उत्तराखंड में रसूखदार गुरुजी के आगे शिक्षा विभाग के नियम कायदे-शासनादेश बौने साबित हो रहे हैं। शिक्षकों ने अपनी आरामतलबी के लिए एक किमी की परिधि में संचालित प्राइमरी स्कूलों के एकीकरण के आदेश को ही ठेंगा दिखाना शुरू कर दिया। इसके लिए न सिर्फ पटवारी और अन्य अधिकारियों से झूठी रिपोर्टे लगवा दीं बल्कि क्षेत्रीय विधायक से सिफारिश तक करवा दी। चमौली जिले के तहसील मुख्यालय कर्णप्रयाग में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। राज्य के शिक्षा सचिव (विद्यालयी) ने शिक्षा निदेशक को एक किमी की परिधि में संचालित प्राइमरी स्कूलों के एकीकरण का आदेश दिया। नवंबर 2009 में शिक्षा निदेशक के निर्देश पर विभाग ने जिले में सुगम से लेकर दुर्गम क्षेत्रों तक में स्थित एक किमी की परिधि में आने वाले लगभग 27 प्राइमरी स्कूलों का विलय कर दिया। आदेश अनुपालन के तहत, कर्णप्रयाग ब्लॉक में आधा दर्जन स्कूलों पर ताले लगा दिए गए। कर्णप्रयाग नगर के प्राइमरी स्कूल-2, सुभाष नगर स्थित प्राइमरी स्कूल का राजकीय प्राथमिक विद्यालय-1 में विलय कर दिया गया। साथ ही वहां के शिक्षकों का अन्यत्र तबादला कर दिया गया। इसके बाद, रसूखदार शिक्षकों ने कर्णप्रयाग के विधायक और जीएमवीएन के अध्यक्ष अनिल नौटियाल के सिफारिशी पत्र तथा पटवारी और नगर पंचायत कार्यालय से जारी फर्जी प्रमाण पत्र पेश कर स्कूल खुलवा दिया। प्रमाणपत्र में प्राइमरी स्कूल प्रथम और द्वितीय के बीच की दूरी को डेढ़ किलोमीटर दूर दिखाया गया जबकि हकीकत में दूरी मात्र 400 मीटर है। इस खेल में डीईओ व बीईओ भी मूकदर्शक बने रहे। खंड शिक्षाधिकारी ने कहा, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के नियमों के तहत स्कूलों का विलय किया गया। दो विद्यालयों के बीच की दूरी का गलत प्रमाण पत्र पेश कर स्कूल फिर खुलवाने का मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच करा कर दोषियों को दंडि़त किया जाएगा(गोपेश्वर, दीपक फरस्वाण,दैनिक जागरण,29.9.2010)।
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