बहुत बेवफा निकले सभी दोस्त। अब क्या करें? उनसे करें दोस्ती? अगर यह सवाल आपके मन को बेचैन कर रहा है तो आपके लिए एक कभी दग़ा न देने वाला दोस्त है हमारे पास। यह दोस्त हमेशा साथ देगा। आपके अकेलेपन को दूर करेगा और मन लगाएगा और आपको जिंदगी की तमाम मुश्किलों को आसान बनाने में मददगार भी साबित होगा। बस सब कुछ आपके अच्छे चुनाव पर निर्भर है। इस सबसे अच्छे दोस्त का नाम है किताब। यह इंसान की सबसे अच्छी दोस्त साबित होती रही हैं। ये ऐसी दोस्त हैं जिन पर एक बार खरीदने का मामूली खर्च तो होता है पर बाद में ना तो बेतहाशा फोन का बेलेंस खर्च होता है और ना ही ये आपसे कोई ट्रीट मांगती हैं। अपनी इस दोस्त के लिए आपको समय जरूर निकालना होगा। और समय भी ऐसा जिसे आप खाली बिताते हुए बोर होते हैं। जैसे दफ्तर से घर आने जाने का समय। इसका साथ उस दौरान हर बोरियत से बचाता है। तो अपनाइए ये कुछ टिप्स और बन जाइए अपनी प्रिय किताबों के दोस्त। - आप इसे हमेशा अपने पास हमेशा आसानी से रख सकते हैं। - अगर आपको नींद नहीं आ रही तो आप कुछ देर किताब के साथ बिताएं। अनुभव बताते हैं कि पढ़ते-पढ़ते बेहतर नींद आ जाती है। इसलिए अच्छा होगा यदि आप नींद न आने पर कुछ पढ़ने की आदत को पकाएं। - रोज जिस समय जागते हैं, उससे पंद्रह मिनट पहले जागकर भी इस दोस्त पुस्तक के पन्ने पलट सकते हैं। वैसे भी अखबार तो आप सुबह पढ़ते ही होंगे। - अचानक जब अकेलापन महसूस हो तो अपने पास रखी पुस्तक को पढ़कर उसे बेहतर साथी ही महसूस करेंगे। - किसी के इंतजार में भी बोरियत महसूस कर रहे हैं तो उस पर नाराज होने की बजाय पुस्तक पढ़कर अपना ब्लड प्रेशर नार्मल रख सकते हैं। - यदि अस्वस्थ हैं और डॉक्टर के पास भीड़ रहती है तो वहां भी आपकी पुस्तक साथ देगी और रोग की परेशानी से आपका ध्यान बंटाकर रखेगी। - भारी ट्रैफिक जाम हो, आपकी बस या गाड़ी खराब हो जाए या फिर आने वाली ट्रेन लेट हो तब भी किसी अच्छी किताब का वाचन कर इस बुरी परिस्थिति को कोसने से आपको पुस्तक बचाएगी और साथ निभाएगी ज्ञान और मनोरंजन का जरिया बनी रहेगी। बोरियत से खुद को बचाने में यह कारगर दोस्त होगी(हिंदुस्तान,दिल्ली,26.9.2010)।
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30 सितंबर 2010
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