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26 जुलाई 2011

उत्तराखंडःहटाए गए प्रवक्ताओं की बहाली के प्रयास तेज

भारी राजनीतिक दबाव के बीच उच्च शिक्षा निदेशालय ने यूजीसी गाइडलाइन को पूरा न करने वाले 43 संविदा प्रवक्ताओं को फिर से बहाल करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। नियमों में शिथिलता के बाद नौ संविदा प्रवक्ता पहले ही बहाल चुके हैं। इस तरह अयोग्य घोषित किए गए 43 संविदा प्रवक्ताओं पर सरकार शासन और उच्च शिक्षा निदेशालय मेहरबान हो गया है। चालू शिक्षा सत्र के लिए शासन ने यूजीसी के ताजा गाइडलाइन के विपरीत तैनात 54 संविदा प्रवक्ताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। ये प्रवक्ता स्नातक स्तर पर प्राप्तांक कम होने के साथ ही असंगत विषय पर नियुक्ति पा गए थे। इससे महाविद्यालयों में खलबली मच गई और आनन-फानन में यूजीसी गाइडलाइन के विपरीत तैनात शिक्षकों को चालू शिक्षा सत्र के लिए ‘आउट’ कर दिया गया। इस बीच मामला शासन स्तर पर जाने के बाद नौ प्रवक्ताओं के लिए नियमों में शिथिलता दी गई और इन्हें बहाल कर दिया गया। संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डा. मुकुल पंत के अनुसार उत्तराखंड की विषम परिस्थितियों के आधार पर 43 प्रवक्ताओं को फिर से सेवा में बहाल करने के लिए प्रस्ताव सरकार को प्रेषित कर दिया है। डा. पंत ने बताया कि 2008 में 24 एम. फिल के युवाओं को संविदा पर रखा गया था। इसमें दो को इस बार भी सेवा का मौका दिया गया है। इसमें रुचि कुलश्रेष्ठ और वीर राघव खंडूड़ी है। उन्होंने पीएचडी पूरी कर ली है। शेष 22 प्रवक्ताओं को सेवा पर फिलहाल नहीं बुलाया गया है। इसके अलावा सात प्रवक्ता असंगत विषय के हैं। इनको यूजीसी गाइडलाइन के तहत सेवा पर बुलाना मुश्किल है। डा. पंत ने बताया कि कुल बाहर किए गए 54 प्रवक्ताओं में 14 प्रवक्ता ज्वाइन करने के बाद संबंधित महाविद्यालय में नहीं हैं। ये अनुपस्थित चल रहे हैं। इसलिए इनके बार में अभी कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। यहां पर यह महत्वपूर्ण तथ्य है कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 2010 में एक साथ सैकड़ों प्रवक्ताओं की नियुक्ति की गई थी। इस बीच सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यूजीसी गाइड लाइन के विपरीत तैनात संविदा प्रवक्ताओं को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद निदेशालय पर हर रोज भारी राजनीतिक दबाव पड़ रहा है। इस कारण निदेशालय ने गेंद शासन के पाले पर डालने का निर्णय लेते हुए सभी बाहर किए गए प्रवक्ताओं के लिए नियमों में शिथिलता का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव को सरकार मान लेगी(राष्ट्रीय सहारा,हल्द्वानी,26.7.11)।

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