कोर्स की सबसे अधिक डिमांड है और सभी इंस्टिट्यूट में बीटेक कोर्स की सीटें भर जाती हैं। बीटेक कोर्स की एक सीट 5 से 10 लाख रुपये में बिक रही है। कुछ टॉप इंस्टिट्यूट में 10 लाख रुपये तक डोनेशन देकर सीट खरीदी जा रही है वहीं कुछ इंस्टिट्यूट में 5 लाख रुपये का रेट भी चल रहा है।
दरअसल, मैनेजमेंट कोटे में वही स्टूडेंट एडमिशन ले सकते हैं, जिन्होंने आईपी यूनिवसिर्टी के एंट्रेंस टेस्ट को क्वालीफाई किया हो लेकिन यहां पर रैंक से ज्यादा 12वीं के मार्क्स व डोनेशन को देखा जाता है। मसलन किसी इंस्टिट्यूट ने अगर तय कर दिया कि उन्हीं स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया जाएगा, जिनके 12वीं में 80 पसेर्ंट मार्क्स होंगे। उसके बाद 80 पसेर्ंट मार्क्स से ज्यादा पर जितनी ऐप्लीकेशन होती हैं, उन पर फैसले के लिए डोनेशन फैक्टर काम करता है।
बीटेक कोर्स के बाद लॉ कोर्सेज की बारी आती है। एलएलबी कोर्स के लिए कुछ इंस्टिट्यूट हैं, जहां पर स्टूडेंट्स मैनेजमेंट कोटे में एडमिशन लेना पसंद करते हैं और इस कोर्स की एक सीट 5 से 7 लाख रुपये तक में बिकती है। बीएड कोर्स की भी काफी डिमांड रहती है और इस कोर्स में 1 से 2 लाख रुपये तक लिए जाते हैं। एमबीए की सीट का रेट 2 से 3 लाख रुपये का है। वहीं बीबीए कोर्स की बात करें तो इस कोर्स में पिछले कई सालों से सीटें खाली रह रही हैं और इस कारण इंस्टिट्यूशन में मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर भी असर पड़ रहा है।
सूत्र बताते हैं कि बीबीए कोर्स में उन इंस्टिट्यूशन में मैनेजमेंट कोटे की सीटों की डिमांड रहती हैं, जो मेट्रो के दायरे में आते हैं। ऐसे इंस्टिट्यूट में स्टूडेंट्स 1 से 2 लाख रुपये देकर भी बीबीए कोर्स में एडमिशन ले लेते हैं। जिन स्टूडेंट्स के काफी कम मार्क्स होते हैं, उनके पास बीबीए में एक ऑप्शन रहता है। वहीं बीसीए, बीजेएमसी, एमसीए जैसे कोसेर्ज के लिए स्टूडेंट्स लाखों रुपये खर्च करने में अधिक रुचि नहीं रखते।
मैनेजमेंट कोटे के नियम
- यूनिवर्सिटी के नियमों के मुताबिक इंस्टिट्यूट को मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर अप्लाई करने के लिए स्टूडेंट्स को कम से कम दो हफ्ते का समय दिया जाना जरूरी है। इस बार यूनिवसिर्टी अप्लाई करने के लिए कितने दिन तय करती है, इसके बारे में गाइड लाइंस में डिटेल दी जाएगी।
- इंस्टिट्यूशन को अपनी वेबसाइट, नोटिस बोर्ड पर भी सीटों का ब्यौरा और एडमिशन प्रोसेस डिस्प्ले करना होगा साथ ही दो न्यूजपेपर में भी ऐड देना होगा।
- मैनेजमेंट कोटे में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की लिस्ट भी यूनिवर्सिटी को भेजनी होगी। इस कोटे में भी वही स्टूडेंट अप्लाई कर सकता है, जो यूनिवसिर्टी द्वारा कंडक्ट किए गए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (कैट) में अपीयर हुआ है और क्वालीफाई हो।
- सेकंड काउंसलिंग शुरू होने के बाद मैनेजमेंट कोटे के एडमिशन का प्रोसेस शुरू होगा। आईपी यूनिवर्सिटी से करीब 103 सेल्फ फाइनैंसिंग इंस्टिट्यूशन जुड़े हैं(भूपेंद्र,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,26.7.11)।
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