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08 जनवरी 2013

ये योग्यताएं हैं रोज़गार की गारंटी

भारत में नये साल के शुरुआती 6 महीने नौकरियों के लिहाज से उम्‍मीदें जगाने वाला नहीं रहने वाले हैं। अधिकतर कंपनियों ने मार्च 2013 या जून 2013 तक अपने यहां भर्तियां बंद कर रखी हैं। वहीं, नौकरी खोजने वालों की संख्या में पिछले साल की तुलना में इस साल 28 फीसदी इजाफा होने की उम्मीद है। भारतीय अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार भी नई नौकरियों के रास्ते में रोड़ा बनी हुई है। ऐसे में कंपनियां बहुत जरूरत पड़ने पर लंबी और टफ प्रोसेस के तहत कर्मचारियों को रिक्रूट कर रहीं हैं। 

जॉबः रिसर्च कंपनी माईहाइरिंगक्लबडॉटकॉम ने कहा है कि वैसे तो 2013 में करीब 10 लाख नई नौकरियां मिलेंगी, लेकिन शुरुआती महीनों में नौकरियों का हाल 2012 की तरह ही रहने वाला है। पिछले साल नौकरियों में 21 फीसदी की कमी आई थी। दिलचस्प है कि साल 2012 में 7 लाख लोगों को ही नौकरियां मिली हैं, जबकि हर जॉब पोस्ट के लिए करीब 240 से भी ज्यादा आवेदन आए। इस बार यह औसत और ज्‍यादा होने की संभावना है। ऐसे में नए साल की शुरुआत में नौकरी खोजना मुश्किल भरा हो सकता है। लेकिन फिर भी आपको नई नौकरी की जरूरत है या फिर अच्छी नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो नौकरीदाता कंपनियों की जरूरत को समझना बहुत जरूरी है। जानें कंपनियों की उन जरूरतों को जिसे पूरा कर आप नो जॉब जोन में भी नौकरी हासिल कर सकते हैं। 

लंबी प्रक्रिया: वैसे तो देश की अधिकतर कंपनियों में मार्च 2013 तक भर्तियां बंद हैं, लेकिन बहुत ज्यादा जरूरत पड़ने पर कुछ कंपनियां बेहतर कैंडीडेट को जॉब दे रही हैं। जॉब एक्सपर्ट के मुताबिक बेहतर कैंडीडेट को खोजने और उन्हें नौकरी पर रखने के लिए कंपनियां लंबी प्रक्रिया को अपना रहीं हैं। ऐसे में नौकरी खोजने वालों को इस लंबी प्रक्रिया के लिए पहले से ही तैयार रहना होगा। साथ ही इंटरव्यू की टफ प्रोसेस भी देखने को मिल सकती है। रिक्रूटमेंट फर्म मैनपावर ग्रुप के एमडी ए. जी राव का कहना है कि अगले 6 महीने तक बाजार में नौकरियों का ऐसा ही हाल रहने वाला है। ऐसे में जल्दबाजी करना जॉब सर्च करने वालों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। 

हाई एक्सपेक्टेशन: वर्तमान समय में जॉब देने वाली कंपनियां नए इम्प्लाई से ज्यादा से ज्यादा आउटकम मिलने की एक्सपेक्टेशन कर रहीं हैं। रिक्रूटमेंट फर्म ग्लोबलहंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ सुनील गोयल के मुताबिक कंपनियों की डिमांड है कि नए लोग दिन या लेट नाइट तक फ्लेक्सिबल वर्किग ऑवर में काम करें। साथ ही एक से ज्यादा डिपार्टमेंट का नॉलेज रखने वालों को तरजीह दी जा रही है। ऐसे में शुरूआती 6 महीनों में उन्हीं लोगों के नौकरी पाने के ज्यादा चांसेज हैं जो टेक्नीकल सहित कई फील्ड के एक्सपर्ट हैं।

ट्रैवल: अगर आप नई नौकरी पाने के अपने चांसेज बढ़ाना चाहते हैं तो वर्तमान दौर में कहीं भी रिलोकेट होने के लिए तैयार हो जाइए। जॉब में रिलोकेशन नौकरी पाने के चांसेज बढ़ाता है। रिक्रूटमेंट फर्म हेड होंचोस के चीफ एक्जीक्यूटिव उदय सोड़ी के मुताबिक मंदी के दौर में अधिकतर कंपनियां रिमोट एरिया से कर्मचारियों को सस्ते में हायर कर रही हैं और उन्हें अपने अलग-अलग ऑफिसों या फैक्ट्री में ट्रांसफर कर देती हैं। विप्रो और टीसीएस जैसी कंपनियों ने तो छोटे जगह पर लोगों को रिक्रूट करने के लिए साउथ में विशाखापट्टनम और सेंट्रल इंडिया के लिए एमपी में इंदौर में यूनिट बनाई हुई है। ऐसे में नौकरी पाने के चांसेज बढ़ाने के लिए रिलोकेशन के लिए हमेशा तैयार रहें। 

पैसा: अगर आप ज्यादा सैलरी पाने की लालच में नौकरी बदलने की सोच रहे हैं तो आपके हाथ निराशा ही लगेगी। जहां कुछ महीनों पहले तक जॉब स्विच करने पर लोगोकं को 25 फीसदी तक बढ़ी सैलरी मिल जाती थी, वहीं अब कंपनियों की ओर से इस इजाफे को 15 फीसदी पर ही सीमित कर दिया है। गोयल के मुताबिक कई कंपनियां लोगों को उनकी पिछली जॉब के बराबर सैलरी ही ऑफर करती हैं। इतना ही नहीं, अगर आप नई कंपनी से बोनस मिलने की उम्मीद रखते हैं तो पुरानी नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं है। वर्तमान में कंपनियों ने बोनस देना भी बंद कर दिया है। ऐसे में अगर आपको नई नौकरी करनी है तो कम सैलरी और बिना बोनस के ही संतोष करने के लिए तैयार रहना होगा(दैनिक भास्कर,8.1.13)।

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12 जून 2012

हरियाणाःपेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते में संशोधन

हरियाणा सरकार ने पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते में बदलाव किया है, जो एक जनवरी से प्रभावी माना जाएगा। राज्य के वित्त विभाग एक प्रवक्ता ने कहा कि महंगाई भत्ता का मासिक संशोधित दर पेंशन एवं फेमिली पेंशन का 139 फीसदी होगी(हिंदुस्तान,चंडीगढ़,12.6.12)।

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09 जून 2012

यूपीःकई विभागों की वेतन विसंगतियां दूर

वेतन समिति की सिफारिशों को मानते हुए प्रदेश सरकार ने कई विभागों की वेतन विसंगतियों को दूर कर दिया है। इसके अलावा वरिष्ठ लेखा परीक्षा बनने की विभागीय अनिवार्यता को भी खत्म कर दिया गया है। न्यायिक अधिकारियों के लिए चिकित्सा भत्ता और पोशाक भत्ता भी तय कर दिया गया है। गुरुवार को हुई मंत्रि परिषद की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। 

सूत्रों के अनुसार परिवार कल्याण विभाग के तहत जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को अब 4200 के ग्रेड पे के स्थान पर 4600 ग्रेड पे मिलेगा। इसके साथ ही राज्य एवं परिवार कल्याण संस्थान की सेवा नियमावली भी बनाई जाएगी। प्रदेश के चिकित्सा विश्वविद्यालय, होम्योपैथी, एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी मेडिकल कालेज में तैनात कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को भी दूर किया गया है। 

इसके अलावा उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा स्थानीय लेखा परीक्षा काडर में उप निदेशक (6600 ग्रेडपे) के चार पदों में एक पद को संयुक्त निदेशक के 7600 वाले ग्रेड पे के एक पद में तब्दील किया जाएगा। 5400 ग्रेड पे में सहायक निदेशक के 44 पदों में सोलह पदों को उप निदेशक नाम मिलेगा। 4800 ग्रेड पे में जिला लेखा परीक्षा अधिकारी के 65 पदों को तथा 5400 ग्रेड पे के सहायक निदेशक के 28 पदों को मिलाकर सम्मिलित संवर्ग बनेगा। इनके लिए कंप्यूटर में ओ लेवल डिप्लोमा जरूरी कर दिया गया है। सरकार ने इसी क्रम में वरिष्ठ लेखा परीक्षक वर्ग में 4200 ग्रेडपे वाले पदों के लिए विभागीय परीक्षा का अनिवार्यता खत्म कर दी है। सहायक लेखा परीक्षक को अब 4600 के स्थान पर 4800 ग्रेडपे दिया जाएगा। सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी के पद पर वरिष्ठ लेखा परीक्षकों से शत प्रतिशत प्रोन्नति की व्यवस्था बहाल की जाएगी। सहकारी समितियों व पंचायत संगठन के तहत उप मुख्य लेखा परीक्षक 6600 रुपये के ग्रेडपे के पदों में एक प नद को संयुक्त मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी में प्रोन्नत किया है। 

कैबिनेट ने उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली को भी मंजूरी दे दी है। यह नियमावली न्यायिक अधिकारियों को प्रोन्नति देने के लिए बनाई गई है। न्यायिक अधिकारियों के लिए चिकित्सा भत्ता, पोशाक भत्ता एवं सेवक भत्ते को भी मंजूरी दी गई है(दैनिक जागरण,लखनऊ,9.6.12)।

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डीयूःसेंट स्टीफेंस के कॉलेज हॉस्टल में बच्चों के साथ-साथ अब रह सकेंगे अभिभावक भी

सेंट स्टीफंस कॉलेज के हॉस्टल रूम अब बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों के लिए भी उपलब्ध होंगे। कॉलेज में दाखिले के इच्छुक उन छात्रों व उनके अभिभावकों को राहत दी जाएगी, जो दिल्ली के बाहर से यहां आएंगे। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ.वॉल्सन थम्पू के अनुसार कॉलेज में उपलब्ध 45 (सिंगल/ डबल बेड) हॉस्टल रूम इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान 500 से 750 रुपए प्रतिदिन के शुल्क पर छात्रों व उनके अभिभावकों को ठहरने के लिए उपलब्ध रहेंगे(दैनिक भास्कर,दिल्ली,9.6.12)।

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जानिए डीयू के ईवनिंग कॉलेजों के बारे में

दिल्ली यूनिवर्सिटी के ईवनिंग कॉलेजों में पहले जहां 4 बजे के बाद क्लासेज शुरू होती थी और कम पर्सेंटेज वाले स्टूडेंट्स ही यहां पर एडमिशन लेते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों में तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है। अब ईवनिंग कॉलेजों को ऑफ्टरनून कॉलेज कहना ज्यादा ठीक रहेगा। इन कॉलेजों में 2 बजे से क्लासेज शुरू हो रही हैं। सभी ईवनिंग कॉलेज को- एड हैं और यहां के स्टूडेंट्स अब मॉर्निंग कॉलेजों के स्टूडेंट्स को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। ईवनिंग कॉलेजों के बारे में बता रहे हैं भूपेंद्र : 

यूनिवर्सिटी में रिजल्ट के आंकड़े बताते हैं कि कई कोर्सेज के टॉपर ईवनिंग कॉलेजों से सामने आ रहे हैं। कट ऑफ की बात करें तो कॉमर्स कोर्सेज में हाई स्कोर पर्सेंटेज पर ही स्टूडेंट्स को एडमिशन मिल रहा है। ईवनिंग कॉलजों के प्रिंसिपलों का कहना है कि अब कट ऑफ में ज्यादा फर्क नहीं है और हर साल यह गैप कम हो रहा है। किसी कोर्स में मॉर्निंग कॉलेज में अगर 90 पर्सेंट पर एडमिशन हो रहा है तो ईवनिंग में 85 तक एडमिशन होता है। यानी हाई स्कोर स्टूडेंट्स ईवनिंग कॉलेजों में पढ़ रहे हैं। हालांकि ईवनिंग कॉलेजों में साइंस कोर्सेज नहीं हैं और आर्ट्स व कॉमर्स के कोर्सेज की पढ़ाई होती है। यूजीसी ने भी यूनिवर्सिटीज व कॉलेजों में ईवनिंग शिफ्ट पर खास ध्यान देने की बात कही है। 

यूजीसी का फाइव ईयर प्लान 
- फाइव ईयर प्लान तैयार करने वाले वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों के आधार पर यूजीसी ने कहा है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में शिफ्ट सिस्टम शुरू किया जाना चाहिए ताकि मौजूदा सुविधाओं का फायदा ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को मिल सकें। ईवनिंग कॉलेजों का कॉन्सेप्ट फायदेमंद साबित होगा। 

- अभी डीयू जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी के करीब दस कॉलेजों में ही ईवनिंग शिफ्ट चल रही है जबकि डीयू से जुड़े कॉलेजों की संख्या 70 से भी ज्यादा है। ऐसे में दूसरे कॉलेजों में भी ईवनिंग शिफ्ट शुरू की जा सकती है। ऐसे बहुत से कॉलेज हैं , जहां पर मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर है और वहां पर ईवनिंग शिफ्ट में भी स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया जा सकता है। 

- यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट में भी ईवनिंग शिफ्ट शुरू कर स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया जा सकता है। डीयू के ज्यादा से ज्यादा कॉलेजों में ईवनिंग शिफ्ट शुरू करने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। 

- जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में नया कॉलेज शुरू करना आसान नहीं है लेकिन मॉर्निंग कॉलेजों के इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल जा सकता है और वहां पर ईवनिंग शिफ्ट शुरू की जा सकती है। डीयू में दिल्ली सरकार के 28 कॉलेज हैं और इन सभी कॉलेजों में ईवनिंग शिफ्ट शुरू हो सकती है। 

कॉमर्स यहां भी हिट 
मॉर्निंग कॉलेजों की तरह ईवनिंग कॉलेजों में भी बीकॉम ऑनर्स और बीकॉम कोर्स का क्रेज बढ़ता जा रहा है। जो स्टूडेंट्स 3-4 पर्सेंट की कमी के चलते मॉर्निंग कॉलेजों में एडमिशन नहीं ले पाते , वे अपने कोर्स को अहमियत देते हुए ईवनिंग कॉलेजों में एडमिशन लेते हैं। ईवनिंग कॉलेजों में भी कॉमर्स कोसेर्ज की कट ऑफ हाई रहती है। दयाल सिंह ईवनिंग कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स कोर्स की लास्ट कट ऑफ 83 पर्सेंट गई थी। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक मल्होत्रा का कहना है कि उनके कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स , बीकॉम और दूसरे ऑनर्स कोसेर्ज में फर्स्ट क्लास पाने वाले स्टूडेंट्स ज्यादा हैं और थर्ड क्लास पाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या कम है। इससे साफ है कि यहां के स्टूडेंट्स भी पढ़ाई में मॉर्निंग कॉलेजों से पीछे नहीं है। बल्कि ईवनिंग कॉलेजों का रिजल्ट कई मॉर्निंग कॉलेजों से बेहतर आ रहा है। डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि दयाल सिंह ईवनिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स आईआईटी दिल्ली , आईआईटी मुंबई , एम्स समेत कई संस्थानों में होने वाली क्लचरल व स्पोर्ट्स एक्टिवटी में भाग लेते हैं और प्राइज जीत रहे हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेज में ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एचआरएम) , टूरिज्म जैसे वोकेशनल कोसेर्ज में बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स एडमिशन ले रहे हैं। ईवनिंग कॉलेजों में डीपीएस , मॉडर्न , सेंट कोलंबस जैसे टॉप स्कूलों के स्टूडेंट्स भी एडमिशन ले रहे हैं। 

अब स्टूडेंट्स की कमी नहीं  
ईवनिंग कॉलेजों में अब स्टूडेंट्स भी कम नहीं हैं। शहीद भगत सिंह ईवनिंग कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पी. के. खुराना ने बताया कि अब मॉर्निंग और ईवनिंग कॉलेजों में स्टूडेंट्स की संख्या में 5 पर्सेंट से ज्यादा का फर्क नहीं है। कॉलेज में 1,900 स्टूडेंट्स हैं। उन्होंने बताया कि ईवनिंग कॉलेजों के स्टूडेंट्स स्पोर्ट्स , डिबेट , इंटर-यूनिवर्सिटीज एक्टिवटीज में भी हिस्सा लेते हैं। ज्यादातर ईवनिंग कॉलेजों में क्लासेज दो बजे से शुरू हो जाती हैं। ऐसे स्टूडेंट्स की कमी नहीं है , जिनकी फर्स्ट चॉइस ईवनिंग कॉलेज बन रहे हैं। 

कॉमर्स कोर्सेज को करने वाले स्टूडेंट्स ग्रैजुएशन के साथ-साथ दूसरे कोर्स भी करना चाहते हैं। ऐसे स्टूडेंट्स के पास ईवनिंग कॉलेज के रूप में बेहतर ऑप्शन होता है। दयाल सिंह ईवनिंग कॉलेज में 2,200 से ज्यादा स्टूडेंट्स हैं और अब ईवनिंग कॉलेजों में स्टूडेंट्स की संख्या भी काफी अधिक है। ईवनिंग कॉलेजों में अब र्गल्स की संख्या हर साल बढ़ रही है। दयाल सिंह ईवनिंग कॉलेज में 30 पर्सेंट गर्ल्स स्टूडेंट्स हैं। 

डीयू के ईवनिंग कॉलेजों में कुछ साल पहले तक गर्ल्स एडमिशन लेने से कतराती थीं , क्लासेज देर से शुरू होना तो एक कारण था ही , साथ ही सिक्युरिटी की भी प्रॉब्लम थी। लेकिन ईवनिंग कॉलेजों ने र्गल्स स्टूडेंट्स के लिए जहां कॉलेज की टाइमिंग आफ्टरनून में कर दी , वहीं उन्हें एडमिशन में भी 3 से 5 पर्सेंट की छूट देनी शुरू की। इन चेंज से ट्रेंड भी बदला और अब हर ईवनिंग कॉलेज में हर साल र्गल्स की संख्या औसतन 5 पर्सेंट तक बढ़ रही है। कॉलेजों में 35-50 पर्सेंट तक गर्ल्स हैं। 

कट ऑफ भी बढ़ी 
ईवनिंग कॉलेजों की कट ऑफ भी बढ़ रही है। इस साल दयाल सिंह ईवनिंग कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स की लास्ट कट ऑफ 83 रही थी और बीकॉम की 79 पर्सेंट। शहीद भगत सिंह ईवनिंग कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स की कट ऑफ 85 रही और बीकॉम में 79 पसेर्ंट पर एडमिशन क्लोज हुए। रामानुजन कॉलेज (पहले देशबंधु ईवनिंग कॉलेज) में बीकॉम ऑनर्स की लास्ट कट ऑफ 81 और बीकॉम की 77 पर्सेंट रही। 

ईवनिंग कॉलेज  
देशबंधु ईवनिंग कॉलेज का नाम बदलकर रामानुजन कॉलेज रख दिया गया है और अगले साल से इस कॉलेज में भी मॉर्निंग में क्लासेज शुरू हो जाएंगी। इस साल कॉलेज में दोपहर 2.30 बजे से क्लासेज शुरू होंगी। बाकी ईवनिंग कॉलेजों में दयाल सिंह ईवनिंग कॉलेज , पीजीडीएवी ईवनिंग कॉलेज , रामलाल आनंद ईवनिंग कॉलेज , शहीद भगत सिंह ईवनिंग कॉलेज , श्याम लाल ईवनिंग कॉलेज , सत्यवती ईवनिंग कॉलेज , श्री अरविंदो ईवनिंग कॉलेज , जाकिर हुसैन ईवनिंग कॉलेज , मोतीलाल नेहरू ईवनिंग कॉलेज हैं(नभाटा,दिल्ली,9.6.12)।

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यूपी: दरोगा भर्ती में मुसलमानों के लिए 18% कोटा

उत्तर प्रदेश में होने जा रही पुलिस सब-इंस्पेक्टरों की भर्ती में राज्य सरकार सच्चर कमिटी की सिफारिशों का पालन करते हुए मुसलमानों को 18% रिजर्वेशन देगी। समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी मुसलमानों को 18% रिजर्वेशन देने का वादा किया था। 

गौरतलब है कि अभी केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों को चिट्ठी लिखी गई थी और सच्चर कमिटी की सिफारिशों की याद दिलाते हुए मुस्लिम बहुल इलाकों में मुसलमान इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर को तैनात करने के लिए कहा गया था। 

शुक्रवार को विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और सदन के नेता अहमद हसन ने बीएसपी के अब्दुल हन्नान के सवाल के जवाब में कहा कि प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के 18 इंस्पेक्टरों और 81 सब-इंस्पेक्टरों को थाना प्रभारी का चार्ज दिया गया है। थाना प्रभारियों के पदों पर मुस्लिमों की तैनाती के बारे में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि शासन की ओर से जारी आदेशों के तहत प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय का कोटा पूर्ण है। 

उन्होंने बताया कि 18 जुलाई 2007 को जारी शासनादेश के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 % आरक्षण में ही मुस्लिम समुदाय को भी प्रतिनिधित्व दिया जाता है। अल्पसंख्यक समुदाय के लिए अलग से कोई कोटा निर्धारित नहीं है। उन्होंने कहा कि दरोगा की भर्ती में राज्य सरकार एसपी के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादे के अनुसार 18% आरक्षण मुसलमानों को देगी(नवभारत टाइम्स,लखनऊ,9.6.12)।

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02 जून 2012

राजस्थानःटैट के फर्स्ट लेवल पास बीएडधारियों की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने टेट के लेवल फर्स्ट पास बीएड धारकों को तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा के लेवल वन के योग्य मानने बाबत राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए भर्ती परीक्षा के प्रोसेस को याचिका के निस्तारण के अधीन कर दिया है। 

गौरतलब है कि तृतीय श्रेणी भर्ती परीक्षा शनिवार को जिला स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें अब लेवल वन पास बीएड धारी शिरकत नहीं कर सकेंगे। आरटेट परीक्षा के लेवल फर्स्ट उत्तीर्ण बीएड धारकों के पक्ष में राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 19 मई 2012 को आदेश पारित करते हुए 2 जून को आयोजित होने वाली तृतीय श्रेणी भर्ती परीक्षा के लेवल फस्र्ट के योग्य माना था। 

बाद में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील दायर की। मुख्‍य न्यायाधीश अरुण मिश्रा व न्यायाधीश संगीत लोढ़ा की खंडपीठ ने 25 मई को एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए भर्ती परीक्षा को अपील के निस्तारण के अधीन किया था। खंडपीठ के इस आदेश को चुनौती देने के लिए प्रार्थी वीराराम व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी(दैनिक भास्कर,जोधपुर,2.6.12)।

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01 जून 2012

इग्नूःआई कार्ड दिखा कर भी दे सकेंगे परीक्षा

परीक्षा की तैयारी में जुटे उन छात्रों को इग्नू ने बड़ी राहत दी है जो एडमिट कार्ड न पहुंचने से परेशान हैं। ऐसे छात्रों को इग्नू वेबसाइट से एडमिट कॉर्ड डॉउनलोड करने की सुविधा दी गई है। ऐसे छात्र आईकार्ड दिखाकर भी परीक्षा में बैठ सकते हैं, बशर्ते संबंधित परीक्षा केन्द्र पर बैठ रहे परीक्षार्थियों की सूची में उनका नाम हो। इग्नू की परीक्षाएं एक जून से शुरू हो रही हैं, जो 28 जून तक चलेंगी। परीक्षाओं के लिए देशभर में कुल 780 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 47 ओवरसीज सेंटर और 53 जेल के सेंटर शामिल हैं। देशभर के करीब 4 लाख 8 हजार 224 छात्र-छात्राओं को एडमिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। एडमिट कार्ड की विस्तृत जानकारी इग्नू की वेबसाइट पर उपलब्ध है(दैनिक भास्कर,दिल्ली,1.6.12)।

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31 मई 2012

मैट से मिल सकती है मंजिल

मैनेजमेंट स्कूलों में एडमिशन लेने के लिए कैट और मैट, दो प्रकार के एग्ज़ाम प्रमुख हैं। मैट की खासियत यह है कि यह एग्ज़ाम साल में चार बार होता है: फरवरी, मई, सितंबर और दिसंबर। इस एग्ज़ाम में बैठने के लिए स्टूडेंट का ग्रैजुएट या ग्रैजुएशन अंतिम वर्ष का स्टूडेंट होना जरूरी है। पर्सेंटेज़ की बात करें तो अलग-अलग बिज़नेस स्कूलों या यूनिवर्सिटियों के अपने-अपने मापदंड हैं और इसके लिए आपको अपने पसंद के संस्थान से ही पता करना होता है। 

मैट के साल में चार बार होने से आपको एक बार में हुई गलती को दूर करने का मौका मिलता है। मैट के पेपर में कुल पांच सेक्शन आते हैं। मैट का पेपर कठिन नहीं होता है। बेसिक कॉन्सेप्ट क्लीयर हो, तो आप इसमें बेहतर प्रर्दशन कर सकते हैं। 

सिलेक्शन कट ऑफ नहीं 
मैट में सबसे अच्छी बात है कि इसमें सिलेक्शन कट ऑफ नहीं होता है। अगर आपने सौ सवाल भी सही कर लिए तो अच्छा पर्सेंटेज़ लाना पक्का है। गणित की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकों की मदद ली जा सकती है। डेटा इंटरप्रेटेशन के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करें। अगर डमी टेस्ट में 90 से ज्यादा पर्सेंटाइल ला रहे हैं तो आप अच्छे कॉलेज में प्रवेश पाने की उम्मीद कर सकते हैं। लैंग्वेज कॉम्प्रिहेन्शन की बेहतर तैयारी के लिए रीडिंग अच्छी होनी चाहिए। साथ ही वॉकेबलरी का भी अच्छा होना जरूरी है। मॉक टेस्ट से काफी मदद मिल सकती है। जहां तक मार्किंग की बात है, तो निगेटिव मार्किंग भी होती है। सही प्रश्न के चार अंक मिलते हैं और गलत होने पर एक अंक काट लिए जाते हैं। 

एग्ज़ाम में क्या 
पेपर में नेगेटिव मार्किंग भी होती है। इसलिए उतने ही प्रश्न करें, जो आपको आते हैं। हां, हल किए गए प्रश्नों में से कम से कम 8-85 फीसदी सही होने चाहिए। इसके लिए आपमें कैलकुलेट करने की स्किल का होना जरूरी है। स्पीड, एक्युरेसी और टाइम लिमिट को ध्यान में रखते हुए तैयारी करनी चाहिए। 

मैट के पांच सेक्शन 
1. मैथ्स 
2. डाटा इंटरप्रेटेशन 
3 . रीजनिंग 
4. लैंग्वेज कॉम्प्रिहेन्शन 
 5. जनरल नॉलेज ( भारतीय व वैश्विक परिवेश ) 

सभी सेक्शनों में 40-40 सवाल आते हैं। कुल 200 सवाल होते हैं। जीके के स्कोर को पर्सेंटाइल में शामिल नहीं किया जाता है। कुछ अच्छे कॉलेज हैं , जो जीके के स्कोर को भी देखते हैं। ध्यान रहे अन्य विषयों के लिए जहां 30 से 40 मिनट का समय मान कर चला जाता है , वहीं जीके के लिए 15 मिनट का ही समय माना गया है।

मैथ्स
यह पेपर बेसिक और कैलकुलेटिव होता है। ज्यादातर सवाल फ़ॉर्म्युला पर आधारित होते हैं। इसी आधार पर सवालों को हल करना होता है। हर प्रश्न के चार विकल्प होते हैं। इसमें अर्थमैटिक्स , पर्सेंटेज़ , प्रॉफि़ट एंड लॉस , सिंपल एंड कंपाउंड इंटरेस्ट , स्पीड व डिस्टेंट वगैरह पर सवाल होते हैं। लेवल की बात करें , तो कुछ टॉपिक 12 वीं स्तर तक के भी होते हैं। 

रिज़निंग
इसमें कोडिंग एंड डीकोडिंग , डायरेक्शन सेंस , रीजन एंड एसरशन , ब्लड रिलेशन , स्टेटमेंट कनक्लूजन , एनालिटिकल रिज़निंग आदि टॉपिक्स पर सवाल पूछे जाते हैं। 

डेटा इंटरप्रेटेशन
इसमें टेबल , बार ग्राफ , लाइन ग्राफ , पाई चार्ट , डेटा सफिशिएंस के टॉपिक्स आते हैं। 

लैंग्वेज़ 
इसमें रीडिंग कॉम्प्रिहेन्शन , पैरा जंबल , ग्रामर आदि से संबंधित प्रश्न आते हैं(नभाटा,दिल्ली,30.5.12) ।


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डीयू के नामी कॉलेज

दिल्ली विश्वविद्यालय की पहचान उसके कॉलेजों और विभागों से हैं। दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में फैले इनके कुछ कॉलेजों का इतिहास जितना पुराना है, उतना विश्वविद्यालय का भी नहीं है। विश्वविद्यालय की स्थापना 90 साल पहले 1922 में हुई, पर जाकिर हुसैन, हिन्दू और स्टीफंस कॉलेज एक शिक्षण संस्थान के रूप में इससे पहले से अपनी पहचान कायम किए हुए हैं। 77 कॉलेजों में स्नातक स्तर के विभिन्न कोर्सेज छात्रों में करियर की मजबूत नींव तैयार करते हैं। ऐसे में जरूरत है उन कॉलेजों को जानने की, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के आधार स्तम्भ रहे हैं। 

स्टीफंस कॉलेज 
स्टीफंस कॉलेज का इतिहास करीब 130 साल पुराना है। उन्नीसवीं शताब्दी के आठवें दशक में स्थापित इस कॉलेज ने आजादी के दौर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यहां इतिहास, अंग्रेजी ऑनर्स, दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र, भौतिकी और रसायनशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों के विभागों ने पढ़ाई के मामले में छात्रों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है। एक समय कहा जाता था कि इस कॉलेज में इतिहास ऑनर्स में दाखिला मिल गया, समझो आईएएस बन गए। 
आज भी देश में राजनीति हो या नौकरशाही या फिर मीडिया जगत, यहां के कई पुराने छात्र शीर्ष पर कायम हैं। संसद भवन में विभिन्न जगहों से जीत कर आए करीब दर्जन भर सांसद इसी कॉलेज के छात्र रहे हैं। आईएएस और आईपीएस की लिस्ट काफी लंबी है। केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, संदीप दीक्षित, शशि थरूर, अरुण शौरी, मुख्य चुनाव आयुक्त वाईएस कुरैशी जैसी कई हस्तियों के नाम इस कॉलेज से जुड़े हुए हैं। बेहतर संसाधन, नियमित पढ़ाई और बेहतर शैक्षिक माहौल छात्रों को कुछ करने के लिए प्रेरित करता है। 

हिन्दू कॉलेज 
करीब 114 साल पुराना यह संस्थान छात्रों के बीच आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स और सोशल साइंस विषयों की पढ़ाई के लिए जाना जाता रहा है। यहां अंग्रेजी ऑनर्स, इतिहास, समाजशास्त्र, हिन्दी, राजनीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे कई विभाग खासे लोकप्रिय हैं। साइंस में लाइफ साइंस और फिजिकल साइंस, दोनों विषय अपनी अलग पहचान कायम किए हुए हैं। कॉलेज में अनुशासन, बेहतर शैक्षणिक माहौल और विभिन्न तरह की सोसायटीज छात्रों के व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। क्रिकेट में गौतम गंभीर, अजय जडेजा, सबा करीम तो फिल्म में अजरुन रामपाल, विशाल भारद्वाज, इम्तियाज अली जैसे कई पुराने छात्र यहां की पहचान हैं। 

एसआरसीसी
कॉमर्स की शिक्षा के लिए देशभर में प्रतिष्ठित यह कॉलेज अपनी विशेष पहचान कायम किए हुए है। यहां कॉमर्स और अर्थशास्त्र की पढ़ाई के लिए देशभर से छात्र आते हैं। बड़ी फैकल्टी और विभाग छात्रों को आपसी प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता के लिए प्रेरित करते हैं। इस कॉलेज में इन दोनों कोर्स ने व्यवसाय जगत से लेकर राजनीति जगत तक कई हस्तियां दी हैं। भाजपा नेता अरुण जेटली, विजय गोयल, फिल्म निर्माता राकेश ओमप्रकाश मेहरा, नैसकॉम चेयरमैन प्रमोद भसीन आदि यहां के पुराने छात्र रहे हैं। 

मिरांडा हाउस
लडकियों के बीच आधुनिक शिक्षा के लिए यह कॉलेज 1948 से अपनी अलग पहचान बनाता रहा है। चाहे अंग्रेजी की पढ़ाई हो या फिर इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, दर्शनशास्त्र और भूगोल, कॉलेज के विभिन्न विभाग छात्रों के बीच अपनी विशेष छाप छोड़ते रहे हैं। यहां साइंस की भी पढ़ाई होती है। भौतिकी, रसायनशास्त्र, बॉटनी और जूलॉजी ऑनर्स भी साइंस की मजबूत नींव प्रदान करते हैं। कॉलेज की नाट्य सोसायटी और वाद-विवाद समिति छात्रओं के व्यक्तित्व विकास में अहम् भूमिका निभाते रहे हैं। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित हों या फिर कम्युनिस्ट नेता वृंदा करात, फिल्म अभिनेत्री नंदिता दास हों या लेखिका उर्वशी बूटालिया, इस कॉलेज की पहचान हैं। 

किरोड़ीमल कॉलेज (केएमसी)
आजादी के समय स्थापित यह कॉलेज छात्रों के संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास में उन्मुक्त माहौल प्रदान करता है। इसे बिग बी के कॉलेज के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि अमिताभ बच्चन ने एक दौर में यहां पढ़ाई की थी। कॉलेज की नाट्य सोसायटी कई छात्रों को अपने यहां अभिनेता और रंगमंच पर पहचान दिलाने में भूमिका निभाती रही है। यहां साइंस, आर्ट्स और सोशल साइंस, तीनों तरह के विषयों की पढ़ाई होती है। बच्चन के अलावा फिल्म उद्योग में सतीश कौशिक, सिंगर केके और राजनीति में नवीन पटनायक, मदनलाल खुराना आदि यहां के पुराने छात्र रहे हैं। 

इंद्रप्रस्थ कॉलेज
कैम्पस के कॉलेजों में आजादी की लड़ाई के समय से ही इंद्रप्रस्थ कॉलेज लड़कियों की शिक्षा के लिए विशेष तौर पर जाना जाता रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय में यह लड़कियों का सबसे पुराना कॉलेज है, जहां मुख्य रूप से अंग्रेजी, हिन्दी ऑनर्स, दर्शनशास्त्र, इतिहास, राजनीतिशास्त्र, मनोविज्ञान जैसे विभाग विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। 
लड़कियों के व्यक्तित्व विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के कारण ही यहां की छात्रएं देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमा रही हैं। राजनीति में अंबिका सोनी हों या प्रशासन में उत्तराखंड की पहली महिला पुलिस महानिदेशक किरण चौधरी और फिल्म निर्माता कविता चौधरी यहां की छात्र रही हैं।

हंसराज कॉलेज
डीएवी ट्रस्ट की ओर से अपने संस्थापक के नाम पर स्थापित यह कॉलेज करीब 60 साल से शिक्षा जगत में अपनी अलग पहचान बनाता रहा है। यहां आर्ट्स, साइंस और सोशल साइंस, तीनों विषयों की पढ़ाई होती है। कॉलेज में साइंस और कॉमर्स जैसे विभाग खासे सुदृढ़ हैं। भौतिकी, रसायनशास्त्र और कंप्यूटर साइंस जैसे विभाग यहां छात्रों के बीच अपनी अलग छाप छोड़ते रहे हैं। संस्थान की पहचान इसके छात्रों से भी होती रही है। फिल्म जगत में शाहरुख खान, प्रवीण डबास, सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम और सांसद नवीन जिन्दल यहां के छात्र रहे हैं। 

रामजस कॉलेज
नॉर्थ कैम्पस के इस कॉलेज में आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स और सोशल साइंस जैसे विविध विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। करीब 60 साल पुराना यह कॉलेज छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए खुला माहौल प्रदान करता है। पढ़ाई-लिखाई में बंदिशें न होने के कारण ही यहां के छात्र कई मौकों पर अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। यहां भौतिकी के छात्र रहे प्रकाश झा आज एक सफल फिल्म निर्देशक व निर्माता हैं। फिल्म अभिनेता मनोज वाजपेयी भी इसी कॉलेज के छात्र रहे हैं। 

दौलतराम कॉलेज
1960 में स्थापित इस संस्थान को पहले प्रमिला कॉलेज के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसके संस्थापक दौलतराम के नाम पर इसका नामकरण किया गया। इसमें आर्ट्स और कॉमर्स के अलावा साइंस की पढ़ाई भी कराई जाती है। खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए कई सोसायटी सक्रिय हैं, जिनमें वुमंस डेवलपमेंट सेंटर, एनएसएस और एनसीसी प्रमुख हैं। कैम्पस में यह लड़कियों का ऐसा कॉलेज है, जहां लाइफ साइंस और उससे जुड़े विषयों में ऑनर्स कोर्स की पढ़ाई होती है, चाहे वह जूलॉजी हो या बॉटनी। 

एलएसआर
दक्षिणी दिल्ली में पढ़ाई के कारण लड़कियों के जिस कॉलेज को सबसे अधिक ख्याति मिलती रही है, उनमें एलएसआर सबसे ऊपर है। कॉलेज के अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीतिशास्त्र, बीकॉम ऑनर्स, दर्शनशास्त्र, समाजशास्त्र और मनोविज्ञान जैसे विभाग अपनी पढ़ाई के लिए विशेष तौर पर जाने जाते हैं। कॉलेज प्रोफेशनल कोर्स के रूप में लड़कियों के लिए बीएलएड और अंग्रेजी पत्रकारिता का कोर्स भी चलाता है। यहां की वाद-विवाद समिति लड़कियों को विश्वविद्यालय स्तर पर अलग पहचान दिलाती रही है। इसने महिला नौकरशाहों और प्रबंधकों की एक बड़ी जमात पैदा की है। 

वेंकटेश्वर कॉलेज
कॉलेज में वैसे तो आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स और सोशल साइंस जैसे सभी विषयों की पढ़ाई होती है, पर यहां की पहचान साइंस के वे विभिन्न कोर्स हैं, जहां छात्रों में रिसर्च कार्य को बढ़ावा दिया जाता है। बेहतरीन लैब और पढ़ाई के लिए अनुशासित माहौल छात्रों को सदा आकर्षित करता रहा है। 

जीसस एंड मैरी
चाणक्यपुरी स्थित यह कॉलेज ट्रस्ट द्वारा संचालित है। इसमें लड़कियों को आधुनिक शिक्षा प्रदान करने के लिए माहौल प्रदान किया जाता है। यहां मुख्य रूप से आर्ट्स और साइंस की पढ़ाई कराई जाती है। अंग्रेजी, हिन्दी, इतिहास, मनोविज्ञान, राजनीतिशास्त्र के अलावा प्रोफेशनल कोर्स के रूप में बीएलएड की भी पढ़ाई होती है। छात्रओं के लिए बीकॉम ऑनर्स का भी कोर्स चल रहा है। स्टीफंस कॉलेज की तरह यहां भी विश्वविद्यालय से हट कर दाखिला प्रक्रिया अपनाई जाती है। 

गार्गी
अतीत की प्रेरक हस्तियों को ध्यान में रख कर देश में महिलाओं के भविष्य निर्माण के लिए दक्षिणी दिल्ली में 1967 में एक और कॉलेज खुला, जिसका नाम रखा गया गार्गी कॉलेज। यह संस्थान छात्रओं को आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस के विभिन्न विषयों की पढ़ाई कराता है। दक्षिणी दिल्ली की लड़कियों को इसमें साइंस में एप्लाइड और पारंपरिक साइंस, दोनों तरह के विकल्प पढ़ने को मिल रहे हैं। 
साइंस की पढ़ाई के लिए गार्गी कॉलेज आज एक महत्वपूर्ण संस्थान बन गया है। एप्लाइड मनोविज्ञान, अंग्रेजी, हिन्दी, इतिहास, दर्शनशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, संस्कृत, बीए, बीकॉम, बिजनेस इकोनॉमिक्स, बीएलएड, बीएससी लाइफ साइंस, फिजिकल साइंस, बॉटनी, कैमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, भौतिकी और जूलॉजी विषयों की भी पढ़ाई यहां करवाई जाती है(हिंदुस्तान,दिल्ली,30.5.12)।

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डीयू में एसओएल से कॉलेजों में नहीं होगा माइग्रेशन

दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्राचार की पढ़ाई करने वाले छात्रों को अब रेगुलर कॉलेज में जाने का दरवाजा बंद हो सकता है। सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के बाद शैक्षणिक सत्र 2012-13 में स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग(एसओएल) के छात्रों को कॉलेज बदलने में तकनीकी दिक्कत आएगी। क्योंकि सेमेस्टर सिस्टम के तहत जहां कॉलेजों में कोर्स छह माह के भीतर पूरा किया जा रहा है, वहीं एसओएल में वार्षिक माध्यम के तहत साल भर के बाद ही कोर्स समाप्त करने की सुविधा है। 

डीयू में माइग्रेशन दूसरे साल में होता है। दरअसल, पिछले साल सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया था। जिसके बाद अब रेगुलर कॉलेज में दूसरे साल की पढ़ाई करने वाले छात्र भी सेमेस्टर सिस्टम के तहत पढ़ाई करेंगे। मालूम हो कि डीयू के स्कूल ऑफ ओपन लर्निग (एसओएल) और नॉन कालेजिएट कॉलेजों में अभी भी वार्षिक मोड के तहत ही पढ़ाई होती है। कॉलेजों का सिलेबस सेमेस्टर सिस्टम के तहत तैयार किया गया है। जबकि एसओएल और नॉन कालेजिएट कॉलेजों का सिलेबस वार्षिक सिस्टम के तहत है। इसके अलावा एसओएल में आंतरिक आंकलन नहीं होता है। जबकि रेगुलर कॉलेजों में छात्रों को आंतरिक आंकलन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। जानकारों की माने तो एसओएल और नॉन कॉलेजिएट में दाखिला लेने वाले छात्र और छात्राओं के लिए माइग्रेशन की कोई नई व्यवस्था बनानी पड़ेगी। 

इस संबंध में डीयू के डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. जे.एम. खुराना का कहना है कि इन दिक्कतों को दूर करने के लिए नीति बनाने पर विचार किया जाएगा। हालांकि माइग्रेशन पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गौरतलब है कि हर साल रेगुलर कॉलेजों में दाखिला नहीं मिलने की स्थिति में अधिकांश छात्र एसओएल में दाखिला ले लेते हैं और दूसरे साल वे माइग्रेशन लेकर किसी रेगुलर कॉलेज में चले आते हैं। लेकिन पिछले साल एसओएल में दाखिला लेने वाले छात्रों को इस साल माइग्रेशन की परेशानी सताने लगी है। 

ऐसी होगी प्रक्रिया 
दूसरे वर्ष की पढ़ाई करने वाले छात्र अगर एसओएल से रेगुलर कॉलेज या एक रेगुलर कॉलेज से दूसरे कॉलेज में जाना चाहते है, तो उन्हें सबसे पहले जहां जाना चाहते हैं। उस कॉलेज से एनओसी लेनी होती है। इस एनओसी के आधार पर वर्तमान कॉलेज या एसओएल से माइग्रेशन प्रमाण पत्र मिलता है(जयप्रकाश मिश्र,हिंदुस्तान,दिल्ली,28.5.12)।



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डीयू के खास कोर्स

दिल्ली विश्वविद्यालय की पहचान उसकी शिक्षा की गुणवत्ता और यहां पढ़ाए जा रहे कोर्सेज से है, जो देशभर से आए छात्रों को आगे बढ़ने का मौका देते हैं। यहां 86 विभागों और 16 फैकल्टी के जरिए परम्परागत और नए, दोनों तरह के कोर्स चलाए जा रहे हैं। साइंस में जहां एक ओर बेसिक साइंस से जुड़े कोर्स छात्रों को आकर्षित करते हैं, वहीं इंटरडिसिप्लिनरी और प्रोफेशनल कोर्स भी नए स्वरूप में मौजूद हैं। कॉमर्स का भी यही हाल है। इसमें भी रोजगार की राह दिखाने वाले कई ऐसे कोर्स चलाए जा रहे हैं, जो परम्परागत बीकॉम और बीकॉम ऑनर्स से हट कर हैं। आर्ट्स और समाज विज्ञान से भी ऐसे कोर्स जुड़े हैं, जो विभिन्न वर्ग से आए छात्रों को अपनी ओर खींचते हैं। स्नातक स्तर पर दाखिला लेने से पहले विश्वविद्यालय में चल रहे कोर्सेज के स्वरूपों को जानना जरूरी है।

साइंस के परम्परागत ऑनर्स कोर्स 
बेसिक साइंस में भौतिकी, रसायनशास्त्र, भूगर्भ विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणिविज्ञान यानी जूलॉजी में ऑनर्स कोर्स ज्यादातर कॉलेजों में चलाए जा रहे हैं। 12वीं में लाइफ या मेडिकल साइंस की पृष्ठभूमि वाले छात्रों को जहां प्राणिविज्ञान या वनस्पति विज्ञान का कोर्स कॉलेजों में पढ़ने को मिल रहा है, वहीं फिजिकल साइंस के छात्रों को भौतिकी, रसायनशास्त्र, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन, गणित, सांख्यिकी, ऑपरेशनल रिसर्च, भूगर्भ विज्ञान और एंथ्रोपोलॉजी जैसे कोर्स करवाए जाते हैं। यहां माइक्रोबायोलॉजी का कोर्स भी पांच कॉलेजों में खासा लोकप्रिय है। ऑनर्स कोर्स में एप्लाइड साइंस के तहत इंस्ट्रुमेंटेशन और फूड टेक्नोलॉजी की पढ़ाई कई कॉलेजों में होती है। 

जनरल साइंस 
छात्रों को जनरल साइंस के रूप में विभिन्न कॉलेजों में तरह-तरह के कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं। जो छात्र उच्च शिक्षा या रिसर्च की ओर नहीं जाना चाहते, सिर्फ साइंस ग्रेजुएट बन कर रोजगार के बाजार में उतरना चाहते हैं, उनके लिए यहां लाइफ साइंस और फिजिकल साइंस में अलग-अलग ग्रुप बना कर कई तरह के कोर्स चलाए जा रहे हैं। देश के अन्य विश्वविद्यालयों में इतनी विविधता शायद ही देखने को मिले। इस तरह के कोर्स में यहां बीएससी इन लाइफ साइंस है। इसका विस्तार करते हुए कई कॉलेजों में बीएससी इन एप्लाइड लाइफ साइंस की भी पढ़ाई कराई जाती है। 

फिजिकल साइंस की कड़ी में बीएससी इन फिजिकल साइंस तो है ही, इसके अलावा बीएससी इन एप्लाइड फिजिकल साइंस भी है। इसमें कहीं-कहीं इंडस्ट्रियल कैमिस्ट्री के पेपर को जोड़ कर एक नई तरह का कोर्स तैयार किया गया है, जिसे नाम दिया गया है एप्लाइड फिजिकल साइंस विद इंडस्ट्रियल कैमिस्ट्री। गणित के छात्रों के लिए बीएससी जनरल इन मैथेमैटिकल साइंस का भी कोर्स है। 

इंटरडिसिप्लिनरी साइंस 
साइंस में भी अलग-अलग विषयों को मिला कर कई नए तरह के कोर्स तैयार किए गये हैं, जिनमें कहीं बायोकैमिस्ट्री है तो कहीं बायोमेडिकल साइंस और बायोलॉजिकल साइंस। वेंकटेश्वर कॉलेज में जहां बायोलॉजिकल साइंस का कोर्स चल रहा है, वहीं आचार्य नरेन्द्रदेव, भास्कराचार्य और शहीद राजगुरु कॉलेज में बायोमेडिकल साइंस का कोर्स करवाया जा रहा है। पांच कॉलेज जहां बायोकैमिस्ट्री के रूप में इंटरडिसिप्लनरी कोर्स चला रहे हैं, वहीं एक कॉलेज पॉलिमर साइंस पढ़ा रहा है। 

बीसीए की जगह बीएससी कंप्यूटर साइंस 
देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में बीसीए यानी बैचलर इन कंप्यूटर एप्लिकेशन का कोर्स चलाया जा रहा है, लेकिन डीयू में इसकी जगह 15 कॉलेजों में बीएससी ऑनर्स इन कंप्यूटर साइंस का कोर्स चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो रोजगार और ज्ञान के स्तर पर कंप्यूटर साइंस ऑनर्स बीसीए जैसे कोर्स से बेहतर है। इस कोर्स को करने वाले छात्र एमसीए भी कर सकते हैं या कंप्यूटर इंडस्ट्री में स्नातक की डिग्री के बाद रोजगार तलाश सकते हैं। बीएससी कंप्यूटर साइंस वाले छात्रों को आगे बढ़ाने या उच्च शिक्षा के लिए यहां एमसीए यानी मास्टर इन कंप्यूटर एप्लिकेशन का कोर्स भी कंप्यूटर साइंस विभाग में चलाया जा रहा है, जिसमें देशभर के छात्रों को प्रवेश परीक्षा के जरिए दाखिले का मौका मिलता है। 

बीएएससी फूड टेक्नोलॉजी 
फूड टेक्नोलॉजी एक उभरता हुआ क्षेत्र है। फूड का संरक्षण किस तरह करें, उसे उपभोक्ता तक कैसे पहुंचाएं, फूड को बरबादी से बचाने और उसकी पैकेजिंग आदि की विधि इसमें बतायी जाती है। एप्लाइड साइंस के रूप में यह कोर्स भास्कराचार्य और राजगुरु कॉलेज में विशेष तौर पर चलाया जा रहा है। 

पॉलिमर साइंस 
यह कैमिस्ट्री की एप्लाइड ब्रांच है। इसमें पॉलिमर, पॉलिमर क्लॉथ, ऑप्टिकल फाइबर आदि के कैमिकल कंपोजिशन की जानकारी, उसे बनाने की विधि आदि के बारे में बताया जाता है। उद्योगों में बतौर ट्रेनिंग इंजीनियर के रूप में करियर की शुरुआत की जा सकती है। इसकी पढ़ाई भास्कराचार्य कॉलेज में होती है। 

बीएससी एग्रो कैमिकल एंड पेस्ट कंट्रोल 
स्पेशलाइज्ड कोर्स के रूप में इस कोर्स के तहत छात्रों को कीट की पहचान व उससे बचाव की अलग-अलग विधियों से भी रूबरू कराया जाता है। साथ ही प्रदूषण पर कैसे लगाम लगाई जाए, इसकी जानकारी दी जाती है। स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज में इस स्पेशलाइज्ड कोर्स में दाखिला जून में 12वीं की मेरिट के आधार पर होता है। आवेदक बारहवीं कक्षा में भौतिकी, रसायनशास्त्र, बायोलॉजी व कोई एक भाषा के साथ उत्तीर्ण होना चाहिए। 

एमएससी इंटिग्रेटेड इन अर्थ साइंस 
दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर ही छात्रों को इंटिग्रेटेड कोर्स में दाखिला पाने का मौका मिलेगा। भूगर्भ विभाग ने पांच वर्षीय कोर्स एमएससी इंटिग्रेटेड इन अर्थ साइंस शुरू किया है। आईआईटी जेईई में बैठने वाले छात्रों को मेरिट के हिसाब से यहां दाखिला दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर सीटें बची रहती हैं तो 12वीं बोर्ड परीक्षा में न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले छात्रों को भी मेरिट के आधार पर दाखिला दिया जाएगा। इस कोर्स के लिए 25 सीटें हैं। कोर्स पूरा करने पर बीएससी और एमएससी, दोनों की डिग्री इसके तहत मिलेगी। यह कोर्स मुख्य तौर पर चार पार्ट का कॉम्बिनेशन है, जिसमें जियोलॉजी, मरीन साइंस, जियोफिजिक्स और मौसम विज्ञान शामिल है। 

इंस्ट्रुमेंटेशन 
विज्ञान तथा रिसर्च में जो इंस्ट्रुमेंट इस्तेमाल में लाए जाते हैं, उनका गहन अध्ययन इस कोर्स के तहत होता है। यह कोर्स दिल्ली में राजगुरु तथा भास्कराचार्य कॉलेज में है। दाखिला 12वीं की मेरिट के आधार पर होता है। 

बायोमेडिकल साइंस 
यह कोर्स बायोलॉजी, मॉडर्न मेडिकल साइंस, बायो टेक्नोलॉजी, जेनेटिक्स, टॉक्सीकोलॉजी, फार्मोकोलॉजी आदि का कॉम्बिनेशन है। इसके विशेषज्ञों का इस्तेमाल फार्मेसी, लैब, मेडिकल इंडस्ट्री तथा रिसर्च आदि के क्षेत्र में होता है। इस कोर्स को करने के बाद छात्रों को मास्टर स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी, बायोमेडिकल, जेनेटिक्स, जीनोमिक्स आदि में दाखिला मिल जाता है। 

इंडस्ट्रियल कैमिस्ट्री 
इसमें पहले वर्ष में साइंस के अन्य कोर्स की तरह ही फाउंडेशन कोर्स कराया जाता है। अगले दो वर्ष में इंडस्ट्रियल कैमिस्ट्री की पढ़ाई होती है। दिल्ली विश्वविद्यालय में इसकी पढ़ाई दो कॉलेजों, एआरएसडी और देशबंधु में होती है। इंडस्टियल कैमिस्ट्री और प्रोडक्शन कैमिस्ट्री के रूप में यह काम करने का अलग अवसर मुहैया कराता है। 

बायोकैमिस्ट्री 
इंटरडिसिप्लिनरी के रूप में विकसित यह कोर्स कैमिस्ट्री और बायो का कॉम्बिनेशन है। इसके विशेषज्ञों की मांग आज प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बतौर अध्यापक तथा रिसर्च एंड डेवलपमेंट क्षेत्र में है। यह कोर्स पांच कॉलेजों में है, जिनमें दौलतराम, देशबंधु, शिवाजी, वेंकटेश्वर और इंस्टीटय़ूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स शामिल हैं। 

बायोलॉजिकल साइंस 
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की पहल पर यह कोर्स वेंकटेश्वर कॉलेज ने अपने छात्रों के लिए विशेष तौर पर तैयार किया है। यह कैमिस्ट्री, बायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, कंप्यूटर तथा बायोइंफोर्मेटिक्स आदि का कॉम्बिनेशन है। इसकी मांग विभिन्न रिसर्च क्षेत्रों में है और आगे चल कर बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी करियर बनाया जा सकता है। 

माइक्रोबायोलॉजी 
इसमें बैक्टीरिया, वायरस, फफूंदी आदि के पॉजिटिव तथा निगेटिव पहलू के बारे में अध्ययन किया जाता है। माइक्रो ऑर्गेनिज्म के बारे में बताया जाता है। माइक्रो बायोलॉजिस्ट के रूप में करियर के अलावा रिसर्च के क्षेत्र में भी इससे संबंधित ढेरों अवसर हैं। 

आर्ट्स के कोर्स बीएलएड 
प्राइमरी और सीनियर सेकंडरी स्कूल में शिक्षक बनने के लिए अलग-अलग तरह की ट्रेनिंग और कोर्स की जरूरत पड़ती है। कहीं दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स है तो कहीं एलिमेंटरी टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स। इन सबसे हट कर दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने यहां चार वर्षीय बैचलर ऑफ एलिमेंटरी एजुकेशन का कोर्स तैयार किया है। इस कोर्स में छात्रों को बीए यानी स्नातक की डिग्री के साथ-साथ टीचर्स ट्रेनिंग की डिग्री भी दी जाती है। इसे करने के बाद वह देश-विदेश के किसी भी सरकारी या गैर सरकारी स्कूल में आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाने के योग्य हो जाते हैं। खास बात यह कि बीएलएड का कोर्स दिल्ली विश्वविद्यालय में सिर्फ लड़कियों के लिए चलाया गया है। आठ कॉलेजों में लड़कियों को दाखिले का मौका मिलता है। दाखिले के लिए 12वीं पास छात्रओं को प्रवेश परीक्षा देनी होती है। यह कोर्स लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी, जीसस एंड मैरी, मिरांडा हाउस, माता सुन्दरी, अदिति महाविद्यालय और इंस्टीटय़ूट ऑफ इकोनॉमिक्स में कराया जा रहा है। 

बीए वोकेशनल
इस नाम से कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज में पांच कोर्स चलते हैं। बीए वोकेशनल के तहत इस कॉलेज में मैटीरियल मैनेजमेंट, टूरिज्म, ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन एंड सेक्टेरियल प्रैक्टिस, मैनेजमेंट एंड मार्केटिंग, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइज, ह्यूमन रिसोर्स मैनजमेंट एंड मार्केटिंग मैनेजमेंट एंड रिटेल बिजनेस जैसे कोर्स भी चल रहे हैं। 

बीएमएमएमसी 
मीडिया से जुड़े कोर्सो की आज सरकारी और गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों में बाढ़-सी आ गई है। इन सबके बीच ही इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमन ने दस साल पहले बैचलर ऑफ मास मीडिया एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स तैयार किया था। इसका पाठयक्रम विश्वविद्यालय में हिन्दी और अंग्रेजी पत्रकारिता के अन्य कोर्सेज से अलग है। 

बीए इन फॉरेन लैंग्वेज 
जर्मन, स्पैनिश, इटैलियन, फ्रैंच में कोर्स दस साल पहले शुरू किया गया था। कोर्स छात्रों को चार विदेशी भाषाओं में अलग-अलग रूप से प्रशिक्षित करता है। तीन साल तक इन भाषाओं की संस्कृति व ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी दी जाती है। 12वीं में महज 45 प्रतिशत अंक होने पर भी इसकी प्रवेश परीक्षा में बैठने दिया जाता है। 

बीटेक/बीएस इन इनोवेशन विद मैथ्स व आईटी 
दिल्ली विश्वविद्यालय ने पिछले साल नए तरह का कोर्स बीएससी, बीटेक इन मैथ्स विद इनोवेशन चलाया था। इसमें छात्रों को प्रयोग आधारित नए तरह के विषय और पेपर पढ़ाए जा रहे हैं। इस साल से बीटेक इन ह्यूमेनिटीज का कोर्स भी चलाने की तैयारी है। जल्द ही इसमें दाखिले के कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। बारहवीं के छात्रों को दाखिला प्रवेश परीक्षा के आधार पर मिलेगा। 

कॉमर्स के कोर्स 
कॉमर्स में आज परम्परागत रूप से चल रहे बीकॉम ऑनर्स और बीकॉम प्रोग्राम, दोनों तरह के कोर्स ज्यादातर कॉलेजों में चलाए जा रहे हैं। नामचीन कॉलेज चाहे वह श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स हो, लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमन, हिन्दू हो या हंसराज, यहां बीकॉम ऑनर्स को प्रमुख रूप से चलाया जा रहा है। शहीद भगत सिंह, एसजीटीबी खालसा, पीजीडीएवी और गुरु गोबिन्द सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स में भी बीकॉम ऑनर्स का बड़ा विभाग है। इसमें छात्रों के लिए एक ही कोर्स में अलग-अलग सेक्शन बने हुए हैं। जो छात्र उच्च शिक्षा में नहीं जाना चाहते, स्नातक स्तर पर कॉमर्स का सामान्य ज्ञान लेकर रोजगार करना चाहते हैं, उनके लिए बीकॉम प्रोग्राम का भी कोर्स प्रमुखता से चलाया जा रहा है(हिंदुस्तान,दिल्ली,29.5.12)।

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हिमाचल राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षा के लिए उम्र सीमा बढ़कर 35 हुई

एचएएस (हिमाचल प्रशासनिक सेवा) के लिए सरकार ने 5 साल आयु सीमा बढ़ा दी है। इस निर्णय से 30 साल की उम्र पार कर चुके हजारों प्रतिभागी प्रशासनिक परीक्षा में भाग ले पाएंगे। अब 21 साल से लेकर 35 साल की आयु तक वाले प्रतिभागी एचएएस परीक्षा में बैठ सकेंगे। सरकारी नौकरी कर रहे कर्मचारियों को एचएएस परीक्षा देने का अवसर 42 साल तक प्राप्त होगा। अफसर बनने का मौका युवाओं व सरकारी कर्मचारियों को 2014 तक मिलेगा। हर साल एचएएस परीक्षा के 15 से 20 पदों के लिए करीब 25 हजार अभ्यर्थी भाग्य आजमाने के लिए बैठते हैं। 

2014 तक मिलेगा मौका 
राज्य लोक सेवा आयोग ने एचएएस के लिए आयु सीमा संशोधित की है। सामान्य श्रेणी के लिए अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष से बढ़ाकर 35 वर्ष कर दी है। इसके अतिरिक्त एससी, एसटी, ओबीसी व दूसरे आरक्षित वर्गो के लिए आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट प्राप्त होगी। सरकारी व सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारियों को एचएएस परीक्षा देने के लिए आयु सीमा 42 वर्ष रहेगी। 

कोर्ट गए थे सुभाष चौहान 
इस साल के शुरू में एचएएस की आयु सीमा घटाए जाने से परीक्षा से वंचित रहने वाले सुभाष चौहान व अन्य उम्मीदवारों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। संशोधित नियुक्ति और भर्ती नियमों में संशोधन किया। अभी सरकार ने एक बार फिर से नियमों में संशोधन किया और उम्र को 30 से 35 वर्ष तक के लिए आगे बढ़ा दिया। अब आरएमपी नियमों में संशोधन होने से एचएएस परीक्षा के लिए पुराना पैटर्न रहेगा। 

ओवरएज होने वालों को हुआ फायदा  
राज्य लोक सेवा आयोग के सचिव मोहन चौहान ने कहा कि आरएमपी नियमों में संशोधन के बाद 35 वर्ष की आयु तक प्रतिभागी परीक्षा में बैठ सकेंगे। सरकारी कर्मचारियों को यह सुविधा 42 साल तक मिलेगी। एचएएस के लिए आयु सीमा का लाभ 2014 तक प्राप्त होगा। 

दो साल का नुकसान 
अफसर बनने का सपना संजोने वाले प्रतिभागियों को आयु सीमा घटने-बढ़ने के झमेले में दो साल का नुकसान उठाना पड़ा है। आयु सीमा कम करने की अधिसूचना अप्रैल 2011 में हुई थी। जबकि, 31 दिसंबर 2010 को लोक सेवा आयोग ने इस मामले को विज्ञापित किया था। परीक्षा की तैयारी करने वाले प्रतिभागी परीक्षा में नहीं बैठ पाए। अब एक साल का नुकसान फिर से हुआ है(प्रकाश भारद्वाज,दैनिक भास्कर,शिमला,31.5.12)।

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राजस्थानःसीटेट बीएडधारी दे सकते हैं शिक्षक भर्ती परीक्षा!

हाईकोर्ट ने सी टेट पास बीएड धारी अभ्यर्थी को थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के द्वितीय लेवल में बैठने के योग्य मानते हुए प्रवेश के अंतरिम आदेश जारी किए हैं। यह आदेश न्यायाधीश गोविंद माथुर ने रातानाडा जोधपुर निवासी प्रार्थी प्रीतम शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई में दिए। 

अदालत में याचिका कर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हनुमानसिंह चौधरी व प्रेमेन्द्र बोहरा ने कहा कि राज्य सरकार ने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए जो विज्ञप्ति जारी की थी उसमें सी टेट पास बीएड धारकों की योग्यता का कहीं जिक्र नहीं किया गया था। 

इसी से व्यथित होकर अदालत में याचिकाएं दायर की गई। उन्होंने कहा कि एनसीटीई की ओर से 17 फरवरी 2011 को जारी टेट कं डक्टिंग गाइडलाइन्स के क्लॉज 10 बी व सी में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि किसी वर्ष में राज्य सरकार टेट आयोजित नहीं करती है तो अध्यापक भर्ती परीक्षा में सी टेट पास अभ्यर्थी योग्य माने जाएंगे। 

उन्होंने कहा कि एनसीआरटी व राज्य शिक्षा बोर्ड का सिलेबस भी एक सा ही है। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायती राज ग्रामीण विकास के सर्कुलर 11 मई 2011 के अनुसार अनुकंपा पर नियुक्ति में भी सी टेट धारी मान्य हैं(रामेश्वर बोहरा,दैनिक भास्कर,जोधपुर,31.5.12)।

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30 मई 2012

राजस्थानःबीएड धारक-टेट उत्तीर्ण को लेवल वन भर्ती परीक्षा में प्रवेश देने के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने विशेष बीएड धारक तथा आरटेट के लेवल प्रथम व द्वितीय में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को 2 जून को आयोजित होने वाली तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा के लेवल वन में अंतरिम प्रवेश देने के आदेश दिए हैं।

यह आदेश न्यायाधीश गोविंद माथुर ने प्रार्थिया नीलम राजपुरोहित व 9 अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के तहत दिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता डॉ. पीएस भाटी व डॉ. नुपूर भाटी ने कहा कि याचिकाकर्ता विशेष बीएड के साथ ही आरटेट के दोनों लेवल उत्तीर्ण हैं। 

उनको 2 जून को आयोजित होने वाली तृतीय श्रेणी लेवल प्रथम की भर्ती परीक्षा में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना के क्लॉज 3 बी में कहा गया है कि स्पेशल बीएड धारक भी प्रारंभिक शिक्षा के लिए योग्य हैं, लेकिन उनको इस लेवल में नियुक्ति दिए जाने के छह माह में प्रारंभिक शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रावधान होने के बावजूद सरकार याचिकाकर्ताओं को कैसे मना कर सकती है। इस पर अदालत ने सीईओ जिला परिषद व परीक्षा समन्वयक के नाम अंतरिम आदेश जारी करते हुए याचिकाकर्ताओं को 2 जून को आयोजित परीक्षा में अंतरिम प्रवेश देने के आदेश दिए(दैनिक भास्कर,जोधपुर,30.5.12)।

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ग्वालियरःऑनलाइन एडमिशन के लिए मोबाइल नंबर जरुरी

कॉलेज में ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया के लिए मोबाइल नंबर होना जरूरी है। बिना मोबाइल नंबर के छात्र न रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे और न ही कॉलेज लॉक कर सकेंगे। इतना ही नहीं एक छात्र एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग कर सकता है। यदि किसी परिवार में एक मोबाइल नंबर है और एडमिशन के लिए दो छात्र ऑनलाइन आवेदन करते हैं तो उन्हें दूसरे मोबाइल नंबर की जानकारी देनी होगी। विभाग ने मोबाइल नंबर की अनिवार्यता इसलिए रखी है, क्योंकि छात्रों को इस बार एडमिशन की जानकारी एसएमएस के माध्यम से मिलेगी।

यूजी(स्नातक) में एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले छात्र अधिकतम नौ कॉलेजों का चयन कर सकते हैं। छात्रों को प्रति कॉलेज के हिसाब से 50 रुपए रजिस्ट्रेशन शुल्क अधिकृत बैंक में जमा करना होगा। एमपी बोर्ड एवं सीबीएसई का हायर सेकंडरी का रिजल्ट घोषित होने के बाद मंगलवार को एमएलबी कॉलेज के हेल्प सेंटर पर दस्तावेज का वेरिफिकेशन कराने पहुंचे अधिकांश छात्रों ने एक ही कॉलेज का चयन किया था। 

- ऑनलाइन एडमिशन के दौरान किसी भी तरह की परेशानी होने पर छात्र हेल्पलाइन नंबर 0755-2551698 और 0755-2551653 पर शिकायत कर सकते हैं(दैनिक भास्कर,ग्वालियर,30.5.12)।

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29 मई 2012

अगले वर्ष से इंजीनियरिंग के लिए एकल प्रवेश परीक्षा

लगभग ढाई साल पहले सरकार ने इंजिनियरिंग के दाखिले के लिए 'वन नेशन, वन टेस्ट' (एक देश, एक परीक्षा) का जो सपना देखा था, वह सोमवार को तब पूरा होता दिखा, जब सरकार और देश के प्रमुख इंजिनियरिंग संस्थानों के बीच सिंगल टेस्ट को लेकर आपसी सहमति बन गई। अब साल 2013 से ही देश में सिंगल टेस्ट यानी आईएसईईटी (इंडियन साइंस इंजिनियरिंग एलिजिबिलिटी टेस्ट) की शुरुआत होने जा रही है। इस टेस्ट के जरिए आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और एसर समेत केंद्रीय मदद पाने वाले तमाम इंस्टिट्यूट्स में दाखिला दिया जाएगा। 

गौरतलब है कि फिलहाल सरकार ने इसे सभी के लिए जरूरी नहीं बनाया है। अभी तक हरियाणा, गुजरात व महाराष्ट्र सरकार ने इसके प्रति अपनी सहमति जताई है। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल का कहना था कि बाकी राज्य सरकारें व संस्थान सिंगल टेस्ट के आधार पर अपने यहां दाखिले के लिए क्या फॉर्म्युला अपनाते हैं, यह उन पर छोड़ दिया जाएगा। हम उनकी स्वायत्तता में दखल नहीं देना चाहते। 

सिंगल टेस्ट क्यों: देश में सिंगल टेस्ट लागू किए जाने की वजहों को स्पष्ट करते हुए सिब्बल ने बताया कि बच्चों के सिर पर से कई एंट्रेंस एग्जाम देने का बोझ हटाने के लिए, उन्हें कोचिंग के जाल से निकालने के लिए और बच्चों में स्कूली शिक्षा, खासकर 12वीं बोर्ड एग्जाम्स का महत्व दर्शाने के लिए सिंगल टेस्ट की शुरुआत की जा रही है। 

कैसा होगा टेस्ट: 
फिलहाल सिंगल टेस्ट मेंस और एडवांस दो लेवल पर होगा। हर स्टूडेंट को ये दोनों एग्जाम देने होंगे। इस टेस्ट की मैरिट में 12वीं बोर्ड के मार्क्स की पर्सेंटाइल के साथ-साथ मेंस और अडवांस एग्जाम्स के मार्क्स के पर्सेंटेज भी जुड़ेंगे। सिंगल टेस्ट के दोनों एग्जाम्स सब्जेक्टिव न होकर ऑब्जेक्टिव टाइप होंगे। टेस्ट का मूल्यांकन कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से होगा। एक ही दिन में दोनों एग्जाम होंगे। 

आईआईटी मैरिट: 
आईआईटी के लिए 12वीं व मेंस एग्जाम के नंबरों के 50-50 फीसदी मार्क्स जोड़े जाएंगे। इनके आधार पर तकरीबन 50 हजार स्टूडेंट्स को चुना जाएगा, जिसके लिए एडवांस एग्जाम के मार्क्स को मैरिट का आधार बनाया जाएगा। इसके हिसाब से ऑल इंडिया रैंकिंग तय होगी। 

बाकी संस्थानों के लिए: 
आईआईटी को छोड़कर बाकी संस्थानों के लिए मैरिट का पर्सेंटेज 40-30-30 रखा गया है। जिसमें बोर्ड के मार्क्स के 40 फीसदी व बाकी दोनों एग्जाम्स के 30-30 फीसदी मार्क्स को आधार बनाया जाएगा(नभाटा,दिल्ली,28.5.12)।

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आंध्रप्रदेशःओबीसी कोटे में मुस्लिम आरक्षण कोर्ट में खारिज

ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) कोटे के अंदर अल्पसंख्यकों को 4.5 फीसदी आरक्षण देने का प्रस्ताव आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत का कहना है कि यह सब-कोटा देने का फैसला धार्मिक वजहों से लिया गया था। इसके पीछे और कोई आधार नहीं था। 

केंद्रीय शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण तय है। पिछले साल दिसंबर में सरकार ने ऑफिस मेमोरेंडा (ओएम) जारी करके ओबीसी कोटे के अंदर अल्पसंख्यकों को आरक्षण का प्रस्ताव किया था। सोमवार को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने इस ऑफिस मेमोरेंडा को रद्द कर दिया। 

हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को जिस तरह हल्के में लिया, उससे हम खुश नहीं हैं। धार्मिक अल्पसंख्यकों का अति पिछड़ा वर्ग या एक-जैसे ग्रुप के रूप वर्गीकरण क्यों किया गया, यह साबित करने के लिए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल कोई सबूत नहीं दिखा पाए। ऐसे में हमारा मानना है कि मुस्लिम, क्रिश्चन, सिख, बौद्ध और पारसी एक जैसे नहीं बल्कि अलग-अलग ग्रुप हैं। 

आंध्र के पिछड़ी जाति के नेता आर. कृष्णैया की याचिका पर हाई कोर्ट ने कहा कि 22 दिसंबर 2011 को जारी ओएम में कहा गया है कि 4.5 फीसदी का यह उप-आरक्षण सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यकों के लिए है। इसी दिन जारी रिजॉल्यूशन और दूसरे ओएम के जरिए अल्पसंख्यकों के लिए सब-कोटा बना दिया गया। कोर्ट ने कहा कि 'अल्पसंख्यकों से संबंधित' और 'अल्पसंख्यकों के लिए' जैसे शब्द दिखाते हैं कि सब-कोटा धार्मिक आधार पर तैयार किया गया(नवभारत टाइम्स,हैदराबाद,29.5.12)।

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28 मई 2012

सीबीएसई में हासिल अंक जानने के लिए आरटीआई काम नहीं करेगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में व्यवस्था देते हुए कहा कि सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत सीबीएसई परीक्षा में प्राप्त अंकों का खुलासा नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट का मानना है कि इससे बोर्ड की नई ग्रेडिंग व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित होगा। 

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी और जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ की खंडपीठ ने कहा कि ग्रेडिंग व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य छात्रों को अंकों की जगह ग्रेड देना था। अंकों की जानकारी को आरटीआई के तहत सूचना नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इससे अंकों की जगह ग्रेड देने की व्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा। 

खंडपीठ ने न्यायालय की ही एकल पीठ और केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के फैसले को दरकिनार करते हुए कहा कि एकल पीठ के न्यायाधीश और सीआईसी के निर्देश ग्रेडिंग व्यवस्था के तहत अंकों की जगह ग्रेड की व्यवस्था करने के उद्देश्य को प्रभावित करते है। दरअसल, आयोग और एकल पीठ ने एक छात्रा के अपने दसवीं बोर्ड की परीक्षा के अंकों का खुलासा करने की मांग के बाद सीबीएसई को आदेश दिया था। एकल पीठ के आदेश के खिलाफ बोर्ड ने सीआईसी के समक्ष इसे चुनौती दी थी, जिसे आयोग ने बरकरार रखा था। इसके बाद बोर्ड ने कार्यकारी चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डबल बेंच के सामने इसे चुनौती दी, जिसे स्वीकार कर लिया गया(दैनिक भास्कर,दिल्ली,28.5.12)।

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27 मई 2012

जियोलॉजिस्ट बनें

आज दुनिया में जो भी कुछ चमक-दमक है और विकास दिख रहा वह सब धरती से निकाले गए खनिज संसाधनों के बदौलत है। सच बात तो यह है कि जिसे हम विकास और मानवीय उपलब्धि मानते हैं वह एक तरह से धरती के अंदर मौजूद खनिजों का उत्खनन है, उनका प्रायोगिक कौशल मात्र है। 

समुद्र विज्ञान भूकंप संबंधी अध्ययन (सीस्मोलॉजी) और जमीन के नीचे पानी के भंडारण की खोज और इस्तेमाल में दक्षता (हाइड्रोलॉजी) आदि में भी जबर्दस्त करिअर की संभावनाएं हैं। इन तमाम क्षेत्रों का विस्तृत अध्ययन जियोलॉजी की अलग-अलग शाखाओं में किया जाता है। जियोलॉजी यानी भूगर्भ विज्ञान में डिग्री हासिल करने वाले जियोलॉजिस्ट कहलाते हैं। जियालॉजी की अलग-अलग शाखाओं में अलग-अलग क्षेत्र की पढ़ाई होती है। इसी तरह अलग-अलग जियोलॉजिस्ट जो काम करता है उसमें पृथ्वी की बनावट का अध्ययन, इसकी ऊपरी परत की प्रकृति तय करना, वायुमंडल का अध्ययन, चुंबकीय शक्ति का अध्ययन, मिट्टïी, तेल, गैस व पत्थरों के सैंपलों का अध्ययन आदि है। 

शैक्षिक योग्यता : 
जियोलॉजी में बैचलर डिग्री हासिल करने के लिए वही छात्र यूजीसी द्वारा संचालित नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) में बैठने के योग्य समझे जाते हैं, जिन्होंने 10+2 स्तर पर फिजिक्स,कैमिस्ट्री, एवं मैथ्स पढ़े हों। इसके अलावा ज्वाइंट एंट्रेंस परीक्षा पास करने वाले साइंस स्टूडेंट्स भी पांच वर्षीय एक्सटलोरेशन जियोलॉजिक्स कोर्स में दाखिला पा सकते हैं। साथ ही ऐसे इंजीनियर भी जियोलॉजी अथवा जियोलॉजिक्स में एम टेक कोर्स कर सकते हैं जो ग्रेजुएट एप्टीच्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग पास कर चुके हैं। 

यूं तो जिस तरह जियोलॉजी के विभिन्न क्षेत्रों का विकास हो रहा उसके चलते आज एक जियोलॉजिस्ट के लिए ढेरों और नये-नये तरह के अवसर उपलब्ध हैं। फिर भी कुछ संस्थान और क्षेत्र खासतौर पर इन्हें नौकरी देते हैं। इनमें प्रमुख हैं : कोल इंडिया लिमिटेड, इंडियन इस्टीच्यूट ऑफ हाईड्रोलॉजी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ जियोमैग्निटज्म, सेट्रल गाउंड वाटर बोर्ड आदि। उन तमाम कंपनियों में जियोलॉजिस्टों के लिए नौकरी के अवसर उपलब्ध होते हैं जो तेल, गैस या किसी भी उद्देश्य के लिए खनन क्षेत्र से जुड़े हैं। इन कंपनियों द्वारा जियोलॉजिस्ट की नियुक्ति आकर्षक वेतनमान व शर्तों के अधीन की जाती है। 

प्रमुख शिक्षण संस्थान : 
उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद 500007 
कानपुर विश्वविद्यालय कानपुर 208024 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र 136119 
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अलीगढ़ 202002 
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी 221005 
आंध्र विश्वविद्यालय विशाखापत्तनम 5300030 
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय दिल्ली 
जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू 180004 
गुलबर्ग विश्वविद्यालय विशाखापत्तनम 585106(अनिल कुमार,शिक्षालोक,दैनिक ट्रिब्यून,8.5.12)

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