नए शिक्षकों की भर्ती उत्तर प्रदेश में 97000 नए शिक्षकों की भर्ती करने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से मंजूरी मिलना प्राथमिक शिक्षा के ढांचे को बल प्रदान करने के साथ-साथ शिक्षित बेरोजगारों को उत्साहित करने वाला भी है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि शिक्षकों की भर्ती शिक्षा अधिकार कानून के मानकों के तहत हो। यह शुभ संकेत है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शिक्षकों की भर्ती पात्रता परीक्षा के जरिये करने को मंजूरी प्रदान की है, लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि पात्रता परीक्षा से आशय प्रवेश परीक्षा के जरिये शिक्षकों की भर्ती से है। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि विगत में मेरिट के जरिये शिक्षकों की नियुक्ति की जो प्रक्रिया अपनाई गई उसमें अनेक अनियमितताएं सामने आई थीं। यह ठीक है कि राज्य सरकार शिक्षा अधिकार कानून पर अमल के लिए शिक्षकों की कमी दूर करने के उपाय कर रही है, लेकिन उसे इसका अहसास होना चाहिए कि कमी केवल शिक्षकों की ही नहीं है। आवश्यकता तो शिक्षा के समस्त ढांचे को सुधारने की है। यह चिंताजनक है कि राज्य सरकार की सारी ऊर्जा शिक्षा के ढांचे को सुधारने पर खप रही है, बावजूद इसके प्राथमिक शिक्षा का जैसा ढांचा निर्मित और विकसित होना चाहिए था वह नहीं हो पा रहा है। सरकार का सारा ध्यान स्कूलों के निर्माण और शिक्षकों की भर्ती पर केंद्रित है। बेहतर हो कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ऐसी कोई व्यवस्था करें जिससे प्राथमिक शिक्षा के ढांचे की सही तरह निगरानी की जा सके। जब तक सतत निगरानी की ऐसी किसी व्यवस्था का निर्माण नहीं होता तब तक यह अपेक्षा करना कठिन है कि राज्य में प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में कोई सार्थक बदलाव आ सकेगा(सम्पादकीय,दैनिक जागरण,२४.१०.२०१०)।
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