आईएमएस इंस्टिट्यूट में गुरुवार को बीटेक स्टूडेंट्स ने इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर प्रदर्शन किया। स्टूडेंट्स का आरोप था कि डायरेक्टर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उनसे दुर्व्यवहार करते हैं। छात्रों का कहना था कि डायरेक्टर करियर खराब करने की धमकी देकर उन्हें जबरदस्ती गंजा भी कराया था। इस तानाशाही के खिलाफ जब स्टूडेंट्स विरोध करते हैं तो उन्हें प्रताडि़त किया जाता है। मामले की जानकारी मिलते ही डीएम और एसएसपी भी मौके पर पहुंचे और स्टूडेंट्स से बातचीत की। डीएम के आदेश पर मामले की मजिस्टे्रटी जांच शुरू हो गई है। वहीं कॉलेज मैनेजमेंट के वाइस चेयरमैन का कहना है कि जिन स्टूडेंट्स की उपस्थिति बहुत कम है, उन्होंने ही ये आरोप लगाए हैं। कॉलेज मैनेजमेंट पूरी तरह से जीबीटीयू के निर्देशों का पालन कर रहा है। यदि डायरेक्टर ने स्टूडेंट्स के साथ दुर्व्यवहार किया है तो उन्हें पहले शिकायत लेकर आना चाहिए था। उधर, कॉलेज मैनेजमेंट ने करीब दो दर्जन स्टूडेंट्स को एग्जाम देने से रोक दिया है।
डासना स्थित आईएमएस इंस्टिट्यूट में गुरुवार सुबह से ही स्टूडेंट्स का हंगामा शुरू था। स्टूडेंट्स ने कॉलेज के एक डायरेक्टर की तानाशाही के खिलाफ क्लास का बहिष्कार कर दिया। बीटेक स्टूडेंट्स का आरोप था कि कॉलेज मैनेजमेंट की ओर से जो डायरेक्टर बनाया गया है, वह स्टूडेंट्स के वेलफेयर के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। स्टूडेंट्स के साथ बदतमीजी की जाती है। नवंबर माह में सेमेस्टर एग्जाम से पहले डायरेक्टर ने पैरंट्स को अपने कमरे में बुलाकर उनके साथ भी बदतमीजी की थी। पैरंट्स को धमकाया गया कि वह अपने बच्चों को संभालें, यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनका करियर बर्बाद कर दिया जाएगा। गर्ल्स के साथ भी बदसलूकी की जाती है। यह सब काफी पहले से किया जा रहा है। खासकर एससी/एसटी स्टूडेंट्स के साथ भेदभाव किया जाता है। उन्हें जातिसूचक शब्द कहे जाते हंै। दो-तीन महीने पहले कुछ स्टूडेंट्स को जबरदस्ती गंजा करने का दबाव बनाया गया। स्टूडेंट्स से कहा गया कि जब तक बाल नहीं कटाओगे तब तक एडमिट कार्ड नहीं दिया जाएगा। विवश होकर स्टूडेंट्स को गंजा होना पड़ा। कुछ दिनों पहले फीस जमा करने में लेट होने पर छात्रों को प्रताडि़त किया गया। हालांकि बाद में फीस जमा कर दी गई थी। डायरेक्टर की ओर से आए दिन स्टूडेंट्स को प्रताडि़त किया जाता है। जिसका नतीजा यह रहा है कि स्टूडेंट्स को प्रदर्शन करना पड़ा।
प्रदर्शन की सूचना मिलने पर डीएम हृदयेश कुमार और एसएसपी रघुवीर लाल भी कॉलेज पहुंचे और स्टूडेंट्स को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया। इधर एसडीएम सदर के अधीन घटना की मजिस्टे्रटी जांच के आदेश दिए गए। एसडीएम सदर महेंद्र प्रसाद व सीओ डॉ. राजीव कुमार ने स्टूडेंट्स का बयान कॉलेज कैंपस में ही दर्ज किया।
उधर , कॉलेज के वाइस चेयरमैन राकेश छारिया ने बताया कि कॉलेज में एजुकेशन सिस्टम जीबीटीयू के मुताबिक फॉलो किया जाता है। कॉलेज के करीब 70 स्टूडेंट्स की उपस्थिति कम थी , ऐसे में उन्हें एग्जाम से रोका गया था। आधे से अधिक स्टूडेंट्स के पैरंट्स ने कॉलेज आकर बातचीत की तो उन्हें एग्जाम देने दिया गया। जबकि दो दर्जन से अधिक स्टूडेंट्स का रोका गया। जहां तक स्टूडेंट्स को गंजा करने की बात है तो वह जबरदस्ती नहीं की गई। डायरेक्टर ने केवल उनसे बाल छोटा करने के लिए कहा था। जो बवाल मचाया गया है वह कुछ स्टूडेंट्स की शरारत है(नवभारत टाइम्स,गाजियाबाद,4.2.11)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।