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30 मार्च 2010

दिल्ली के उर्दू माध्यम विद्यालयों में शिक्षकों की कमी

दिल्ली के उर्दू स्कूलों में पीजीटी व टीजीटी शिक्षकों का टोटा है। यहां 98 उर्दू मीडियम स्कूलों में से 14 तो ऐसे हैं, जहां एक भी पीजीटी शिक्षक नहीं हैं। टीजीटी शिक्षकों के स्वीकृत 488 पदों में 139 पद खाली हैं। अन्य श्रेणी के शिक्षकों के 184 स्वीकृत पदों में से 40 रिक्त हैं।

इनमें कला, योग व प्राथमिक शिक्षक से लेकर सहायक शिक्षक तक शामिल हैं। इस बाबत शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह ‘लवली’ का कहना है कि राजधानी के उर्दू मीडियम स्कूलों में शिक्षकों की यह कमी सिर्फ आंशिक रूप से है, लेकिन शिक्षकों की कमी को दूर करने के सवाल पर उनका जवाब होता है कि अगले वित्त वर्ष में खाली पदों को भरे जाने की संभावना है।
(दैनिक भास्कर,दिल्ली,30.3.10)

टीचर्स वेलफेयर आर्गेनाइजेशन के महासचिव एम.वाई उस्मानी का कहना है कि सरकार के इसी ढुलमुल रवैए का नतीजा है कि राजधानी के उर्दू स्कूलों में छात्रों की पंजीकरण संख्या लगातार गिर रही है। शिक्षकों की कमी तो है ही, उर्दू की किताबें स्कूलों तक पहुंचने में 8-8 माह गुजर जाते हैं। ऐसे में छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति करे ताकि छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो। अब आप ही बताएं बिना शिक्षक, बिना किताब के कैसे पढ़ाई होगी।

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