पंजाब शिक्षा विभाग ने हाल ही में प्रमोट हुए प्रिंसिपलों के साथ ऐसा मजाक किया है जो अब उनके गले नहीं उतर रहा। विभाग ने करीब चार माह पहले राज्य भर में 725 लेक्चरार को प्रमोट करके प्रिंसिपल बनाया था अब उनमें से करीब 400 प्रिंसिपल को फिर से लेक्चरार बनाने का फरमान जारी कर दिया है।
इस अजीबो गरीब फरमान के बाद प्रिंसिपल साहिब को आफिस में बैठने के बजाए फिर से क्लास रूम में पढ़ाना होगा। शिक्षा विभाग ने लेक्चरार की जो सिन्योरिटी लिस्ट जारी की है उसमें उन लोगों के नाम पीछे चले गए हैं जिनका प्रमोशन हो चुका है।
सरकार के इस फैसले के खिलाफ रिवर्ट होने वाले प्रिंसिपल और लेक्चरार ने विभाग के खिलाफ कोर्ट जाने के साथ संघर्ष छेड़ने का मन बना लिया है। पूर्व में राज्य के अधिकतर स्कूलों में प्रिंसिपल के पद खाली पड़े थे। खाली पड़े पदों को भरने के लिए सिन्योरिटी तय करने के लिए शिक्षा विभाग ने डायरेक्टर जनरल स्कूल एजुकेशन कृष्ण कुमार के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई थी।
कमेटी ने आज ही सिन्योरिटी लिस्ट एजुकेशन सेक्रेटरी सी राउल को सौंप दी है। इसमें फेर बदल कर प्रमोट होने के बाद फिर से प्रिंसिपलों को वापस कर दिया जाएगा। विभाग के इस फैसले से प्रिंसिपल और लेक्चरार में खासा रोष है। गजटेड एजुकेशन स्कूल एसोसिएशन के प्रधान सर्बजीत सिंह तूर का कहना है कि इसे तैयार करने में नियमों की अनदेखी की गई है।
उन्होंने बताया कि विभाग ने पांच अक्तूबर तक का समय दिया है। दो और तीन अक्तूबर स्कूलों में छुट्टियां हैं और चार तारीख को दस्तावेज पूरे करना संभव नहीं है। इसके लिए वो वकीलों से संपर्क कर रहे हैं और पांच अक्तूबर को राज्य भर के लेक्चरार और प्रमोट हुए प्रिंसिपल डीजीएसई के दफ्तर का घेराव करेंगे। चंद लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखा गया है(राजेश भट्ट,दैनिक भास्कर,लुधियाना,3.10.2010)।
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