तकनीकी उच्च शिक्षा हासिल करने के फेर में युवा पीढी पहले ही संगीत और कला से दूर है। उस पर सरकार भी इन कलाओं के प्रति सजग नहीं है। आलम यह है कि राज्य के संगीत विद्यालयों में तीन साल से परीक्षाएं नहीं हुई हैं। त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम भूषण में वर्ष 2005 में प्रवेशित विद्यार्थी एवं वर्ष 2008 में प्रवेशित विद्यार्थी अंतिम वर्ष में अटके हुए हैं। वहीं द्विवर्षीय पाठ्यक्रम प्रभाकर की भी यही हालत है। प्रवेश लेने के बाद विद्यार्थी हताश हैं और अब डिग्री पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। कोटा में ही तृतीय वर्ष में करीब डेढ सौ विद्यार्थी परीक्षा के इंतजार में हैं।
जवाब ऎसे-ऎसे
विद्यार्थियों ने सूचना के अधिकार के तहत विभाग से इस बारे में जवाब भी चाहा कि परीक्षाएं क्यों नहीं हो रही हैं, लेकिन सरकारी कागजों ने विद्यार्थियों को परेशान कर दिया। शुरूआत में विभाग ने इसका कारण प्रशासनिक बताया, जब शिक्षा मंत्री से जवाब चाहा तो उन्होंने विभाग की लापरवाही बता दी। बार-बार अपील करने के बाद शीघ्र परीक्षाएं करवाने की बात लिखकर इतिश्री कर ली गई।
कितने स्कूल, क्या स्थिति
राज्य में कोटा व झालावाड में राजकीय संगीत विद्यालय हैं। वहीं पांच अनुदानित संगीत विद्यालय भीलवाडा, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर व अलवर में संचालित है। इन संगीत स्कूलों की परीक्षाएं पंजीयक शिक्षा विभागीय परीक्षा विभाग के अंतर्गत होती है, जिनमें गायन, नृत्य और वादन तीन कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। वादन में गिटार और तबला विषय हैं।
संतोषजनक जवाब नहीं
इस बारे में बार-बार बीकानेर पत्र लिख चुके हैं लेकिन कभी भी संतोषजनक जवाब नहीं आता। कभी प्रशासनिक स्तर पर तो कभी, पंजीयक स्तर का कारण बताकर परीक्षाएं नहीं करवाई जा रही। - महावीर शर्मा, प्रधानाचार्य, संगीत स्कूल, कोटा
जल्द करवाएंगे
पहले परीक्षाएं क्यों नहीं हो पाई इस बारे में तो जानकारी नहीं है, लेकिन हम शीघ्र परीक्षाएं करवाने की तैयारी करवा रहे हैं। एसटीसी की पूरक परीक्षाओं के साथ ये परीक्षाएं करवाई जाएंगी।
- श्यामा माहेश्वरी, कुलसचिव, पंजीयक शिक्षा विभागीय परीक्षाएं, बीकानेर(राजस्थान पत्रिका,कोटा,19.7.2010)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।