एक जिले में तीन साल या उससे अधिक समय से रहने वाले अभ्यर्थी अब बीटीसी में प्रवेश के लिए उसी जिले में आवेदन करने के हकदार होंगे। बीटीसी 2010 में चयन के इच्छुक अभ्यर्थियों को मूल जन्म स्थान का अधिवास प्रमाणपत्र बनवाने में दिक्कत के मद्देनजर शासन ने यह फैसला किया है। इस सम्बंध में 14 मई को जारी राजाज्ञा को संशोधित करते हुए नया शासनादेश जारी कर दिया गया है। बीटीसी 2010 में प्रवेश के लिए 14 मई को जो शासनादेश जारी किया गया था, उसमें कहा गया था कि अभ्यर्थी प्रदेश में मूल जन्म स्थान वाले जिले में ही आवेदन कर सकेंगे। शासनादेश के मुताबिक अभ्यर्थियों को गृह जिले में स्थायी निवास होने का अधिवास प्रमाणपत्र प्रशिक्षण में चयन होने के बाद प्रवेश की तारीख को प्रस्तुत करना है। इस शर्त के कारण उन अभ्यर्थियों को खासतौर पर मूल जन्म स्थान का अधिवास प्रमाणपत्र बनवाने में दिक्कतें आ रही थीं जिनके अभिभावक नौकरीपेशा हैं और तबादले के कारण तीन साल या उससे अधिक समय से किसी एक जिले में रह रहे हैं। बीटीसी चयन के लिए डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय चयन समितियां गठित हैं। सोनभद्र समेत कई जिलों के डीएम ने इस सम्बंध में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद से अभ्यर्थियों के निवास प्रमाणपत्र के सम्बंध में निर्देश मांगा था। इस पर शासन ने 14 मई को जारी शासनादेश के अधिवास प्रमाणपत्र सम्बंधी प्रावधान को संशोधित करते हुए नया शासनादेश जारी कर दिया है। नये शासनादेश में कहा गया है बीटीसी चयन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के 18 फरवरी 03 को जारी शासनादेश के प्रस्तर-9 के अनुसार ही सामान्य निवास प्रमाणपत्र मान्य होंगे। प्रस्तर-9 में व्यवस्था दी गई है कि आवेदक या उसके माता-पिता को उस जिले का मूल निवासी होने या न्यूनतम तीन वर्ष की अवधि से उस जिले में रहने पर सक्षम अधिकारी द्वारा निवास प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा(दैनिक जागरण,गोरखपुर संस्करण,20.7.2010)।
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