प्रदेश के विश्वविद्यालयों में हुई अवैध नियुक्तियों पर गाज गिरने वाली है । बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालयों में लोगों को पहले संविदा पर रखा गया और बाद में उनका समायोजन कर लिया गया । राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों से इस बारे में कार्रवाई के खिलाफ लिखा है । राजभवन के इस फरमान के बाद से विश्वविद्यालय अपने यहां के ऐसे कर्मचारियों की फाइलें खंगालने में जुट गए हैं । खासकर लखनऊ विश्वविद्यालय में १९९८ से फाइलों की छानबीन शुरू हो गई है ।सूत्रों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में संविदा पर सैक़ड़ों कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी । बाद में ज्यादातर को नियमित भी कर दिया गया था । लेकिन इनमें से ज्यादातर की नियुक्ति नियम विヒद्व की गई । एक शिकायत पर राजभवन ने लखनऊ विश्वविद्यालय सहित सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेज कर ऐसे कर्मचारियों की नियुक्ति की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए(नई दुनिया,दिल्ली,6.7.2010) ।
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