पंजाब पुलिस महकमे में कुछ भी संभव है। सब इंस्पेक्टर तरक्कियों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं विभाग कुछ अफसरों को लाभ पहुंचाने के लिए सिन्योरिटी लिस्ट से खिलवाड़ कर रही है। यदि यही पैटर्न चलता रहा तो 2011 में डायरेक्ट पीपीएस भर्ती अफसरों को उनकी ज्वाइनिंग से वर्षो पहले की तारीख से प्रमोशन मिलेगा।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के के स्पष्ट आदेश के बाद महकमे के नुमाइंदों ने नए ढंग से नई सूची जारी की है। इस सूची के विरोध में प्रमोटी पीपीएस अफसरों ने महकमे की इस सूची को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। इसकी सुनवाई फरवरी में है। प्रमोटी पीपीएस अफसरों के अनुसार नई सूची में डीआईजी रैंक के अफसरों को एसपी रैंक के अफसरों से नीचे कर दिया गया है। इतना ही नहीं फायदे के लिए पंजाब पुलिस रूल्स की भी अनदेखी हुई है।
ज्यादातर प्रमोटी पीपीएस अफसर 1993 या उससे पहले डीएसपी बने थे। नियमों के मुताबिक दो वर्ष तक प्रोबेशन पीरियड के बाद नियमों के तहत वह कनफर्म हो जाते हैं। 1994 के बाद से पंजाब में सीधे डीएसपी रैंक पर भर्ती नहीं हुई है। इससे पहले भी जो डायरेक्ट डीएसपी भर्ती हुए हैं उन्हें इस पद पर दशकों से सेवा दे रहे प्रमोटी अफसरों से सीनियर बना दिया गया। जो अफसर इंस्पेक्टर से प्रमोट होकर एसपी या एआईजी रैंक तक पहुंच चुके हैं उन्हें डी-कनफर्म करके टेबल चार सूची में डाल दिया गया है।
प्रमोटी अफसरों का तर्क है कि तरक्की के लिए 80 प्रतिशत पद प्रमोटी अफसरों से भरे जाते हैं और 20 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती होती है। महकमे ने इस नियम का खुलेआम उल्लंघन किया है। सीधे भर्ती अफसरों को तरक्की देकर सीनियर पदों पर आसीन कर दिया गया।
प्रभावितों को नहीं मिला लाभ
प्रमोटी पीपीएस अफसरों के अनुसार 1994 के बाद से अगर भर्तियां नहीं हुई हैं तो इसका नुकसान उन्हें हुआ है जो अब 28 वर्ष की आयु सीमा पार कर चुके हैं या वह मुलाजिम हैं जो लंबे अर्से से महकमे में कार्यरत है। अगर 1994 के बाद से सीधी भर्तियां होती तो वह भी इसमें आवेदन कर सकते थे। प्रमोटी पीपीएस अफसर सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद लगाकर बैठे हैं(तरसेम सिंह दियोगण,दैनिक भास्कर,लुधियाना,25.1.11)।
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