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09 जून 2012

हिमाचलःअब कॉलेज में एक बार दाखिला लें और तीन साल पढ़ें

यदि आप कॉलेज छात्र हैं तो अब आपको हर क्लास में दाखिला लेने के लिए एडमिशन फॉर्म नहीं भरना पड़ेगा। प्रदेश विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त प्रदेश भर के कॉलेजों में द्वितीय और तृतीय वर्ष में एडमिशन लेने वाले छात्रों को अब बिना फॉर्म भरे ही इन कक्षाओं में दाखिला मिलेगा। यूनिवर्सिटी ने शिक्षा विभाग की ओर से मिले दिशा निर्देशों के बाद सभी कॉलेजों को इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। आरकेएमवी समेत कुछेक कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से इस प्रक्रिया के तहत दाखिला देकर छात्रों को सुविधा देने जा रहे हैं। 

इसके तहत बीए, बीएससी और बीकॉम के द्वितीय और तृतीय वर्ष में एडमिशन लेने वाले करीब एक लाख 20 हजार अधिक छात्रों को 40 रुपए का प्रोस्पेक्टस नहीं खरीदना पड़ेगा। साथ ही हर साल इस फॉर्म के साथ भरी जाने वाली दूसरी औपचारिकताएं भी नहीं करनी पड़ेंगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार सिर्फ प्रथम वर्ष में दाखिला लेने वाले छात्रों को ही आवेदन फॉर्म खरीदकर भरना होगा। अब तक छात्रों को हर साल अगली कक्षा में दाखिला लेने के लिए फॉर्म भरना पड़ता था। 

इस अधिसूचना के अनुसार द्वितीय और तृतीय वर्ष में एडमिशन लेने वाले छात्रों को रोल ऑन बेसिस पर दाखिला दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी के अनुसार ये छात्र अपना रोलनंबर बताकर सीधे फीस जमा कराएंगे। इसके बाद फीस स्लिप के आधार पर ये अपना आईकार्ड और लाइब्रेरी कार्ड ले सकते हैं। 

पहले परेशान होते थे 
इससे पहले कॉलेज छात्रों को हर कक्षा में एडमिशन के लिए फॉर्म भरना पड़ता था। छात्रों को न सिर्फ फॉर्म खरीदकर भरना पड़ता था बल्कि इसके साथ अपनी फोटो और दूसरे फॉर्म भी हर साल जमा करवाने पड़ते थे। वहीं, कॉलेजों को भी इस प्रक्रिया के लिए अलग अलग विषय की कमेटियां बनानी पड़ती थी(दैनिक भास्कर,शिमला,9.6.12)।

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05 जून 2012

आईआईटी ने शुरू किए पांच नए कोर्स

इंडस्ट्री की लगातार बढ़ रही डिमांड को देखते हुए स्टूडेंट्स को जॉब्स के नए अवसर दिलाने के उद्देश्य से लिया गया फैसला, लिमिटेड सीट्स के साथ शुरू होंगे कोर्सेस। 

आईआईटी नए शिक्षा सत्र से पांच नए कोर्स शुरू करने जा रहा है। भारतीय बाजार में तेजी से हो रहे बदलाव और नए क्षेत्रों के विकास के चलते यह योजना तैयार की गई। ये सभी नए कोर्स इन्हीं बदलाव के आधार पर बनाए गए हैं। जल्द ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही आईआईटी की सीटें भी बढ़ जाएंगी।

सीटों की संख्या में इजाफा 
पिछले साल की तुलना में इस साल तकरीबन 187 से ज्यादा सीटों में छात्रों को प्रवेश मिलेगा। पिछले साल देश की 16 आईआईटी, आईटी बीएचयू और आईएसएम धनबाद को मिलाकर कुल 9618 सीटें थी। लेकिन नए कोर्स शुरू होने से अब इन सीटों की संख्या में 187 की बढ़ोत्तरी के साथ 9805 हो गई है। इन सीटों में हुई बढ़ोत्तरी का सीधा फायदा उन छात्रों को होगा, जो कुछ अंकों के कारण आईआईटी में जाने से चूक जाते थे। जानकारी के मुताबिक सीटों में सबसे अधिक इजाफा सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में हुआ है। 

ये होंगे नए कोर्स 
पॉलीमर साइंस एंड टेक्नोलॉजी 
सीट्स : 40, आईआईटी रुड़की इंडस्ट्री : पेंट, इलेक्ट्रिकल व टेक्सटाइल 

सिविल इंजीनियरिंग एमटेक 
सीट्स : 20, आईआईटी रुड़की इंडस्ट्री : भवन सुरक्षा व एरिया मैनेजमेंट 

इंजीनियरिंग साइंस सीट्स : 62, आईआईटी हैदराबाद इंडस्ट्री : मैकेनिकल व इलेक्ट्रिकल 

मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग सीट्स : 30, आईएसएम धनबाद इंडस्ट्री : फाइनेंस सेक्टर, 

बायोलॉजिकल साइंस सीट्स : 35 आईआईटी मद्रास, इंडस्ट्री : मेडिकल व केमिकल इंडस्ट्रीज(दैनिक भास्कर,भोपाल,5.6.12)

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12 दिसंबर 2011

विज्ञान व गणित की बारीकियां सीखने जापान जाएंगे टीचर

सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में विज्ञान व गणित पढ़ाने वाले 17 शिक्षकों को जापान जाकर गणित और विज्ञान की बारीकियां सीखने का मौका मिलेगा। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) के सहयोग से शिक्षकों को भेजेगी। यह यात्रा 18 दिनों की होगी। बोर्ड के चेयरमैन विनीत जोशी ने बताया कि यात्रा के दौरान शिक्षक जापान में गणित और विज्ञान के पठन-पाठन का तरीका तो सीखेंगे ही, साथ ही वहां की संस्कृति से भी रू- ब-रू होंगे।बोर्ड ने सभी स्कूलों के प्राचायरे को पत्र भेजकर अपने शिक्षकों के नाम भेजने का कहा है। शिक्षक का टीजीटी होना अनिवार्य है। उनकी आयु भी 20 से 35 वर्ष के बीच होनी जरूरी है। जापान जाने के लिए शिक्षकों का अंग्रेजी में लिखना और बोलना भी अनिवार्य किया गया है। उनका मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना भी अनिवार्य है। आवेदन बोर्ड की शिक्षा अधिकारी(कॉमर्स) को करना होगा। आवेदन करने की अंतिम तिथि 16 दिसम्बर रखी गई है। पीतमपुरा स्थित एमएम पब्लिक स्कूल की प्राचार्य रूमा पाठक ने कहा कि बोर्ड ने शिक्षकों को यह मौका दिया है(राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,12.12.11)।

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बिहारःडेढ़ लाख साक्षरता केंद्र खुले

साक्षरता अभियान के पहले दिन राज्य के 35 जिलों में करीब एक लाख सत्तर हजार केन्द्र खोले गये। इसके लिए मुख्यालय स्तर से भी कई जिलों में अधिकारी भेजे गये थे। शिक्षा विभाग का अनुमान है कि पन्द्रह दिनों में राज्य के सभी केन्द्र चालू हो जायेंगे। कुल 42 लाख 43 हजार महिला और पुरुषों को साक्षर किया जाना है। इसमें राज्य के निरक्षर महिला और पुरुषों को साक्षर किया जाना है। पन्द्रह दिनों तक इन केन्द्रों पर पढ़ने- पढ़ाने का वातावरण तैयार करने के लिए यह फैसला लिया है। इसके तहत केन्द्र का उद्घाटन, पंचायत के मुखिया से परिचय, पंचायत कार्यालय, स्थानीय बैंक और पोस्ट ऑफिस ले जाकर वहां के कामकाज के बारे में बताने का कार्यक्रम चलेगा। इसी तरह अन्य दिनों के कार्यक्रम में विकास चर्चा और अपने स्कूल को जाने कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। अपने जिले को जानें तथा अंतिम दिन अक्षर मेले का आयोजन भी होगा। छह मार्च को परीक्षा ली जायेगी। साक्षर भारत मिशन- 2012 राज्य के निरक्षरों को साक्षर एवं जागरूक बनाने का एक समयबद्ध कार्यक्रम है। निरक्षरों की पहचान का काम हाल में ही टोला स्तर पर किया गया है। राज्य सरकार द्वारा राज्य के तीन जिलों खगड़िया,भोजपुर और बेगूसराय में पहले से यह कार्यक्रम चल रहा है(राष्ट्रीय सहारा,पटना,12.12.11)।

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02 दिसंबर 2011

पाटलिपुत्रा स्कूल आफ फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट में 18 नए कोर्स

पाटलिपुत्रा स्कूल आफ फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट को बिहार में सेफ्टी मैनेजमेंट कोर्स के डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा व स्नातक स्तर की डिग्रियों की पढ़ाई के लिए इलम विवि ने अपना स्टडी सेंटर बनाया है। इसके साथ ही 18 नये कोर्स को भी मंजूरी दे दी गई। एक समारोह में पाटलिपुत्रा स्कूल आफ फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट के निदेशक ललन कुमार प्रसाद ने इलम विवि द्वारा प्रदत्त स्वीकृति पत्र व निर्देशिका जारी की। उन्होंने बताया कि स्टडी सेंटर में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करायी जाएगी। बच्चों के लिए रोजगार को भी निश्चित किया जाएगा। बताया कि फायर सेफ्टी, मैनेजमेंट, इंडस्ट्रीयल सेफ्टी मैनेजमेंट, आक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ मैनेजमेंट, इनवायरमेंटल हेल्थ एंड सेफ्टी मैनेजमेंट, हेल्थ एंड सिनेट्री इंस्पेक्टर, हाऊस कीपिंग और फायर सेफ्टी एंड इंडस्ट्रीयल सेफ्टी मैनेजमेंट के लिए एक साल के डिप्लोमा व पीजी डिप्लोमा और तीन साल के स्नातक डिग्री कोर्स को मंजूरी दी गई है(दैनिक जागरण,पटना,2.12.11)।

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मुंबई यूनिवर्सिटी शुरू कर सकती है नाटक लेखन कोर्स

नाटक एक कला है और इस कला में जिंदगी समाहित होती है जो सदियों से चली आ रही है और चलती रहेगी। इसके लिए आवश्यक है नाटक की कहानी की विषय वस्तु , जिसके इर्द - गिर्द पात्रों का चरित्र चित्रण होता है। आज के दौर में नाटक लेखन को प्रफेशनल सब्जेक्ट के तौर पर स्टडी करने की जरूरत है और इसी को ध्यान में रखकर मुंबई यूनिवर्सिटी ने नाटक लेखन कोर्स शुरू करने की योजना बनाई है। सोमवार को राष्ट्रीय नाट्यलेखन वर्कशॉप का उद्घाटन करते हुए कॉलेज ऐंड यूनिवर्सिटी डिवेलपमेंट के डाइरेक्टर डॉ . राजपाल हांडे ने व्यक्त की।

बता दें कि नाटक को प्रफेशनल तौर पर बढ़ावा देने के लिए मुंबई यूनिवर्सिटी के अकेडमी ऑफ थिएटर आर्ट्स की ओर से 28 नवंबर से 2 दिसंबर तक नैशनल लेवल पर नाट्य लेखन वर्कशॉप का आयोजन किया गया है। इस वर्क शॉप में महाराष्ट्र , गोवा और गुजरात के स्टूडेंट्स ने पार्टिशिपेट किया। इस मौके पर नैशनल स्कूूल ऑफ ड्रामा , नई दिल्ली की संचालिका डॉ . अनुराधा कपूर ने कहा कि नाटक लेखन एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र हैं। वहीं , थियेटर ऑफ आर्ट्स , मुंबई यूनिवर्सिटी के संचालक डॉ . वामन केंद्रे ने नाटक की उपयोगिता को आज के दौर में आवश्यक बताया है(नवभारत टाइम्स,मुंबई,1.12.11)।

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19 नवंबर 2011

आईआईएम में पढ़ाया जाएगा ऐग्रिकल्चर मैनेजमेंट

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) से पढ़ाई करने वाले छात्रों की सेवाएं अब तक कॉर्पोरेट सेक्टर में ही ली जाती थी लेकिन, अब ऐग्रिकल्चर, एजुकेशन, हेल्थ और पॉवर जैसे बुनियादी सेक्टर में भी इनकी सेवाएं ली जाएगी। इसके मद्देनजर आईआईएम काउंसिल ने केंद्रीय मानव संसाधन विभाग के साथ मिलकर यह फैसला किया कि सर्विस देने वाले सेक्टरों की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए। इसके अलावा आईआईएम इंस्टिट्यूट में ऐडमिशन लेने की प्रॉसेस को और अधिक आसान बनाया जाए। ऐडमिशन होने के बाद जब सीट भर जाती है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए और सभी आईआईएम इंस्टिट्यूट का ऑडिट भी किया जाना चाहिए। इससे मैनेजमेंट की पढ़ाई करवाने वाले नए पुराने आईआईएम संस्थानों के साथ-साथ प्राइवेट इंस्टिट्यूट को भी फायदा होगा।

हर तीन साल में होगा ऑडिट


आईआईएम इंस्टिट्यूट को और अधिक गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए हर तीन साल में एक बार ऑडिट किया जाएगा। इस ऑडिट में आईआईएम के मैनेजमेंट से ुजुड़े लोग शामिल नहीं होंगे। ऑडिट संस्थान से बाहर से कराई जाएगी और इसकी समीक्षा भी की जाएगी। इससे न सिर्फ कई विषयों की मूलभूत कमियों का पता लगाकर उसमें सुधार की जाएगी बल्कि, यहां पढ़ाई को उच्च स्तर तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा सभी आईआईएम संस्थानों
की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने, विश्वस्तरीय बनाने और विश्वस्तरीय फैकल्टी तथा छात्रों को जोड़ने के लिए संस्थान पूरे विश्व में प्रचारित करेगी। इससे दुनिया को पता चलेगा कि भारतीय संस्थानों के पास भी टैलंट हैं और हम भी दुनिया को कुछ दे सकते हैं। 

95 करोड़ की केंद्र ने दी मंजूरी 

ऐग्रिकल्चर, एजुकेशन, हेल्थ और इलेक्ट्रिक सेक्टर में मैनेजमेंट की पढ़ाई उपलब्ध करवाने के लिए आईआईएम के सभी इंस्टिट्यूट की वर्तमान इन्फ्रास्ट्रक्चर की जानकारी केंद्र ने मांगी है। इसके तहत विदेशी छात्र और शिक्षक इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) की ओर आकर्षित हो सके, इसके लिए 95 करोड़ की धनराशि को मंजूरी दी है। इससे शोध कर रहे छात्रों और पीएचडी स्टूडेंट्स के अलावा आईआईएम की मूलभूत सुविधाओं को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। बता दें कि इस समय देश में 13 आईआईएम और 120 से अधिक बिजनेस स्कूल हैं। 

आईआईएम की ओर सरकार द्वारा ध्यान देने से मैन्यूफैक्चरिंग , गरीबी उन्मूलन , एजुकेशन , हेल्थ और पॉवर क्षेत्र डिवेलप होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी क्योंकि , इनसे सीधे तौर पर आम जनता जुड़ी है। 

डॉ . उदय सालुंखे , ग्रुप डाइरेक्टर , वेलिंकर इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट(नवभारत टाइम्स,मुंबई,19.11.11) 

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03 नवंबर 2011

आईआईएम अब नए क्षेत्रों में कराएंगे प्रबंधन की पढ़ाई

सिर्फ बिजनेस और कॉर्पोरेट घरानों के लिए सेवाएं मुहैया कराने के बजाय देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थान आईआईएम अब कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली आदि क्षेत्रों के प्रबंधन की शिक्षा भी देंगे। ऐसा इन क्षेत्रों से बढ़ रही मांग के मद्देनजर किया जाएगा। इसके साथ ही अब आईआईएम की सोशल ऑडिटिंग भी होगी, ताकि उसकी गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।

इस बात का फैसला बुधवार को आईआईएम के काउंसिल की बैठक में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के साथ लिया गया। इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जिसमें संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया को आसान करने, सीटों के भरने के बाद काउंसिलिंग का शेष विस्तृत लेखा जोखा सार्वजनिक करने और उसके आधार पर दूसरे प्रबंधन संस्थानों में दाखिला देने की छूट देने पर भी सहमति हुई। इसके बारे में सिब्बल ने बताया कि अब विश्व के शीर्ष प्रबंधन अध्यापकों को भी अपने नेटवर्क में छोड़ने की तैयारी हो गई है और इससे तमाम नए-पुराने आईआईएम तथा निजी संस्थानों को भी फायदा मिलेगा। इसे तैयार करने में टेलीकॉम मंत्रालय भी पूरी तैयारी करेगा। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि सभी भारतीय प्रबंधन संस्थानों की हर तीन साल में प्रबंधतंत्र से बाहर से समीक्षा कराई जाएगी। यह सोशल ऑडिट होगा। इसका पूरा जोर स्तरीय शोध, पढ़ाई के उच्च स्तर पर होगा और यह सारे संस्थानों में पारदर्शी कार्यप्रणाली की गारंटी करेगा। इन संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने और यहां विश्वस्तरीय फैक्लटी तथा छात्रों को जोड़ने के लिए जल्द ही आईआईएम दुनिया में रोड शो करेंगे, ताकि दुनिया को बताया जा सके कि उनके पास क्या कुछ देने को है। सिब्बल ने कहा कि आज मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में, गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में प्रबंधन गुरु की सख्त जरूरत है और इस दिशा में आईआईएम दक्षता प्रदान करेंगे। इस पर रणनीति तय करने के लिए सिब्बल ने एक विशेषज्ञ समूह भी गठित करने की बात कही, जो यह रोपमैप बनाएगा कि देश की अर्थव्यवस्था में किन क्षेत्रों में प्रबंधन के गुरु चाहिए। उसके मुताबिक आगे का ब्लू प्रिंट तैयार होगा। सिब्बल ने कहा कि आज विदेशी छात्रों और अध्यापकों को आकर्षित करने के लिए आईआईएम के पास विश्वस्तरीय सुविधाएं नहीं हैं। इसके लिए आईआईएम को खर्चे का ब्यौरा तैयार करने को कहा गया है। इसके बाद १२वीं पंचवर्षीय योजना में इसके लिए धन आवंटित करने का प्रयास किया जाएगा। आईआईएम में शोध को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने अतिरिक्त पीएचडी करने के लिए ९५ करोड़ रुपए की मंजूरी दी है(नई दुनिया,दिल्ली,3.11.11)।

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02 नवंबर 2011

दिल्लीःअंबेडकर विविद्यालय में भी एमबीए शुरू

दिल्ली विविद्यालय की तर्ज पर अब अंबेडकर विविद्यालय के मास्टर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) कोर्स में दाखिला आईआईएम के कैट स्कोर के आधार पर मिलेगा। विविद्यालय द्वारा चयन के लिए कैट स्कोर के अलावा ग्रुप डिस्कशन और साक्षात्कार भी लिया जाएगा। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने मंगलवार को इंडिया हैबीटेट सेंटर में आयोजित समारोह में विविद्यालय द्वारा शुरू किए गए दो वर्षीय एमबीए कोर्स को शुभारंभ किया। दिल्ली सरकार के अंतर्गत यह विविद्यालय सामाजिक विज्ञान और मानविकी विषयों के लिए स्थापित किया गया है। नया पाठ्यक्रम विविद्यालय के व्यापार, सार्वजनिक नीति और सामाजिक उद्यम, स्कूल के तहत शुरू किया गया है। समारोह में विविद्यालय कुलपति डॉ, श्याम मेनन और निदेशक प्रो. के प्रोफेसर मामकुटुम भी मौजूद थे। इस अवसर पर प्रो मामकुट्टम ने बताया कि अभी विविद्यालय एमबीए कोर्स शुरू कर रहा है। बाद में मास्टर इन पब्लिक पॉलिसी और मास्टर इन सोशल इंटरप्रेनरशिप कोर्स भी शुरू करेगा। उन्होंने बताया एमबीए कोर्स में आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवम्बर है। कोर्स में कुल 42 सीटें हैं, इनमें आरक्षित सीटें भी शामिल हैं। प्रो. मामकुट्टम ने बताया कि दो साल के इस कोर्स की कुल फीस 2.78 लाख रुपये रखी गई है। कोर्स में आवेदन केवल ऑनलाइन ही किया जा सकता है। इसकी व्यवस्था विविद्यालय की वेबसाइट पर है। कोर्स में दाखिला की प्रक्रिया कैट स्कोर आने के बाद शुरू होगी। कैट स्कोर के बाद विविद्यालय द्वारा ग्रुप डिस्कशन और साक्षात्कार के बाद ही विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाएगा। कोर्स की क्लासेज 1 जुलाई 2012 से शुरू होंगी। समारोह में श्रीमती दीक्षित ने नए पाठ्यक्रम की प्रवेशिका और डॉ. अंबेडकर स्मारक भाषण की पुस्तिका का भी विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह विविद्यालय तीन वर्ष से कार्यरत है और इसमें 10 पाठय़क्रम और उनके स्कूल खोले जा चुके हैं(राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,2.11.11)।

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01 नवंबर 2011

महाराष्ट्रःसभी स्कूलों में 'विपश्यना' की शिक्षा अनिवार्य हुई

महाराष्ट्र के सभी प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में विपश्यना साधना की क्लास चलाने का आदेश सरकार ने दिया है। सभी स्कूलों को आदेश दिया गया है कि वे पढ़ाई शुरू करने से पहले 10 मिनट विपश्यना के लिए अलग से रखें। इसके लिए टाइम टेबल बदलने का आदेश शिक्षा विभाग ने दिया है।

इस मुद्दे पर सरकारी परिपत्र इस महीने की शुरुआत में जारी कर दिया गया था। शनिवार को सरकारी विज्ञप्ति में इसकी अधिकारिक जानकारी सरकार की ओर से दी गई।

नाशिक जिले के इगतपुरी इलाके में काम करने वाले विपश्यना रिसर्च इंस्टिट्यूट को राज्य के स्कूली बच्चों की स्मरणशक्ति, एकाग्रता, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। हर स्कूल के एक शिक्षक को इगतपुरी स्थित संस्था के सेंटर में रहकर वहां आयोजित होने वाले 10 दिन के कोर्स में हिस्सा लेने का निर्देश सरकार की ओर दिया गया है। इसके बदले में उस शिक्षक को 14 दिन की विशेष छुट्टी दी जाएगी। संबंधित शिक्षक विपश्यना इंस्टिट्यूट का सर्टिफिकेट स्कूल को पेश करेगा और आगे दूसरे शिक्षकों को इगतपुरी जाकर कोर्स करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। 


हर स्कूल को अपने यहां लगने वाली विपश्यना क्लास के लिए दरियां, लाउडस्पीकर और हॉल की व्यवस्था करनी होगी। एक या दो क्लासों के 50 से 10 विद्यार्थियों को इक्ट्ठा करके उनके लिए 5-6 घंटो की विपश्यना क्लास चलाई जाएगी(नवभारत टाइम्स,मुंबई,30.10.11)। 

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21 अक्टूबर 2011

जम्मू-कश्मीरःतीन यूनिवर्सिटीज में आपसी सहयोग के लिए एमओयू

शैक्षणिक उत्कृष्टता और शोध, प्रशिक्षण, फैकल्टी एवं स्टूडेंट एक्सचेंज आदि क्षेत्रों में आपसी सहयोग के लिए कश्मीर, इस्लामिक और दिल्ली विश्वविद्यालयों के बीच वीरवार को सहमति ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित हुआ।

शेरे कश्मीर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी में दिल्ली यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. दिनेश सिंह, कश्मीर यूनिवर्सिटी वीसी प्रो. तलत अहमद और इस्लामिक यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. अब्दुल रशीद त्राग ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल गनी मलिक, आयुक्त सचिव वित्त सुधांशु पांडे समेत तीनों विश्वविद्यालयों के अधिकारी भी मौजूद थे। एमओयू की अवधि दो वर्ष है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री उमर ने कहा कि इस ज्ञापन से तीनों यूनिवर्सिटी को फायदा होगा। इससे शोध और प्रशिक्षण के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में भी विकास की संभावनाएं प्रबल होंगी। राज्य के स्टूडेंट्स दिल्ली यूनिवर्सिटी में जाने का मौका पाएंगे। साथ ही वहां की शैक्षणिक उत्कृष्टता का लाभ भी उठा पाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि तीनों यूनिवर्सिटी ज्ञापन में हस्ताक्षरित बातों पर अमल करते रहेंगे। 

एमओयू के मुताबिक तीनों यूनिवर्सिटी की फैकल्टी और स्टूडेंट्स एक-दूसरे के संसाधनों का प्रयोग कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त वो साथ मिलकर शोध परियोजनाओं पर काम करेंगे। पीएचडी प्रोग्राम में वो ज्वाइंट सुपरविजन पाएंगे। साथ ही नियमित रूप से फैकल्टी और स्टूडेंट्स का एक्सचेंज भी होगा। एमओयू को चालू रखने के लिए समय समय पर तीनों यूनिवर्सिटीज संयुक्त बैठकें और वर्कशाप करते रहेंगे। इधर, एमओयू की खबर से विद्यार्थियों में भी काफी खुशी देखी जा रही है(दैनिक भास्कर,श्रीनगर,21.10.11)।

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19 अक्टूबर 2011

इग्नू ने शुरू किया चाइनीज लैग्वेंज पर ऑनलाइन कोर्स

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने चीनी (भाषा) पर ऑनलाइन कार्यक्रम के लिए चाइनीज इंस्टीट्यूट ऑफ चेन्नै और श्री महावीर जैन विद्यालय एजुकेशन फॉउंडेशन के साथ समझौता किया है। सहमति पत्र (एमओयू) के अनुसार , दोनों संस्थाओं ने इग्नू के साथ चीनी (भाषा) और संस्कृत (भाषा) पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम के लिए इग्नू के साथ मिलकर 6 माह और 1 वर्ष का सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कोर्स पेश करने पर सहमति व्यक्त की है।

इग्नू के स्कूल ऑफ फॉरेन लैग्वेंज (एसओएफएल) की निगरानी में शुरू होने वाले इस कोर्स में ऑनलाइन माध्यम के अलावा संस्थान में आमने-सामने बैठ कर भी पढ़ाई की जा सकेगी। इग्नू के एसओएफएल के निदेशक प्रफेसर जी. चौधरी के अनुसार, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट के माध्यम से पूरे देश में पहुंच स्थापित करना है। इसके लिए इंटरनेट के जरिए क्लास तैयार किया जाएगा , जिससे छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद हो सकेगा। बता दें कि भारत में पहली बार चीनी (भाषा) में ऑनलाइन कोर्स पेश किया गया है(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,17.10.11)।

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मुंबई यूनिवर्सिटी शुरू कर रही है महाराष्ट्र अध्ययन केंद्र

महाराष्ट्र की संस्कृति, साहित्य और यहां की परंपरा से वाकिफ कराने के लिए मुंबई यूनिवर्सिटी ने स्टडी सेंटर खोलने की योजना बनाई है। इसे महाराष्ट्र अध्ययन केंद्र का नाम दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य सुदूर क्षेत्रों से आए हजारों स्टूडेंट्स को महाराष्ट्र की संस्कृति, शिक्षा और भाषा से परिचित कराना। इस क्षेत्र में रोजगार की संभावना है की जानकारी भी मिलेगी। इस बारे में यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क अधिकारी विनोद मलाले ने बताया कि ग्लोबलाइजेशन की दुनिया में स्टूडेंट हाइटेक हो गए। इनका अधिकतर समय फेसबुक और इंटरनेट पर बीतता है। ऐसे में इनको स्थानीय संस्कृति, शिक्षा, भाषा और साहित्य से जोड़ने के लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता है, जिसे महाराष्ट्र अध्ययन केंद्र की ओर से दी जाएगी। इसके लिए यूनिवर्सिटी ने एक पैनल बनाकर संबंधित कॉलेजों के प्रिंसिपलों और अन्य लोगों से चर्चा कर रही है। बता दें कि मुंबई यूनिवर्सिटी में उपरोक्त विषय से स्टूडेंट्स को जोड़ने की कोशिशें काफी दिनों से हो रही थी, जो अब जाकर पूरी हो रही है(नवभारत टाइम्स,मुंबई,19.10.11)।

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13 अक्टूबर 2011

भोपाल में रहकर कीजिए आईआईटी,मुंबई का कोर्स

क्या आप जानना चाहते हैं कि आईआईटी मुंबई की क्लासेस में क्या पढ़ाया जा रहा है, क्या आप भी उसका हिस्सा बनना चाहते हैं तो अब ये मुश्किल नहीं। इसमें शामिल होने के लिए आईआईटी मुंबई जाने की जरूरत नहीं है बल्कि भोपाल में रहकर ही यह कोर्स किया जा सकता है।
मानव संसाधन और विकास मंत्रालय द्वारा आईआईटी मुंबई के माध्यम से देशभर में लाइनेक्स और सॉफ्टवेयर टेस्टिंग कोर्स आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए देशभर में करीब 25 सेंटर बनाए गए हैं जिसमें भोपाल से मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) भी शामिल है। यानी इंदौर स्थित एसजीएसआईटीएस भी इसके लिए सेंटर बनाया गया है। इस कोर्स का उद्देश्य फैकल्टी और रिसर्च स्कॉलर्स को सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की नई तकनीक से रूबरू कराना है ताकि टीचिंग के दौरान वे अपने स्टूडेंट्स को अपडेट कर सकें।

सप्ताह में दो क्लास
यह कोर्स 5 सप्ताह तक चलेगा जिसमें प्रत्येक शनिवार और रविवार क्लास लगेगी। इस कोर्स में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सारे सेंटर जुड़े रहेंगे जिसमें आईआईटी मुंबई के एक्सपर्ट द्वारा लेक्चर दिया जाएगा। कोर्स में शामिल होने के लिए किसी भी कॉलेज की फैकल्टी और मैनिट रिसर्च स्कॉलर अपना रजिस्ट्रेशन आईआईटी मुंबई की वेबसाइट और मैनिट की वेबसाइट पर करा सकते हैं।
इसमें करीब 40 से 45 लोगों को शामिल किया जाएगा। कोर्स नवम्बर के दूसरे सप्ताह से प्रारंभ होगा जिसमें लिए 16 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। यह क्लास मैनिट स्थित डिपार्टमेंट ऑफ कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में लगेगी।

सिखाएंगे सॉफ्टवेयर टेस्टिंग
कोर्स में खासतौर पर सॉफ्टवेयर टेस्टिंग पर जोर दिया जाएगा। नित नई टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर तैयार किए जा रहे हैं। इसलिए फैकल्टी के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे इन सब परिवर्तनों से अपडेट रहें। इसलिए कोर्स में नए सॉफ्टवेयर की जानकारी और टेस्टिंग के लिए अपनाई जाने वाली तकनीक के बारे में बताया जाएगा। इसमें इन नए सॉफ्टवेयर के उपयोग और उनके महत्व के बारे में भी बताया जाएगा।
फैकल्टी और रिसर्च स्कॉलर दोनों के लिए यह कोर्स महत्वपूर्ण है। क्योंकि इसमें देश के बेस्ट एक्सपर्ट द्वारा सॉफ्टवेयर की दुनिया की जानकारी दी जाएगी।
- डॉ. निलय खरे, एचओडी डिपार्टमेंट ऑफ कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, मैनिट(उदित बर्सले,दैनिक भास्कर,भोपाल,13.10.11)

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09 अक्टूबर 2011

भीमराव अंबडेकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र इंग्लैंड में पढ़ेंगे सोशल इंजीनियरिंग

शिक्षक व विद्यार्थी साथ-साथ इंग्लैंड जाकर सोशल इंजीनियरिंग पढ़ेंगे। यह मौका मिलेगा बाबा साहेब भीमराव अंबडेकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों व शिक्षकों को। इंग्लैंड के दौरे पर गए अंबेडकर विवि के कुलपति की पहल पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के बीच सहमति भी बन गई है। शिक्षा के मामले में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय आने वाले समय में अन्य विश्र्वविद्यालयों से अलग होगा। यहां के विद्यार्थी इंग्लैंड जाकर वहां के विद्यार्थियों के साथ पढ़ाई करेंगे। यही नहीं वहां के विद्यार्थियों के साथ रहकर खाली वक्त में उनके द्वारा किए गए कार्यो का भी अध्ययन करेंगे। यह मौका विद्यार्थियों के साथ ही विश्र्वविद्यालय के शिक्षकों को भी मिलेगा। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों के समुचित विकास के उद्देश्य को लेकर पिछले वर्ष इंग्लैंड दौरे पर गए अंबेडकर विवि के कुलपति ने वहां के शिक्षाविदों से बातचीत की थी। लौटने के बाद विश्वविद्यालय ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को प्रस्ताव भेजा था। पिछले वर्ष के प्रस्ताव को इंग्लैंड भेज दिया गया। कितने विद्यार्थी इंग्लैंड जाएंगे और कितने शिक्षकों को वहां पढ़ाने का मौका दिया जाएगा इस पर अभी अंतिम फैसला इंग्लैंड के शिक्षाविदों के विश्वविद्यालय दौरे बाद किया जाएगा(दैनिक जागरण,लखनऊ,9.10.11)।

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खेती पर शुरू होगा व्यावसायिक पाठ्यक्रम

बीते दो साल से स्कूलों से विश्वविद्यालयों तक व्यावसायिक शिक्षा का अलग ढांचा खड़ा करने में जुटी सरकार अब इसे अगले शैक्षणिक सत्र 2012 से शुरू कर पाएगी। वजह यह है कि पॉलिटेक्निक व इंजीनियरिंग कॉलेजों में इसकी पढ़ाई के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रम तो तैयार हो गए हैं, लेकिन शैक्षिक पाठ्यक्रमों का मामला अब भी लटका है। इस बीच सरकार ने अगले दो वर्षो में खेती के लिए भी अलग से व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने की बात कही है।
पॉलिटेक्निक व इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रम की तैयारी पूरी होने के साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शनिवार को यहां राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा पात्रता ढांचा [एनवीईक्यूएफ] को लांच भी कर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के तहत नौंवीं कक्षा से विश्वविद्यालय स्तर तक सर्टिफिकेट, डिप्लोमा व डिग्री दिया जाना है। लेकिन अभी तक सिर्फ पॉलिटेक्निक व इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाने के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रम ही तैयार हो पाए हैं। उन्होंने माना कि इन दोनों स्तरों के लिए अभी भी शैक्षिक [अकादमिक] पाठ्यक्रम तैयार नहीं हो सकें हैं। लेकिन अगले शैक्षिक सत्र 2012 तक यह तैयार हो जाएगा।

सिब्बल ने फिर दोहराया कि इस ढांचे को खड़ा करने का एक बड़ा मकसद यह भी है कि 12वीं तक की व्यवसायपरक शिक्षा हासिल करने के बाद ही छात्रों को आसानी से रोजगार मिल सके। इस मौके पर उन्होंने खेती के लिए व्यावसायिक पढ़ाई को राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा पात्रता ढांचे के दायरे में लाए जाने की पैरवी की। उन्होंने खेती के लिए व्यावसायिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को 2013 तक शुरू करने की भी बात कही है। जहां तक स्कूलों में नौंवी कक्षा से व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने का सवाल है, तो यह अभी हरियाणा व पश्चिम बंगाल में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट तक ही सीमित है। बताते हैं कि पायलट प्रोजेक्ट के तजुर्बो से सीखने के साथ ही इसे भी 2012 से शुरू कर दिया जाएगा ।
इस मौके पर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद [एआइसीटीई] के चेयरमैन प्रो एसएस मंथा ने भरोसा दिया कि एनवीईक्यूएफ के तहत शिक्षा देने वाले सभी संस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त होंगे। लिहाजा उनके डिप्लोमा व डिग्री पर सवाल नहीं उठाए जा सकेंगे(जागरण,दिल्ली,9.10.11)।

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03 अक्टूबर 2011

उच्च शिक्षा पर शुरू होंगे 50 शैक्षणिक चैनल

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 50 शैक्षणिक चैनल शुरू करने की योजना बनाई है जो उच्च शिक्षा के विभिन्न विषयों पर आधारित होंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस विषय पर हाल ही में अंतरिक्ष विभाग को पत्र लिखा है और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को इसके लिए दो ट्रांसपोंडर प्रदान करने की मंजूरी देने का आग्रह किया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा-‘‘हमने डीटीएच माध्यम से 50 शैक्षणिक चैनल शुरू करने की योजना बनाई है। इसके लिए दो ट्रांसपोंडर उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।’’


उन्होंने कहा कि प्रारंभ में हमारी योजना विभिन्न विषयों से संबंधित करीब एक हजार चैनल शुरू करने की थी जिसके लिए एक पूरे उपग्रह की जरूरत होती। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। अधिकारी ने कहा-‘‘अब हमने 50 चैनल शुरू करने की योजना को अंतिम रूप दिया है और दो ट्रांसपोंडर मांगे हैं। ये ट्रांसपोंडर हमें जल्द प्राप्त होने की उम्मीद है। प्रारंभ में इसका बजट 100 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है।’’ उन्होंने बताया कि अगर कोई रसायन विज्ञान का छात्र है तो भौतिक रसायन, कार्बनिक रसायन और अकार्बनिक रसायन सभी के लिए अलग-अलग चैनल होगा। इसी प्रकार से जीव विज्ञान में प्राणी विज्ञान और वनस्पति विज्ञान दोनों के लिए अलग-अलग चैनल होंगे। गणित के अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग चैनल होंगे। इसी प्रकार से सामाजिक विज्ञान के विभिन्न विषयों पर अलग-अलग चैनल होंगे। गौरतलब है कि शिक्षा के प्रसार को ध्यान में रखते हुए 2004 में ‘एडुसेट’ का प्रक्षेपण किया गया था जो पिछले वर्ष सितम्बर में सेवा से हटा लिया गया। अधिकारी ने बताया-‘‘इन 50 चैनलों के लिए कार्यक्रम तैयार कर लिये गए हैं।’’

अधिकारी ने कहा-‘‘हमें पहले ही दो ट्रांसपोंडर प्राप्त हो जाते लेकिन पिछले वर्ष जीएसएलवी के विफल रहने के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। हाल के उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के बाद हमें जल्द ही दो ट्रांसपोंडर प्राप्त हो सकेंगे।’’ मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संबंधी शिक्षा के प्रसार के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन शिक्षण कार्यक्रम (एनपीटीईएल) पेश किया है। आईआईटी और आईआईएससी के माध्यम से प्रौद्योगिकी आधारित कार्यक्रम तैयार करने और चैनलों के माध्यम से इसका प्रसारण करने की योजना बनाई गई है(राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,3.10.11)।

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अल्पसंख्यक छात्रों के लिए महाराष्ट्र में विशेष कक्षाएं

महाराष्ट्र सरकार ने सात पॉलिटेक्निक कॉलेजों में अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के लिए सांध्य कक्षाएं शुरू की हैं। सर जे. जे. वास्तुशिल्प विद्यालय में हाल ही में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री मिलिंद देवड़ा की उपस्थिति में मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने एक ऐसे कॉलेज का उद्घाटन किया। चव्हाण ने इस अवसर पर कहा, 'अल्पसंख्यक समुदायों के लिए पॉलिटेक्निक कॉलेज शुरू करना एक आदर्श है और अल्पसंख्यक विभाग की ऐसी शैक्षणिक योजनाओं से लागों को मुख्य धारा में आने में मदद मिलेगी।' मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए 15 सूत्रीय कार्यक्रम का सूत्रपात किया और उसे राज्य में लागू किया जा रहा है। राज्य के अल्पसंख्यक विभाग ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के साथ मिलकर सात पॉलिटेक्निक कॉलेज शुरू किए हैं(नवभारत टाइम्स,मुंबई,3.10.11)।

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फरीदाबादःनेहरू कॉलेज के छात्रों के लिए बनेगी स्मार्ट क्लास

पंडित जवाहर लाल नेहरू कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों के लिए स्मार्ट क्लास रूम बनाया जाएगा। उच्चतर शिक्षा विभाग ने इसको हरी झंडी दिखा दी है। प्रयोग के तौर पर किसी भी एक संकाय के क्लास रूम से इसे शुरू किया जाएगा। इसके सफल होने के बाद अन्य कक्षाओं में इसे लगाया जाएगा।


हाल ही उच्चतर शिक्षा विभाग ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शामिल प्रदेश के 25 कॉलेजों के प्रिंसिपलों को बुलाया था। उनसे स्मार्ट क्लास शुरू करने में आ रही अड़चन के बारे में पूछा गया था। सभी अड़चनों को दूर कर इसे शुरू करने का निर्देश दिया गया है। सभी जरूरी संसाधन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे। ऐसा हुआ तो शीघ्र ही छात्र स्क्रीन के माध्यम से पढ़ाई करते हुए दिखेंगे। ब्लैक बोर्ड बीते दिनों की बात हो जाएगी। स्मार्ट क्लास रूम शुरू होने से छात्र और प्राध्यापक भी खुश हैं। इनका मानना है कि बदलते आधुनिक परिवेश के अनुसार पढ़ाई होनी चाहिए। गौरतलब है कि सामान्य कक्षाओं को स्मार्ट लुक दिया जाता है।

कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और स्क्रीन के माध्यम से पढ़ाई होती है। पढ़ने के लिए बेहतर फर्नीचर की व्यस्था स्मार्ट क्लास में होगी। प्राध्यापक सीडी में लेक्चर तैयार करके लाएंगे। इसे प्रोजेक्टर के माध्यम से स्क्रीन पर प्रसारित किया जाएगा। इससे छात्रों को समझने में काफी आसानी होगी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए चयनित कॉलेजों में ही स्मार्ट क्लास बनाए जा रहे हैं। प्रदेश के 25 चुनिंदा कॉलेजों में नेहरू कॉलेज भी शामिल है। यहां करीब 4500 छात्रों के लिए स्मार्ट क्लास बनाए जाएंगे(दैनिक भास्कर,फरीदाबाद,3.10.11)।

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21 सितंबर 2011

यूपीःअब विश्वविद्यालयों में भी लगेंगी वर्चुअल कक्षाएं

राज्य सरकार की मदद से अब विश्वविद्यालयों में भी वर्चुअल कक्षाएं लगेंगी। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री राकेशधर त्रिपाठी इन कक्षाओं का बुधवार को उद्घाटन करेंगे। यह कक्षाएं यूजीसी के एकेडमिक ब्लाक के दो कमरों में बनायी गयी हैं। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी एकेडमिक स्टाफ कालेज के कार्यकारी निदेशक प्रो. पद्मकांत को दी गयी हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन इन कक्षाओं के निर्माण और वर्चुअलाइजेशन पर करीब 2.88 करोड़ खर्च कर रहा है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा मंत्री विश्वविद्यालय में बन रही सेंट्रल मेस के निर्माण का भी निरीक्षण कर सकते हैं। इस प्रोजेक्ट पर भी विश्वविद्यालय 2.75 रुपये खर्च कर रहा है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव जीपी त्रिपाठी ने बताया कि उच्च शिक्षा मंत्री को वर्चुअल कक्षाओं के उद्घाटन के लिए आमंत्रितकिया गया है। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में वर्चुअल कक्षाएं जून से बनकर तैयार हैं। जून में ही उच्च शिक्षा मंत्री इसका उद्घाटन करने वाले थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तैयारी भी पूरी कर ली थी, लेकिन ऐन वख्त पर उद्घाटन कार्यक्रम टल गया था। अब उच्च शिक्षा मंत्री को दोबारा उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया गया है। इन कक्षाओं के शुरू हो जाने के बाद इग्नू की तर्ज पर विश्वविद्यालय में ऑन लाइन पढ़ाई भी शुरू हो सकेगी(राष्ट्रीय सहारा,लखनऊ,21.9.11)।

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