किसी भी बड़ी कॉर्पोरेट डील का वह आवश्यक हिस्सा होते हैं। अदालत से बोर्डरूम में उनकी मौजूदगी एक समान असरदार रहती है। चाहे नया बिजनेस स्थापित करने की कवायद हो, किसी विवाद से निपटना या किसी आम एम्प्लाई कॉन्ट्रेक्ट को बनाना, यह एक पेशा है जिसके बिना कार्यस्थल पर काम नहीं चलता। हैरानी नहीं कि इसी कारण काले कोट के बावजूद, इस पेशे पर ग्लैमर की परत चढ़ी है। हमने इसके लिए तीन पेशेवरों से बात की और उनके कार्य के बारे में जाना। उसके बाद बारी आती है पुरस्कारों की जिसके शीर्षक कुछ इस तरह हैं, ‘मोस्ट पावरफुल वुमन’, ‘लॉयर ऑफ द ईयर’, ‘बेस्ट नॉलेज मैनेजर’। यदि आप 54 वर्षीय मैनेजिंग पार्टनर का करियर ग्राफ देखेंगे इस बात में कोई हैरत नहीं होगी। पूर्व भारतीय अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी की बेटी जिया मोदी 1984 में हारवर्ड लॉ स्कूल से मास्टर-इन लॉ (एलएलएम) डिग्री और न्यूयॉर्क की फर्म बेकर और मैकेंजी से चार साल का कार्यअनुभव अर्जित कर भारत में लौटीं। उन प्रारंभिक दिनों में वर्ष 1987-88 में वह अदालत में दिखाई देती थीं। वह बॉम्बे इन्वायर्नमेंटल एक्शन ग्रुप के लिए काम कर रही थीं। ये मामले अवैध निर्माण और विभिन्न बिल्डिरों के खिलाफ थे। वर्ष 1995 में मोदी याचिका से दूर विलय, अधिग्रहण और सुरक्षा कानून के क्षेत्र में चली गईं। वह कहती हैं, ‘भारतीय कंपनियां विस्तार पा रही थीं, विदेशी क्लाइंट्स भारत आ रहे थे, अमेरिका से दोस्त ऐसे काम भेज रहे थे, जिस तरह के मैं न्यूयॉर्क में किया करती थी। मैं लंबी-लंबी तारीखों और स्थगित मामलों की दुनिया से थक गई थी, किसी चीज पर केंद्रित होने और विशेषज्ञता हासिल करने का समय नहीं मिल पा रहा था, इसलिए मैंने कॉरपोरेट कानून जगत को पूरी तरह अपनाने का निर्णय लिया।’ दिनचर्या : ‘मेरी कोई निश्चित दिनचर्या नहीं है और न ही कोई कार्य का समय निर्धारित है। यदि मैं ज्यादा देर तक सो सकती हूं, तो अवश्य सोती हूं।’ ऐसे वकील के लिए कोई हैरत की बात नहीं है जिसका ‘दिन’ अक्सर आधी रात को खत्म होता है, कई बार प्रात: दो बजे या पांच बजे तक भी काम चलता रहता है। जिया हमेशा अपने पास ब्लैकबेरी फोन और एपॉइंटमेंट बुक रखती हैं। पेज दिन विशेष पर किए जाने वाले कार्यो की सूची से भरे होते हैं। दस बजे से मीटिंग्स, फिर विचार मंथन और कभी-कभार ऑफिस समारोह। ‘ऑफिस में मेरा दिन कैसा होगा इसका कोई निश्चित अनुमान नहीं लगा सकती’। वह कहती हैं, ‘कभी भी कोई मीटिंग हो सकती है, ऑफिस में या बाहर या फिर कॉन्फ्रेंस हॉल में। एक दिन में मुझसे कई चीजों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।’ उनकी 250 वकीलों की टीम छह अलग-अलग जगह पर काम करती है और उन्हें हर सहकर्मी के लिए उपस्थित रहना होता है। इन सब कामों में खाने के लिए समय निकालना सबसे मुश्किल होता है। सुबह का भोजन तो कभी होता ही नहीं। यदि लंच क्लाइंट के साथ मीटिंग पर है, तो यह एक्सप्रेस टॉवर में वांग वांग या ओबरॉय में होता है) अन्यथा घर से खाना आ जाता है, जिसमें अक्सर दाल, कुछ सब्जियां, ठंडी चपाती और सलाद होता है। कई बार यह खाना रात के भोजन में काम आता है।’ फुरसत में : साल में तीन या चार बार कुछ दिन की छुट्टी लेकर गोवा स्थित अपने घर चली जाती हैं। इसके अलावा दो सप्ताह की छुट्टी न्यूयॉर्क में व्यतीत करती हैं जहां उन्होंने चार साल काम किया है या फिर यूरोप में। जरूरी स्किल्स : ‘बहुत सी कड़ी मेहनत। नई जानकारी हासिल करने की प्रतिबद्धता और अधिक जानने की चाह का जुनून (इस बात की परवाह किए बिना कि इसके लिए आपको बहुत पढ़ना पड़ेगा)। इसके अलावा कई बार किस्मत से ही कुछ ऐसे काम करने का मौका मिल जाता है जो पसंद हैं।’ शिक्षा : ब्रिटेन स्थित कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से एलएलबी और अमेरिका के हारवर्ड लॉ स्कूल से एलएलएम। काम में क्या अच्छा लगता है : ‘मैं कुछ अलग कर सकती हूं। भारत में कानूनों का अभी भी विकास हो रहा है, ऐसे में उस विचार मंथन प्रक्रिया का हिस्सा होना वाकई अच्छा लगता है। सरकार से संपर्क कर रही सलाहकार समिति का हिस्सा बनकर कुछ अच्छा बदलाव लाने की कोशिश रहती है। जिया को खासतौर पर कुछ विदेश की अधिग्रहण समझौता से संबंधित अपने किए हुए काम पर गर्व है, जिनमें सबसे पहला नाम वर्ष 2004 में टाटा स्टील द्वारा सिंगापुर की कंपनी नेटस्टील का अधिग्रहण समझौते का आता है। प्रसाद ने हाल ही में बंगलौर से मुंबई शिफ्ट किया है। वह कहते हैं, ‘यहां अधिक एक्सपोजर मिलता है, सबकुछ यहां स्थित है। फिर अपने लिए समय न मिले तो उसमें क्या हर्ज है। मुझे शुरू से ही मालूम था कि मुझे कॉर्पोरेट लॉ की प्रेक्टिस करनी है।’ कानूनी जिरह उन्हें अधिक नहीं भाती, ‘वह एक संघर्ष है, जब तक कि आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि लॉ प्रेक्टिस की न हो। और शुरुआती स्तर पर उसमें हमेशा पैसा कम ही होता है।’ उन्होंने अपना करियर निशिथ देसाई एसोसिएट्स के साथ शुरू किया था और वहां चार वर्ष काम किया, उसके बाद वह कुछ माह पूर्व मुंबई में खेतान एंड कंपनी से जुड़े। दिनचर्या : यदि अमेरिका स्थित किसी क्लाइंट के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल हो तो उनका रोजाना का कामकाज प्रात: 7:30 से शुरू हो जाता है। अन्यथा वह नौ बजे दफ्तर पहुंचते हैं। सबसे पहले फॉलोअप्स पर काम होता है। प्रसाद एक प्राइवेट ईक्टिटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर टीम के सदस्य हैं। इसका मतलब लोगों को कानूनी इकाइयों, कम्प्लायंस, विशिष्ट क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आदि पर हमेशा जानकारी की दरकार रहती है। पहले से चल रहे मामलों संबंधी समझौते या मीमो पर भी काम होता है। किसी क्लाइंट से मीटिंग भी हो सकती है, जो कभी अकेले या कभी उनके रिपोर्टिंग पार्टनर के साथ होती है। आमतौर पर प्रसाद का काम सांय 8 बजे समाप्त हो जाता है, लेकिन किसी विशेष अवसर पर रात के 10 या मध्यरात्रि तक काम चलता है या पूरी रात भी। फुरसत में : संगीत सुनना। नए लोगों से, दोस्तों के दोस्तों से मिलना, स्कूल के दोस्तों के साथ मुलाकात या मौजूदा या पुराने सहकर्मियों के साथ बैठकी। जरूरी स्किल्स : चौबीसों घंटे काम के प्रति जागरूकता। वह कहते हैं, ‘एक वकील के तौर पर आप हर वक्त लोगों के साथ डील करते हैं, क्योंकि अंतत: आपकी व्यवहार कुशलता ही काम आती है।’ शिक्षा : कोलकाता की वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज से एलएलबी। कॉर्पोरेट लॉ की कोई विशेष ट्रेनिंग नहीं होती, लेकिन आप एलएलबी के दौरान जरूरी इलेक्टिव कोर्स ले सकते हैं। काम में क्या पसंद है : चुनौती। काश मैं बदल पाता : सुबह की मीटिंगें। प्राइवेट सेक्टर में स्टेडियम निर्माण से लेकर सरकारी-निजी क्षेत्र का रोड निर्माण, सोर्सिग और सबकॉन्ट्रेक्टिंग समझौतों तक, वह सभी मुद्दों से जुड़े कानूनी पहलुओं का मजा लेते हैं। लेकिन आहूजा को कॉर्पोरेट प्रेक्टिस से जुड़ी अपनी अदालती जिरह अधिक पसंद है (‘अन्य कार्यो से समय के कारण, जिनमें आपको पूरा दिन अदालत में इंतजार करना होता है और आप कुछ और नहीं कर पाते’)। दिनचर्या : आहूजा रोज सुबह अपने पांच वर्षीय पुत्र चैतन्य को स्कूल की कार में छोड़कर फोर्ट स्थित अपने दफ्तर को चल देते हैं। 24 मातहतों के बॉस आहूजा का एक औसत दिन प्रात: 9:15-9:30 पर पेपरवर्क के साथ शुरू होता है जिसमें कानूनी पहलू तैयार करना और पत्रोत्तर कार्य होता है। इसके बाद मीटिंग जो पूरे दिन चल सकती हैं। उनमें से कुछ अपनी कंपनी की ही हो सकती हैं, जैसे मुंबई के 12 साझीदारों का भावी विकास के लिए विचार बांटना। या किसी क्लाइंट द्वारा भारतीय बाजार में उतरने के श्रेष्ठ मार्ग पर विमर्श, जिसमें इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी कमेटी गठित करने पर सलाह मांगी जा सकती है ताकि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के रजिस्ट्रेशन के लंबे मामलों से बचा जा सके। इसी सब के बीच लंच ब्रेक भी होता है जो ऊपर स्थित कमरे में किया जाता है। आहूजा सांय 8-8:30 तक दफ्तर से निकलते हैं। डिनर और चैतन्य के सोने के बाद वह एक या दो घंटे कांट्रेक्ट ड्राफ्टिंग या किसी ब्रीफ को तैयार करते हैं। आहूजा के करियर के शुरुआती पांच वर्षो में हर हफ्ते बाहरी स्थानों का दौरा होता था जो अब एक या दो माह में एक ही बार होता है। फुर्सत में : वशी से परेल में शिफ्ट होना। इससे आने-जाने का समय दोनों ओर से पच्चीस मिनट कम हो गया है। वह बताते हैं, ‘मैं किसी भी रोज लंच टाइम में अपने बेटे से भी मिलने जा सकता हूं और इसके बावजूद वशी जितना सफर नहीं होता।’ कौशल : धैर्य, लीक से हटकर सोचना, आकलन करना और समस्या निवारण क्षमता। आहूजा के अनुसार, ‘बेशक इस स्तर तक पहुंचने के लिए आपकी बुनियाद मजबूत होनी चाहिए, कानून की गहरी समझ बेहद जरूरी है और क्लाइंट की बात को गहराई से समझना भी।’ शिक्षा : नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बंगलौर से बीए एलएलबी (ऑनर्स)। कार्य क्यों पसंद है : ‘कार्यकुशलता, विभिन्न योजनाओं की शुरुआत (एक रिकॉर्डिग लेबल, एक सॉफ्टवेयर कंपनी) और उन्हें उस स्तर पर ले जाना जहां उन्हें मेरी जरूरत न रहे।’ काश मैं बदल पाता : ‘छुट्टियां ले पाने में दिक्कत’। मुंबई के निकट सहयाद्री, लोनावाला के निकट राजमाछी फोर्ट या पेब फोर्ट से मथेरन तक भी जाने की फुर्सत नहीं। आखिरी बार आहूजा ने फरवरी 2008 में पांच दिनों की छुट्टी ली थी। वेतनमान रेंजः एक से पांच करोड़ रुपए सालाना। इस स्तर पर आपको आपकी क्षमताओं से आंका जाता है(सोन्या दत्ता चौधरी,हिंदुस्तान,दिल्ली,19.7.2010)।
मुख्य समाचारः
20 जुलाई 2010
कॉर्पोरेट कानूनः कोर्ट के बाहर भी कमाई
जिया मोदी, 54 वर्ष
मैनेजिंग पार्टनर, एजेडबी एंड पार्टनर्स, मुंबई
मुंबई के नरीमन प्वॉइंट के एक्सप्रेस टॉवर के 23वें फ्लोर पर जिया मोदी के ऑफिस की जो बात सबसे पहले आकर्षित करती है वह है कलात्मकता। अधिकतर कॉन्फ्रेंस रूम की दीवारों पर उनके द्वारा चुनी गई रजा, सुजाता अचरेकर और नितिन घांगरेकर की पेंटिंग्स लगी हुई हैं।
अधिकतर पार्टनर देर तक काम करते हैं। जिया खुद सुबह होने तक काम करती रहती हैं और वापस अपनी वोल्कवेगेन बीटल कार में घर चली जाती हैं। वह ऑफिस से 15 मिनट की दूरी पर लेबरनम रोड पर रहती हैं।
कुछ देश या विदेश में अपरिहार्य बिजनेस यात्रा के अलावा मोदी अधिक से अधिक वीडियोकॉन्फ्रेंसिंग करने में यकीन रखती हैं।
काश मैं बदल पाती : मैं अपनी अव्यवस्थित दिनचर्या को बदलना और दिनभर के काम को आठ से दस घंटे तक सीमित करना चाहूंगी।
वेतनमान रेंजः 20 लाख रुपये से दस करोड़ रुपये सालाना। मोदी कहती हैं यह पूरी तरह आप पर निर्भर है।
अनुपम प्रसाद, 27
एसोसिएट, खेतान एंड कंपनी, मुंबई
अनुपम प्रसाद कहते हैं, ‘यदि आपको शुक्रवार की अलसुबह 2 बजे कॉल आए तो उसे जरूर लीजिए, चाहे आपका पूरे वीकेंड का कोई प्लान हो। आखिरकार बड़ी कीमत का सवाल होता है। जब आप लाखों और करोड़ों रुपयों संबंधी डील कर रहे हों तो आप यह नहीं कह सकते कि ‘सोमवार तक इंतजार कीजिए।’’
करियर विकास : युवा वकीलों के लिए कई विकल्प हैं। लॉ स्कूल से स्नातक होने के बाद अदालती जिरह प्रेक्टिस, किसी लॉ फर्म को ज्वाइन कर सकते हैं या बाहर पढ़ने जा सकते हैं। प्रसाद के अनुसार, ‘किसी भी नए व्यक्ति का अंतिम लक्ष्य पार्टनर बनना होता है, संभवत: चार-पांच वर्षो के बाद। इस कार्य में 8-12 वर्ष भी लग सकते हैं। पार्टनर के तौर पर कई वकील अपनी फर्म शुरू कर देते हैं, या प्राइवेट ईक्विटी क्षेत्र में उतरते हैं अथवा उद्यमी बन जाते हैं।’
वेतनमानः 12 से 18 लाख सालाना। 100 प्रतिशत बोनस के साथ यह 36 लाख तक भी पहुंच सकता है।
आशीष आहूजा, 37
पार्टनर, वाडिया गांधी एंड कंपनी, मुंबई
आशीष आहूजा की पोशाक किसी भी कॉर्पोरेट वकील की तरह सूट और टाई होती है। चमड़े की जिल्द में सजी भारी-भरकम कानून की किताबों के बीच हैरिटेज बिल्डिंग के पहली मंजिल पर स्थित दफ्तर में बैठे आहूजा एक बेहतर वकील के अपने विचार पर कहते हैं, ‘यदि आपके घर पर काम करने वाली महिला को कोई पुलिसवाला पकड़ ले तो आपको यह न कहना पड़े ‘किसी और वकील से बात करो, मैं सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर और गैस से जुड़े मामले देखता हूं।’’ आहूजा की कार्य विविधता इस फलसफे का पुख्ता प्रमाण पेश करती है।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।