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05 अक्टूबर 2010

डीयूःकोबाल्ट-60 मामले के जिम्मेदार शिक्षकों का पता लगाने को एक और उप-समिति बनी

रेडियोधर्मी पदार्थ कोबाल्ट ६० के इस्तेमाल में लापरवाही बरते जाने पर दिल्ली विश्वविद्यालय ने एक और सब-कमेटी बनाने का निर्णय लिया है। यह कमेटी उन शिक्षकों का पता लगाएगी जो इस मामले में जिम्मेदार रहे हैं। ऐसे लोगों को आगे किसी भी तरह का प्रशासनिक पद नहीं दिया जाएगा।

विश्वविद्यालय में सोमवार को कोबाल्ट ६० लेकर कार्यकारी परिषद की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में कुलपति प्रो दीपक पेंटल जैसे ही काउंसिल हॉल में पहुंचे उनका राजीव रे और एससी पांडा जैसे परिषद के सदस्यों ने विरोध किया। उन्हें अवैध कुलपति बताकर अंदर आने का विरोध किया। ऐसे सदस्यों को प्रो पेंटल ने मार्शल की मदद से फौरन हटाया। राजीव रे ने बताया कि प्रो पेंटल का कार्यकाल ३० अगस्त को ही खत्म हो गया है। वे गलत तरीके से पद पर काबिज हैं और गैर कानूनी तरीके से इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। उन्हें यहां आने का कोई हक नहीं है। सदस्यों ने कोबाल्ट ६० पर प्रो एससी पंचोली की अध्यक्षता में दी गई जांच रिपोर्ट को भी सिरे से खारिज कर दिया।

सदस्यों का कहना है कि यह कमेटी कार्यकारी परिषद ने नहीं बनाई है। इसे प्रो पेंटल ने अपने को बचाने के लिए खुद को मनमाने तरीके से गठित किया है। इस कमेटी की रिपोर्ट विश्वविद्यालय समुदाय को मान्य नहीं है। कोबाल्ट ६० के मामले में कुलपति खुद एक अभियुक्त हैं। वे इस तरह की कमेटी नहीं गठित कर सकते।

किरोड़ीमल कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक इंदरमोहन कपाही ने प्रो पेंटल की रिपोर्ट की वैधता पर कई सवाल उठाए हैं। इस रिपोर्ट पर उन्होंने कहा कि प्रो पेंटल ने खुद को बचाने के लिए इसे तैयार करवाया है। कोबाल्ट ६० की नीलामी उनकी स्वीकृति से हुआ है। इसमें खुद अभियुक्त हैं। दूसरी बात यह कि रिपोर्ट में कमेटी की जांच से जुड़े सवाल जवाब का ब्योरा भी नहीं है। किन लोगों से पूछताछ हुई इसका भी ब्योरा नहीं है। इसलिए यह जांच रिपोर्ट वैध नहीं है।

उधर प्रशासन ने सदस्यों के हंगामे और विरोध के बावजूद पंचोली कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए एक और उपसमिति बना दी है । तीन सदस्यों वाली यह उपसमिति बनाने के लिए फिर से कुलपति को अधिकृत किया गया है। पंचोली ने जांच रिपोर्ट में जो सिफारिशें की हैं। उस दिशा में भी सुरक्षा और सावधानी को लेकर आगे की कार्रवाई होगी। जांच समिति की रिपोर्ट प्रशासन एटॉमिक एनर्जी नियामक बोर्ड और दिल्ली को देगा। बोर्ड से विश्वविद्यालय में छात्रों व शोधार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए रेडियोधर्मी पदार्थों पर लगाई पाबंदी हटाने का आग्रह भी करेगा(नई दुनिया,दिल्ली,5.10.2010)।

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