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03 अक्टूबर 2010

रैगिंग पर डीयू अपने फैसले पर कायम

किरोड़ीमल कॉलेज में पिछले साल हुई रैगिंग के मामले में यूनिवर्सिटी ने थर्ड ईयर के दो स्टूडेंट्स
को निकाल दिया था। इन स्टूडेंट्स ने हाई कोर्ट में अपील की और कोर्ट ने पिछले दिनों इन्हें री-एडमिशन देने का आदेश दिया। लेकिन यूनिवर्सिटी निकाले गए दोनों स्टूडेंट्स को फिर से एडमिशन देने के हक में नहीं है। यूनिवर्सिटी ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डबल बेंच में अपील कर दी है और कहा है कि रैगिंग पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए इस तरह के सख्त फैसले लिए जाने जरूरी हैं।

वाइस चांसलर प्रोफेसर दीपक पेंटल ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील करने के बारे में बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश हैं कि रैगिंग करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाए। उन्होंने कहा कि देश में रैगिंग के कारण कई स्टूडेंट्स की जान जा चुकी है और डीयू अब किसी तरह की ढिलाई नहीं बरत सकता। केएमसी रैगिंग मामले के आरोपी दो स्टूडेंट्स के बारे में उनका कहना है कि उन स्टूडेंट्स के लिए अब डीयू में कोई जगह नहीं है। प्रो. पेंटल का कहना है कि यूनिवर्सिटी ने तो अपील कर दी है और बाद में कोर्ट का जो भी फैसला होगा, उसका पालन किया जाएगा। यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार (लीगल) एम.ए. सिकंदर ने बताया कि यूनिवर्सिटी की अपील पर हाई कोर्ट की डबल बेंच जल्द ही सुनवाई करेगी। यूनिवर्सिटी ने अपनी अपील में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अलावा रैगिंग के खिलाफ बनी राघवन कमिटी और यूजीसी के दिशा-निर्देशों का हवाला भी दिया है। उनका कहना है कि सभी दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि रैगिंग के दोषियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए।

किरोड़ीमल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. भीम सेन सिंह का कहना है कि यूनिवर्सिटी जो भी फैसला करेगी, उसी के मुताबिक ही आगे कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि पिछले साल कॉलेज ने एक फ्रेशर की शिकायत पर रैगिंग के इस मामले में बीएससी थर्ड ईयर के दो स्टूडेंट्स को निकाल दिया था और यूनिवर्सिटी ने भी इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी थी। उसके बाद ये स्टूडेंट्स कोर्ट में गए, लेकिन यूनिवर्सिटी अपने सख्त फैसले पर अभी कायम है(भूपेंद्र,नवभारत टाईम्स,दिल्ली.3.10.2010)।

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