हमारी अर्थव्यवस्था में कृषि का अहम योगदान है। आज वैश्वीकरण के इस दौर में हर क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और कृषि सेक्टर भी इससे अछूता नहीं है। इस वजह से कृषि सेक्टर का समुचित प्रबंधन भी जरूरी हो गया है। इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की खातिर आपके लिए सिर्फ एग्रीकल्चर ग्रेजुएट होना ही काफी नहीं है। आज इस सेक्टर में ऐसे लोगों को मांग लगातार बढ़ रही है, जिन्हें इस क्षेत्र की बुनियादी जानकारी के अलावा मैनेजमेंट की भी अच्छी समझ हो। इस लिहाज से एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स करना आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। इस कोर्स की अवधि दो साल होती है।
योग्यता- एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने के लिए आपके पास कृषि से संबंधित विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। एग्रीकल्चर, फूड टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग, डेयरी टेक्नोलॉजी, एनिमल हस्बेंड्री, हॉटीकल्चर, फिशरीज या फॉरेस्ट्री जैसे विषयों में स्नातक डिग्रीधारी छात्र इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
चयन की प्रक्रिया- ज्यादातर शिक्षण संस्थान प्रवेश परीक्षा के माध्यम से छात्रों का चयन करते हैं। प्रवेश परीक्षा अमूमन दो चरणों में होती है। प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। इसके बाद ही अंतिम रूप से छात्रों को चयनित किया जाता है। इस कोर्स के जरिए छात्र जनरल मैनेजमेंट, संस्थागत व्यवहार, वित्तीय प्रबंधन, मार्केटिंग ऑफ एग्रीकल्चरल इनपुट्स, एग्रीकल्चरल आउटपुट मार्केटिंग, बिजनेस संबंधी नियम-कायदे तथा आर्थिक माहौल व नीतियों के बारे में जानते हैं। इसके अलावा उन्हें कृषि सेक्टर से जुड़ी आधुनिक तकनीकों व प्रबंधन के तौर-तरीकों को सीखने में मदद मिलती है, जिन्हें वे प्रोडक्शन, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, हार्वेस्ट मैनेजमेंट समेत अन्य कई कार्यों में लागू कर सकते हैं।
शिक्षण संस्थान-
देश में कई संस्थान एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स करवाते हैं। कुछ प्रमुख संस्थान निम्न हैं-
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग, जयपुर।
द इंस्टीट्यूट ऑफ एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, बीकानेर।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद व लखनऊ।
कॉलेज ऑफ एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट, पंतनगर।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट, हैदराबाद(बिजनेस भास्कर,दिल्ली,3.1.11)।
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