इंटरनेट यूजर के बीच सोशल नेटवर्किंग अपनी गहरी पैठ बना चुका है। कंपनी बड़ी हो या छोटी, वे हमेशा अपने ब्रांड के प्रचार-प्रसार का सुगम एवं आसानी से लोगों तक पहुंचाने का जरिया ढूंढ़ने में सबसे आगे रहती हैं। सोशल नेटवर्किंग का नाम आते ही जेहन में फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब जैसी साइटों का नाम सबसे पहले आता है।
ये सभी व्यक्तिगत साइट्स हैं, वहीं लिंक्डइन को व्यावसायिक मद्देनजर बेहतर माना जाता है। आप इनमें से किसी भी साइट पर जाएंगे तो अधिकांश ब्रांड दिख जाएंगे। इन ब्रांड्स का प्रभावी एवं औपचारिक तरीकों से सोशल साइट्स पर कंपनियां एवं ब्रांड्स जिस तरह प्रमोशन कर रही हैं, उनके पीछे सोशल मीडिया मैनेजर का ही सबसे अहम रोल होता है।
आज विश्व की कुल जनसंख्या के लगभग 50 प्रतिशत लोग 30 साल से कम उम्र के हैं, जिनमें से अधिकांश प्रतिदिन अपना कीमती वक्त सोशल नेटवर्किंग पर बिताते हैं। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट पर यकीन करें तो भारत में लगभग कुल इंटरनेट यूजर्स में से लगभग ढाई करोड़ युवा सोशल मीडिया साइट्स पर सक्रिय रहते हैं। ऐसे में किसी भी ब्रांड के प्रमोशन के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट सबसे ज्यादा लोकप्रिय माध्यम बन गई हैं। सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता से ही सोशल मीडिया मैनेजर की मांग का ग्राफ तेजी से ऊपर आया है।
कार्यप्रणाली
किसी भी सोशल नेटवर्किंग साइट पर किसी ब्रांड की प्रस्तुति सोशल मीडिया यूजर के दिमाग पर पॉजिटिव एवं निगेटिव दोनों ही प्रभाव छोड़ सकती हैं। ऐसे में किसी ब्रांड के पॉजिटिव प्रभाव के लिए सही प्रस्तुति अहम होती है, जिसे सही तरीके से उस साइट पर एक निपुण व अनुभवी सोशल मीडिया मैनेजर ही प्रस्तुत कर सकता है।
सोशल मीडिया मैनेजर का काम कम शब्दों में प्रभावी ढंग से किसी ब्रांड्स को प्रस्तुत कर इंटरनेट यूजर को ब्रांड वैल्यू के प्रति आकर्षित करना है। बात इतने पर ही खत्म नहीं हो जाती। सोशल मीडिया मैनेजर ब्रांड के क्राइसिस सॉल्यूशन को भी बेहतर ढंग से सुलझाने में मददगार है। यानी सोशल मीडिया मैनेजर का काम कस्टमर एवं कलाइंट के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना है। एक सोशल मीडिया मैनेजर टू वे कम्युनिकेशन का काम करता है। वह इसके लिए सही चैनल तलाशता है, फिर अपने प्रोडक्ट को अर्थपूर्ण योजना के साथ लोगों के सामने पेश करता है।
योग्यता एवं वेतन
यदि आप सोशल मीडिया में करियर बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको एक सोशल एवं आउटगोइंग व्यक्ति होना चाहिए। आपमें विश्लेषण एवं आउट ऑफ बॉक्स सोचने की क्षमता हो। बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स का होना सोशल मीडिया मैनेजर के लिए बेहद जरूरी है। आप में मनोवैज्ञानिक समझ एवं कॉमनसेंस प्लस प्वाइंट हो सकता है।
अच्छे सोशल मीडिया मैनेजर का स्नातक होना जरूरी है। ऑफिस प्रोडक्ट्स एवं ऑनलाइन मार्केटिंग में अच्छी जानकारी वाले आदर्श सोशल मीडिया मैनेजर हो सकते हैं। सोशल मीडिया मैनेजर बनने के लिए कम्युनिकेशंस बैकग्राउंड के साथ इंटरनेट का बेहतर जानकार होना जरूरी है। सोशल मीडिया मैनेजर की शुरुआती सैलरी 15 से 20 हजार रुपए तक होती है, जो उसके अनुभव एवं क्षमता के मुताबिक बढ़ती चली जाती है और एक सोशल मीडिया मैनेजर तरक्की कर उस कंपनी के डिजिटल हेड तक के पद पर पहुंच सकते हैं।
कोर्स
सोशल मीडिया मैनेजर न्यू मीडिया के तहत आता है। यह वेब जर्नलिज्म से ही जुड़ा है। सोशल मीडिया मैनेजर की मांग को देखते हुए कई संस्थानों ने इसके लिए बाकायदा अलग कोर्स भी शुरू किए हैं। हाल में इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने वैट मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर इंडिया का पहला सोशल मीडिया कोर्स शुरू किया है।
4 सप्ताह के इस प्रोग्राम में छात्रों को सोशल मीडिया से जुड़े सभी पहलुओं की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अलावा, मुंबई स्थित सोशल मीडिया क्लब से भी इसकी ट्रेनिंग ली जा सकती है। इनमें से प्रमुख हैं- वैट मीडिया प्राइवेट लिमिटेड www.socialmediacourse.in और सोशल मीडिया क्लब www.smcmumbai.com जहां से विस्तृत जानकारी हासिल की जा सकती है।
कम्युनिकेशन स्किल्स हैं जरूरी
जैसा कि नाम से जाहिर है, विचारों का आदान-प्रदान करना अहम है। उसका नेटवर्क कहां तक है, उसने कितना रिसर्च किया है, उसमें तुलनात्मक दृष्टि है या नहीं। एक सोशल मीडिया मैनेजर की मुख्य चुनौती यह है कि वह कैसे एक अर्थपूर्ण संवाद तैयार कर सोशल मीडिया यूजर के साथ बेहतर संपर्क साधे, क्योंकि वेब पर किसी भी ब्रांड का प्रमोशन इसी पर निर्भर है।
सोशल मीडिया मैनेजर को कस्टमर एंव क्लाइंट के साथ ऑनलाइन कन्वर्सेशन एवं कम्युनिकेशन द्वारा व्यस्त रहना पड़ता है। उसे सतर्क रहना होता है कि कहीं नकारात्मक प्रतिक्रिया न आ जाए। सोशल मीडिया मैनेजर संवाद एवं संपर्क जिन माध्यमों से करता है उनमें ऑनलाइन कन्वर्सेशन तैयार करना, खुद के लिए ब्रांडेड कम्युनिटी तैयार करना, प्रेजेंटेशंस, एवं ब्लॉग्स प्रमुख हैं। और इन सबमें सबसे अहम है वायरल इफेक्ट्स - जैसे फिल्म दीवार के चर्चित डायलॉग ‘मेरे पास माँ है’ को लेकर, या फिर काटरून फिल्म्स के जरिए कहानियों में पिरोकर पेश कर सकते हैं। ट्विटर, फेसबुक के अलावा ‘यारी’ और ‘बिग अड्डा’ भी पॉपुलर हो रही हैं।
‘बालेंदु शर्मा दाधीच, सूचना प्रौद्योगिकी के जानकार’
(फजले गुफरान,हिंदुस्तान,दिल्ली,04.10.2010)
ये सभी व्यक्तिगत साइट्स हैं, वहीं लिंक्डइन को व्यावसायिक मद्देनजर बेहतर माना जाता है। आप इनमें से किसी भी साइट पर जाएंगे तो अधिकांश ब्रांड दिख जाएंगे। इन ब्रांड्स का प्रभावी एवं औपचारिक तरीकों से सोशल साइट्स पर कंपनियां एवं ब्रांड्स जिस तरह प्रमोशन कर रही हैं, उनके पीछे सोशल मीडिया मैनेजर का ही सबसे अहम रोल होता है।
आज विश्व की कुल जनसंख्या के लगभग 50 प्रतिशत लोग 30 साल से कम उम्र के हैं, जिनमें से अधिकांश प्रतिदिन अपना कीमती वक्त सोशल नेटवर्किंग पर बिताते हैं। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट पर यकीन करें तो भारत में लगभग कुल इंटरनेट यूजर्स में से लगभग ढाई करोड़ युवा सोशल मीडिया साइट्स पर सक्रिय रहते हैं। ऐसे में किसी भी ब्रांड के प्रमोशन के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट सबसे ज्यादा लोकप्रिय माध्यम बन गई हैं। सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता से ही सोशल मीडिया मैनेजर की मांग का ग्राफ तेजी से ऊपर आया है।
कार्यप्रणाली
किसी भी सोशल नेटवर्किंग साइट पर किसी ब्रांड की प्रस्तुति सोशल मीडिया यूजर के दिमाग पर पॉजिटिव एवं निगेटिव दोनों ही प्रभाव छोड़ सकती हैं। ऐसे में किसी ब्रांड के पॉजिटिव प्रभाव के लिए सही प्रस्तुति अहम होती है, जिसे सही तरीके से उस साइट पर एक निपुण व अनुभवी सोशल मीडिया मैनेजर ही प्रस्तुत कर सकता है।
सोशल मीडिया मैनेजर का काम कम शब्दों में प्रभावी ढंग से किसी ब्रांड्स को प्रस्तुत कर इंटरनेट यूजर को ब्रांड वैल्यू के प्रति आकर्षित करना है। बात इतने पर ही खत्म नहीं हो जाती। सोशल मीडिया मैनेजर ब्रांड के क्राइसिस सॉल्यूशन को भी बेहतर ढंग से सुलझाने में मददगार है। यानी सोशल मीडिया मैनेजर का काम कस्टमर एवं कलाइंट के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना है। एक सोशल मीडिया मैनेजर टू वे कम्युनिकेशन का काम करता है। वह इसके लिए सही चैनल तलाशता है, फिर अपने प्रोडक्ट को अर्थपूर्ण योजना के साथ लोगों के सामने पेश करता है।
योग्यता एवं वेतन
यदि आप सोशल मीडिया में करियर बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको एक सोशल एवं आउटगोइंग व्यक्ति होना चाहिए। आपमें विश्लेषण एवं आउट ऑफ बॉक्स सोचने की क्षमता हो। बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स का होना सोशल मीडिया मैनेजर के लिए बेहद जरूरी है। आप में मनोवैज्ञानिक समझ एवं कॉमनसेंस प्लस प्वाइंट हो सकता है।
अच्छे सोशल मीडिया मैनेजर का स्नातक होना जरूरी है। ऑफिस प्रोडक्ट्स एवं ऑनलाइन मार्केटिंग में अच्छी जानकारी वाले आदर्श सोशल मीडिया मैनेजर हो सकते हैं। सोशल मीडिया मैनेजर बनने के लिए कम्युनिकेशंस बैकग्राउंड के साथ इंटरनेट का बेहतर जानकार होना जरूरी है। सोशल मीडिया मैनेजर की शुरुआती सैलरी 15 से 20 हजार रुपए तक होती है, जो उसके अनुभव एवं क्षमता के मुताबिक बढ़ती चली जाती है और एक सोशल मीडिया मैनेजर तरक्की कर उस कंपनी के डिजिटल हेड तक के पद पर पहुंच सकते हैं।
कोर्स
सोशल मीडिया मैनेजर न्यू मीडिया के तहत आता है। यह वेब जर्नलिज्म से ही जुड़ा है। सोशल मीडिया मैनेजर की मांग को देखते हुए कई संस्थानों ने इसके लिए बाकायदा अलग कोर्स भी शुरू किए हैं। हाल में इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने वैट मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर इंडिया का पहला सोशल मीडिया कोर्स शुरू किया है।
4 सप्ताह के इस प्रोग्राम में छात्रों को सोशल मीडिया से जुड़े सभी पहलुओं की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अलावा, मुंबई स्थित सोशल मीडिया क्लब से भी इसकी ट्रेनिंग ली जा सकती है। इनमें से प्रमुख हैं- वैट मीडिया प्राइवेट लिमिटेड www.socialmediacourse.in और सोशल मीडिया क्लब www.smcmumbai.com जहां से विस्तृत जानकारी हासिल की जा सकती है।
कम्युनिकेशन स्किल्स हैं जरूरी
जैसा कि नाम से जाहिर है, विचारों का आदान-प्रदान करना अहम है। उसका नेटवर्क कहां तक है, उसने कितना रिसर्च किया है, उसमें तुलनात्मक दृष्टि है या नहीं। एक सोशल मीडिया मैनेजर की मुख्य चुनौती यह है कि वह कैसे एक अर्थपूर्ण संवाद तैयार कर सोशल मीडिया यूजर के साथ बेहतर संपर्क साधे, क्योंकि वेब पर किसी भी ब्रांड का प्रमोशन इसी पर निर्भर है।
सोशल मीडिया मैनेजर को कस्टमर एंव क्लाइंट के साथ ऑनलाइन कन्वर्सेशन एवं कम्युनिकेशन द्वारा व्यस्त रहना पड़ता है। उसे सतर्क रहना होता है कि कहीं नकारात्मक प्रतिक्रिया न आ जाए। सोशल मीडिया मैनेजर संवाद एवं संपर्क जिन माध्यमों से करता है उनमें ऑनलाइन कन्वर्सेशन तैयार करना, खुद के लिए ब्रांडेड कम्युनिटी तैयार करना, प्रेजेंटेशंस, एवं ब्लॉग्स प्रमुख हैं। और इन सबमें सबसे अहम है वायरल इफेक्ट्स - जैसे फिल्म दीवार के चर्चित डायलॉग ‘मेरे पास माँ है’ को लेकर, या फिर काटरून फिल्म्स के जरिए कहानियों में पिरोकर पेश कर सकते हैं। ट्विटर, फेसबुक के अलावा ‘यारी’ और ‘बिग अड्डा’ भी पॉपुलर हो रही हैं।
‘बालेंदु शर्मा दाधीच, सूचना प्रौद्योगिकी के जानकार’
(फजले गुफरान,हिंदुस्तान,दिल्ली,04.10.2010)
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