महामारी का रूप लेते डेंगू वाहक एडिस मच्छर के प्रजनन की जांच के लिए दिल्ली नगर निगम ने 3200 कर्मचारियों को राजधानी के विभिन्न इलाकों में तैनात तो कर रखा है, लेकिन ये कर्मचारी पिछले तीन महीने से बगैर वेतन के ही कार्य कर रहे हैं।
दिल्ली जैसे महंगे शहर में बगैर वेतन के काम करना इन कर्मचारियों के लिए बेहद मुश्किल होता जा रहा है। ज्ञात हो कि दिल्ली में डेंगू के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। रोजाना 80 से 100 मरीजों के मामले प्रकाश में आ रहे हैं, अब तक 3468 लोग इस बीमारी के शिकार हो चुके हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन के मद्देनजर अधिकांश स्वास्थ्य कर्मचारियों को खेलगांव के अलावा अन्य खेलस्थलों तथा प्रशिक्षण केंद्र और आसपास के इलाकों में तैनात किया गया है। इन कर्मचारियों का मासिक वेतन 5850 रुपए हैं, लेकिन फिलहाल दिल्ली के 12 जोनों में से महज तीन जोनों, शाहदरा उत्तरी जोन, सिविल लाइंस जोन और शहरी जोन के स्वास्थ्य कर्मचारियों को ही अगस्त तक का वेतन दिया गया है, जबकि शाहदरा दक्षिणी जोन, मध्य जोन, दक्षिण जोन, करोलबाग जोन, पश्चिमी जोन, नजफगढ़ जोन, नरेला जोन, रोहिणी जोन और सदर पहाड़गंज जोन के स्वास्थ्य कर्मचारी जुलाई से अपने वेतन का इंतजार कर रहे हैं।
बगैर वेतन के ही इन कर्मचारियों को राजधानी के विभिन्न इलाकों में डेंगू वाहक एडिस मच्छरों की ब्रीडिंग की जांच के लिए भटकना पड़ता है। अत्यधिक कम वेतन में काम कर रहे इन कर्मचारियों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एंटी मलेरिया कर्मचारी संघ के महासचिव अशोक चौधरी का कहना है कि महंगाई की वजह से कर्मचारियों को पहले ही परेशानियां झेलनी पड़ रही है।
ऐसे में तीन महीने से वेतन नही मिलने से कर्मचारियों की परेशानियां और बढ़ गई है। दिल्ली नगर निगम के महापौर पृथ्वीराज साहनी का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बाबत वह जल्द ही निगमायुक्त से बात करेंगे। उधर, निगम में विपक्ष के नेता जयकिशन शर्मा ने कहा कि इन कर्मचारियों का वेतन समय से मिलना चाहिए(बलिराम सिंह,भास्कर डॉट कॉम,दिल्ली,3.10.2010)।
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