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30 अगस्त 2011

यूपीःनिजी मेडिकल कालेजों से प्रवेश का ब्योरा तलब

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निजी मेडिकल व डेंटल कालेजों से प्रवेश का लेखा जोखा मांगा है। इन कालेजो में प्रवेश प्रक्रिया की जांच के लिए गठित कमेटी को पंद्रह दिन में अपनी रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। निजी मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिए वसूली जा रही मनमानी फीस को लेकर लगातार आ रही शिकायतों के बाद शासन ने सख्त कदम उठाये हैं। इन शिकायतों में कहा गया है कि प्रवेश के लिए अलग से शुल्क लेने के साथ ही कालेज में छात्रावास आदि के नाम पर मनमाना शुल्क लिया जा रहा है। इन शिकायतों के मद्देनजर प्रमुख सचिव प्रदीप शुक्ल के निर्देश पर हर मंडल में एक कमेटी का गठन किया गया है। इसमें मुख्य रूप से राजधानी लखनऊ समेत, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, कानपुर, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद, बाराबंकी, आजमगढ़, मथुरा, गोरखपुर व सीतापुर शामिल है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी में कोषाधिकारी, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) व सम्बन्धित मंडल के राजकीय मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य को शामिल किया गया है। जिस मंडल में मेडिकल कालेज नहीं हैं वहां महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा द्वारा नामित सदस्य जांच कमेटी में शामिल होगा। प्रदेश में निजी मेडिकल कालेजों की संख्या 42 है, इसमें चौदह एमबीबीएस व 28 डेंटल कालेज शामिल हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2005 में ‘ पीए ईनामदार’ मामले की सुनवायी के बाद निजी मेडिकल कालेजों ने प्रदेश स्तर पर होने वाले कम्बाइण्ड प्री मेडिकल टेस्ट (सीपीएमटी) में अपनी सीटें शामिल करनी बंद कर दी थी। इसके बाद इसमे प्रवेश के लिए निजी मेडिकल व डेंटल कालेज अपने स्तर से अलग परीक्षा कराते हैं। जांच कमेटी को इन कालेजों में वर्ष 2011-12 के लिए हुए प्रवेश की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। कमेटी को अपनी रिपोर्ट में यह बताना होगा कि सभी प्रवेश परीक्षा में मेरिट के अनुसार ही लिए गये हैं। साथ इन कालेजों को अलग-अलग मदों में लिए जाने वाले शुल्क का भी विवरण देना होगा। जांच कमेटी को अपनी रिपोर्ट प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के एक महीने के अंदर चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजनी होगी(राष्ट्रीय सहारा,लखनऊ,30.8.11)।

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