झारखंड में मुन्ना भाइयों की कमी नहीं है। मेडिकल-इंजीनियरिंग और जीपीएससी को तो छोडि़ए अब तो औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के दाखिले और प्रवेश परीक्षा में भी फर्जीवाड़ा होने लगा है। अलग अलग ट्रेड की परीक्षाओं में सौ से अधिक फर्जी छात्र धरे गए हैं। इन सभी के नाम काली सूची में दर्ज किए गए हैं। गोरखधंधे के पीछे एक ही रैकट का नाम सामने आया है। जांच में पता चला है कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा हाल के महीनों में आयोजित परीक्षाओं में अभ्यर्थियों ने जमकर फर्जीवाड़ा किया। जानकारी के अनुसार, चाईबासा में हो रही काउंसिलिंग में 40 से अधिक फर्जी छात्र धरे गए। इसी तरह धनबाद में पच्चीस, जमशेदपुर में 10 तथा साहेबगंज में 15 छात्र फर्जीवाड़े में पकड़े गए। परीक्षा में बैठा कोई और काउंसिलिंग में कोई और पहुंच गया। आवेदन पत्र में चिपकाए फोटो से फर्जी व वास्तविक छात्र दोनों का चेहरा मिलता था। सभी कुछ फोटोशाप तकनीक का सहारा लेकर हुआ। पकड़े जाने पर सभी ने स्वीकार किया कि उनके बदले किसी और ने परीक्षा दी थी। मेडिकल दाखिले में ही इस वर्ष आधा दर्जन फर्जी छात्र पकड़े गए। इनमें दो काउंसिलिंग के समय ही धरे गए, जबकि दो को शक के आधार पर बाद पकड़ा गया। एक छात्रा का प्रमाणपत्र जाली पाया गया। दो अन्य संदेह के घेरे में हैं। मेडिकल में 149वां रैंक लाने वाली बोकारो की मनीषा सिंह ने फर्जी आवासीय प्रमाणपत्र देकर एमबीबीएस में नामांकन लेने का प्रयास किया। अधिकारियों ने जांच के बाद उक्त प्रमाणपत्र को फर्जी बताया, जिसके बाद उसका नामांकन रद कर दिया गया। पिछले वर्ष भी मेडिकल के पांच फर्जी अभ्यथी पकड़े गए थे। इनमें आफताब आलम अंसारी, चंद्रराज प्रसाद, संजय कुमार शर्मा, मिशन मनोहर जायसवाल तथा प्रवीण कुमार शामिल हैं। इनमें से चार ने नामांकन के विभिन्न प्रक्रियाओं में अलग-अलग फोटो का इस्तेमाल किया, परीक्षा में कोई और शामिल हुआ जबकि मूल आवेदक कोई और निकला। दो अभ्यर्थियों के पतों की जांच की गई तो वहां उस नाम से कोई अभ्यर्थी नहीं निकला। एक ने तो अपने नाम से चार आवेदन भरे थे(नीरज अम्बष्ठ, दैनिक जागरण,रांची,२४.१०.२०१०)।
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