साइंस और कॉमर्स के बीच गैप अब कम होने जा रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में कॉमर्स के साथ-साथ अब साइंस और आर्ट्स के स्टूडेंट्स भी फाइनैंस और अकाउंटिंग की बारीकियां सीख सकेंगे। स्टूडेंट्स के मैनेजमेंट स्किल्स को निखारने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी यह प्रयोग करने जा रही है। यूनिवर्सिटी ने ग्रैजुएशन लेवल पर हर स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए 'फाइनैंस एंड अकाउंटिंग' नाम के एडऑन कोर्स को लॉन्च करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह कोर्स इसी अकैडमिक सेशन में शुरू होने की उम्मीद है और दिसंबर से पहले बैच की क्लासेज शुरू हो सकती हैं। यह कोर्स तीन से चार महीने का होगा।
यूनिवर्सिटी के मुताबिक इंडस्ट्री की डिमांड को ध्यान में रखकर ही एडऑन कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इससे यहां के स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट में बेहतर मौके मिल सकेंगे। कॉमर्स के स्टूडेंट्स तो अपने सिलेबस में फाइनैंस व अकाउंटिंग की पढ़ाई करते ही हैं, लेकिन दूसरी स्ट्रीम के स्टूडेंट्स को भी इस बारे में पढ़ने का मौका मिलेगा। उन्हें भी इस फील्ड की बेसिक नॉलेज मिल सकेगी। साइंस के कई स्टूडेंट्स आगे चलकर एमबीए में ऐडमिशन लेते हैं, सो ग्रैजुएशन लेवल पर ही उन्हें मैनेजमेंट के गुर सिखाए जाएंगे ताकि प्लेसमेंट के साथ-साथ हायर स्टडीज में उन्हें आसानी हो।
इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी डीयू के इंस्टिट्यूट ऑफ लाइफ लॉन्ग लर्निंग (आईएलएलएल) के डायरेक्टर प्रो. ए. के. बख्शी को दी गई है। उन्होंने बताया कि मौजूदा सिस्टम में ग्रैजुएशन के बाद 10 से 15 पर्सेंट स्टूडेंट्स को ही सीधे जॉब मिल पाती है, जबकि इंजीनियरिंग कोसेर्ज में यह रेश्यो 25 पर्सेंट तक का है। इस कोर्स का मकसद यह है कि अधिक से अधिक स्टूडेंट्स का ग्रैजुएशन करते ही प्लेसमेंट हो सके।
इस कोर्स के लिए डीयू सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की संस्था नैस्कॉम के साथ टाई-अप करेगी। अभी हाल ही में डीयू ने नैस्कॉम के साथ मिलकर 'ग्लोबल बिजनेस फाउंडेशन स्किल्स' कोर्स लांच किया था। इस कोर्स का कंटेंट कई नामी कंपनियों के सुझावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अब फाइनैंस व अकाउंटिंग का कोर्स भी इसी कड़ी का हिस्सा है।
प्रो. बख्शी ने बताया कि ग्रैजुएशन लेवल पर ही स्टूडेंट्स को एडऑन कोर्स करवाएं जाएंगे और इन कोसेर्ज से स्टूडेंट्स के पास अडिशनल क्वॉलिफिकेशन होगी। इस कोर्स को लेकर जल्द ही यूनिवसिर्टी और नैस्कॉम के अधिकारियों के बीच मीटिंग होगी और कोर्स के सिलेबस पर फैसला होगा। कोर्स पूरा करने के बाद स्टूडेंट्स को नैस्कॉम-डीयू-आईएलएलएल का जॉइंट सटिर्फिकेट भी दिया जाएगा(भूपेंद्र,नभाटा,1.8.2010)।
यूनिवर्सिटी के मुताबिक इंडस्ट्री की डिमांड को ध्यान में रखकर ही एडऑन कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इससे यहां के स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट में बेहतर मौके मिल सकेंगे। कॉमर्स के स्टूडेंट्स तो अपने सिलेबस में फाइनैंस व अकाउंटिंग की पढ़ाई करते ही हैं, लेकिन दूसरी स्ट्रीम के स्टूडेंट्स को भी इस बारे में पढ़ने का मौका मिलेगा। उन्हें भी इस फील्ड की बेसिक नॉलेज मिल सकेगी। साइंस के कई स्टूडेंट्स आगे चलकर एमबीए में ऐडमिशन लेते हैं, सो ग्रैजुएशन लेवल पर ही उन्हें मैनेजमेंट के गुर सिखाए जाएंगे ताकि प्लेसमेंट के साथ-साथ हायर स्टडीज में उन्हें आसानी हो।
इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी डीयू के इंस्टिट्यूट ऑफ लाइफ लॉन्ग लर्निंग (आईएलएलएल) के डायरेक्टर प्रो. ए. के. बख्शी को दी गई है। उन्होंने बताया कि मौजूदा सिस्टम में ग्रैजुएशन के बाद 10 से 15 पर्सेंट स्टूडेंट्स को ही सीधे जॉब मिल पाती है, जबकि इंजीनियरिंग कोसेर्ज में यह रेश्यो 25 पर्सेंट तक का है। इस कोर्स का मकसद यह है कि अधिक से अधिक स्टूडेंट्स का ग्रैजुएशन करते ही प्लेसमेंट हो सके।
इस कोर्स के लिए डीयू सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की संस्था नैस्कॉम के साथ टाई-अप करेगी। अभी हाल ही में डीयू ने नैस्कॉम के साथ मिलकर 'ग्लोबल बिजनेस फाउंडेशन स्किल्स' कोर्स लांच किया था। इस कोर्स का कंटेंट कई नामी कंपनियों के सुझावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अब फाइनैंस व अकाउंटिंग का कोर्स भी इसी कड़ी का हिस्सा है।
प्रो. बख्शी ने बताया कि ग्रैजुएशन लेवल पर ही स्टूडेंट्स को एडऑन कोर्स करवाएं जाएंगे और इन कोसेर्ज से स्टूडेंट्स के पास अडिशनल क्वॉलिफिकेशन होगी। इस कोर्स को लेकर जल्द ही यूनिवसिर्टी और नैस्कॉम के अधिकारियों के बीच मीटिंग होगी और कोर्स के सिलेबस पर फैसला होगा। कोर्स पूरा करने के बाद स्टूडेंट्स को नैस्कॉम-डीयू-आईएलएलएल का जॉइंट सटिर्फिकेट भी दिया जाएगा(भूपेंद्र,नभाटा,1.8.2010)।
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