इस शैक्षणिक वर्ष में इंजिनियरिंग में तकरीबन 20 हजार सीट रिक्त रहने की संभावनाओं के बीच मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों में भी हजारों सीटें नहीं भरी जा सकी हैं।
पीजीडीएम, एमबीए और होटल मैनेजमेंट जैसे विविध प्रबंधन पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो गई है। फिर भी मुंबई सहित राज्य के विभिन्न कॉलेजों में 16 हजार से अधिक सीटें रिक्त रह गई हैं। अधिकतर सीटें ग्रामीण इलाकों और नए कॉलेजों में रिक्त रह गई हैं।
इस वर्ष अब तक 24 हजार छात्रों को प्रवेश दिया गया है पर पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष रिक्त सीटों की संख्या अधिक है। कुछ सीटें संस्थानों के स्तर से भरी जाने का तर्क दिया जा रहा है। पिछले साल पांच हजार 840 सीटें रिक्त रह गई थी।
आनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के तहत मंगाए गए आवेदन की तीन फेरियों के बाद 18 हजार 840 सीटें रिक्त थी। इसके लिए 14 हजार 242 छात्र इच्छुक थे। प्रवेश की अंतिम फेरी समाप्त होने के बाद 16 हजार से अधिक सीट खाली रह गई हैं।
जरूरत से ज्यादा मैनेजमेंट कालेजों को मंजूरी दिए जाने के कारण यह स्थिति आई है। लाखों का डोनेशन मिलने की लालच में राजनेताओं व उनके करीबियों ने कई मैनेजमेंट व इंजीनियरिंग कालेज शुरू किए थे। अच्छे कालेजों की सीटें तो अकसर भर जाती हैं लेकिन बेहतर स्टाफ व सुविधाएं न होने के कारण कई कालेजों में छात्र प्रवेश लेने से कतराते हैं। यही वजह है कि इस साल मैनेजमेंट में खाली सीटों का आंकड़ा इस काफी ज्यादा है।
दूसरी पाली में रुचि
कई कॉलेज दो पालियों में चलाए जाते हैं। पहली पाली के बजाए छात्रों ने प्रवेश के लिए दूसरी पाली में रुचि दिखाई जिससे पहली पाली में रिक्त सीटों की संख्या अधिक है।
कई छात्र नौकरी करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं। उनके लिए दूसरी पाली में पढ़ाई करानेवाले कॉलेज सुविधाजनक होते हैं इसलिए दूसरी पाली में चलनेवाले कॉलेजों की मांग बढ़ती जा रही है(दैनिक भास्कर,मुंबई,1.9.11)।
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