अगस्त-2008 में गलत तरीके से नियुक्त हुए 226 डॉक्टरों की नौकरी 21 अगस्त को समाप्त हो जायेगी. आयुष नियुक्ति घोटाले का परदाफ़ाश होने के बाद सरकार उन्हें बरखास्त करना चाहती थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में इन डॉक्टरों को बरखास्त नहीं किया जा सका था. इनकी नियुक्ति दो साल के लिए अनुबंध पर की गयी थी. इसकी समय सीमा इसी माह (अगस्त) खत्म हो रही है. इस तरह इनकी सेवा स्वत: समाप्त हो जायेगी. फिलहाल नियुक्ति समिति के अध्यक्ष अमरेश्वर प्रसाद जेल में हैं.
दूसरी तरफ सरकार ने उस वक्त योगदान नहीं कर पानेवाले एक डॉक्टर को योगदान कराने और उसे बकाया वेतन देने का आदेश जारी किया है.राज्य में डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए सरकार ने संविदा के आधार पर नियुक्ति का फ़ैसला लिया था. इस फ़ैसले के आलोक में सरकार ने आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथ डॉक्टरों की बहाली की प्रक्रिया शुरू की थी. सरकार ने डॉक्टर अमरेश्वर प्रसाद की अध्यक्षता में नियुक्ति समिति गठित की.
इसमें डॉक्टर एसपी सिन्हा को सचिव बनाया गया था. समिति ने दो चरणों में कुल 226 डॉक्टरों की की. पहले चरण में 156 और दूसरे चरण में 70 डॉक्टरों को नियुक्त किया गया. नियुक्ति में भारी गड़बड़ी और पैसों के लेन-देन का आरोप लगने के बाद सरकार ने इस मामले की जांच निगरानी को सौंपा. प्रारंभिक जांच के बाद पांच से सात लाख रुपये लेकर बहाल करने का मामला प्रकाश में आया. इसके बाद सरकार ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया. निगरानी द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आलोक में नियुक्ति समिति के अध्यक्ष जेल में हैं. सरकार उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति भी दे चुकी है. नियुक्ति समिति के अध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई के बाद सरकार ने गलत तरीके से बहाल डॉक्टरों को बरखास्त करने का फ़ैसला किया.
बरखास्तगी आदेश जारी होने से पहले ही डाक्टरों ने सरकार की कार्रवाई को न्यायालय में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट में मामले में यथा स्थिति बहाल करने का निर्देश दिया गया. सरकार ने इस मामले में शपथ पत्र दाखिल कर नियुक्ति में गड़बड़ी होने की बात स्वीकार की. दूसरी तरफ उस वक्त योगदान नहीं कर पानेवाली डॉक्टर रश्मि लकड़ा को सरकार ने अब योगदान कराने और उसे बकाया वेतन देने का आदेश दिया है(प्रभात ख़बर,रांची,7.8.2010).
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