रोज़ी-रोटी का मसला सुलझे,कविता-कहानियां भी तभी सुहाती हैं.........
अब तक मेडल देने की परम्परा स्नातकोत्तर स्तर पर ही रही है।(हिंदुस्तान,पटना,9.4.2010)
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