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30 सितंबर 2010

सफलता और चेष्टा

अगर आप किसी बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनी में बतौर सलाहकार की दीर्घकालिक भूमिका निभाने जा रहे हैं तब आपको अपनी नौकरी के बार में अच्छी तरह से विचार कर लेना चाहिए। क्योंकि संस्थान कभी भी इस बात के लिए इच्छुक नहीं रहता है कि वह कर्मचारी को पूर्णकालिक नौकरी की गारंटी दे।

आप अपने को अच्छी तरह तौल लें कि आप उनकी कंपनी में बेहतरीन तरीके से काम करेंगे और इस बात की संभावना हमेशा बनी रहेगी कि आप जिस भी पद पर वहां रहेंगे कुछ सीखने की कोशिश करेंगे। कंपनी में काम करते वक्त आपकी अर्हता के हिसाब से कंपनी अपनी इच्छानुसार आपको जो भी जिम्मा सौंपे आप हमेशा तत्पर होकर उसे पूरा करने की कोशिश करेंगे।कंपनी की जरूरतों के हिसाबा से आप अपनी पूरी सेवा देने को तैयार रहेंगे। कॉरपोरटीकरण के इस जमाने में आउटसोर्सिग का काम लंबे समय के बदलाव के तौर पर आ चुका है। इसलिए बतौर कर्मचारी आपको अपनी बेहतरी के लिए इन बदलावों के हिसाब से अपने अंदर प्रतिस्पर्धिता का भाव जिंदा रखना होगा। कर्मचारी को अपने को वर्तमान समय में तथा भविष्य में अपने को लाभान्वित करने के लिए इस चुनौती को स्वीकार करना होगा।

चौथे सूत्र के तौर पर आपको कुछ जोखिम लेने के लिए हमेशा तैयार रहना होगा। आप अपने करियर के वर्तमान भाव में संतुष्ट रहने को छोड़ने की कोशिश कीजिए। बेहतर करियर के लिए आप अपनी जिम्मेदारी से कभी भी पीछे हटने की कोशिश नहीं करें। आप अपना बेशकीमती समय इस चक्कर में बर्बाद न करें कि आपको भविष्य में बेहतर मिलने की कुछ उम्मीद है या फिर इस बात का इंतजार भी मत कीजिए कि भविष्य में आपकी कंपनी में भविष्य में कुछ आपके लिए कुछ बेहतर होने वाला है।

आंटी मेमे का कहना है कि जीवन एक गुलदस्ते की तरह होता है और अधिकतर गरीब मरने को अभिशप्त होते हैं। आप अगर अपनी कुर्सी मेज तक नहीं ले जाते हैं तो आप निश्चित तौर पर लगातार भूखे और उपेक्षित महसूस करते रहेंगें। पांचवे सूत्र के तौर पर मैं यह कहना चाहूंगी कि आप अपने पर भरोसा करना सीखें। काम करने के दौरान अगर आपको परिस्थितियां अनुकूल नहीं लगे तो अपने मन की सुने। ऐसी स्थितियों में तर्क को ज्यादा तव्वजो नहीं दें। आप किसी काम का बीड़ा अपने ऊपर उठाते हैं तो आपका आत्मविव्श्रास डगमगाने लगता है और ऐसी परिस्थितियां आपको कमजोर करने की कोशिश करती है। इन हालात में आपको पता चलता है कि आपके मन में जो बात हो रही थी, वही साकार होने लगती है। आपको लगने लगता है कि आप सही थे(टॉनी बेसन,बिजनेस भास्कर,16.07.2008)।

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