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07 दिसंबर 2011

छह साल में 260 स्कूल बने माओवादियों का निशाना

सरकार की नीतियों के विरोध में आंदोलन करने का दंभ भरने वाले नक्सली मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे। माओवादियों ने छह सालों में लगभग 260 स्कूल ध्वस्त कर दिए। साथ ही इस अवधि में उन्होंने करीब 3836 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2006 से इस साल नवंबर के बीच नक्सली हिंसा के दौरान सबसे अधिक 131 स्कूल छत्तीसगढ़ में नष्ट हुए। झारखंड में 63 और बिहार में 46 स्कूलों को माओवादियों ने तबाह कर दिया। नक्सल प्रभावित छह राज्यों छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडि़सा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में 2006 में नक्सलियों ने 59 स्कूल ध्वस्त किए। 2007 में 43, 2008 में 25, 2009 में 71, 2010 में 39 और 2011 में (नवंबर तक) 21 स्कूल माओवादी हिंसा की भेंट चढ़ गए। यूनेस्को की ओर से जारी एक अलग रिपोर्ट में जनवरी से जुलाई 2009 के बीच नक्सली वारदात का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस दौरान झारखंड में 11 और बिहार में नौ स्कूल माओवादियों ने उजाड़ दिए। इस रिपोर्ट में बताया गया कि 2009 में नक्सलियों ने झारखंड और बिहार में कम से कम 50 स्कूलों पर हमले किए। अप्रैल 2009 में झारखंड के ही मंदर में एक बच्चे को नक्सलियों ने महज इसलिए कथित यातना दी क्योंकि उसने उनकी बाल ब्रिगेड में शामिल होने से इंकार कर दिया था। वहीं, माओवादियों ने इस साल न सिर्फ बडे़ पैमाने पर आम लोगों की हत्या की, बल्कि सुरक्षाबलों के कई जवान भी उनसे संघर्ष के दौरान शहीद हुए। नक्सलियों ने 124 सुरक्षा जवानों सहित 500 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया। सूत्रों के मुताबिक 2011 में नवंबर तक माओवादियों के साथ संघर्ष में सुरक्षाबलों के 124 जवान शहीद हो गए जबकि नक्सलियों ने 389 आम लोगों को मौत के घाट उतार दिया। 2010 में भी माओवादियों ने लगभग 626 आम नागरिकों की हत्या की थी जबकि उनके साथ संघर्ष के दौरान 277 सुरक्षा जवान शहीद हुए थे। सुरक्षाबलों की कार्रवाई में पिछले साल 277 माओवादी मारे गए। सूत्रों ने बताया कि 2011 और इससे पहले के छह साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाएंगे कि माओवादियों ने सुरक्षाबलों के जवानों सहित कुल 3836 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। उन्होंने कहा कि देश के नौ राज्य नक्सल हिंसा की चपेट में हैं। छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडि़सा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश नक्सल हिंसा से प्रभावित हैं। नक्सलियों के हाथों आम नागरिकों के मारे जाने की घटनाओं में छत्तीसगढ़ सबसे आगे है और इस साल अब तक लगभग 182 लोगों को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया। झारखंड में 137, महाराष्ट्र में 50, बिहार 49, उड़ीसा में 49 और पश्चिम बंगाल में 40 लोग मारे गए। सूत्रों ने कहा कि 2006 में भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का आकलन था कि नक्सलियों के 20 हजार से अधिक सशस्त्र कैडर जबकि 50 हजार नियमित कैडर हैं(दैनिक जागरण,दिल्ली,7.12.11)।

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