बीएड की तीसरी काउंसिलिंग कराने के बारे में शासन को भेजे गए अपने ही प्रस्ताव पर अमल करने में लखनऊ विश्वविद्यालय खुद को लाचार पा रहा है। विवि ने प्रस्ताव के मुताबिक 25 अक्टूबर से तीसरी काउंसिलिंग कराने में हाथ खड़े कर दिये हैं, यह कहते हुए कि इतनी जल्दी काउंसिलिंग कराना उसके बस की बात नहीं। लिहाजा जिस तीसरी काउंसिलिंग को सोमवार से शुरू होना था वह फिलहाल स्थगित कर दी गई है। संभावना जताई जा रही है कि अब काउंसिलिंग नवंबर के दूसरे हफ्ते से शुरू होगी। बीएड की खाली 3471 सीटों पर काउंसिलिंग कराने के लिए लविवि कुलसचिव जीपी त्रिपाठी और बीएड प्रवेश परीक्षा समन्वयक प्रो. अखिलेश चौबे की ओर से 21 अक्टूबर को शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें 25 अक्टूबर से काउंसिलिंग कराने की बात कही गई थी। फीस कन्फर्मेशन रसीद न पाने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता देने की बात भी थी। शासन ने लविवि के भेजे गए प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए 25 अक्टूबर से बीएड की तीसरी काउंसिलिंग कराने पर सहमति जता दी। अब तय समय पर काउंसिलिंग कराने में लविवि के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। लविवि अधिकारियों का तर्क है कि तैयारियों के लिए समय नहीं है, जबकि हकीकत यह है कि प्रवेश निरस्त मामला अधिकारियों के गले की फांस बन गया है। काउंसिलिंग के पहले इसको निपटाना बहुत जरूरी है। शनिवार को अधिकारियों ने बैठक कर कई घंटे मंत्रणा की और काउंसिलिंग आयोजन में आने वाली समस्याओं पर चर्चा की। अधिकारियों का तर्क है कि शिक्षकों को काउंसिलिंग के लिए सूचित करना, स्थान तय करना, साफ्टवेयर के बाबत एनआईसी के अधिकारियों से परामर्श लेना और अन्य तैयारियों के लिए भी अतिरिक्त समय की जरूरत है। इस सम्बंध में लविवि प्रवक्ता प्रो. एसके द्विवेदी का कहना है कि काउंसिलिंग के पहले सभी समस्याओं को निपटाना जरूरी है। शासन को सभी परिस्थितियों से अवगत कराते हुए फिलहाल तय तिथि की काउंसिलिंग टालने और अतिरिक्त समय देने का प्रस्ताव भेजा गया है।
कुप्रबंधन के शिकार लखनऊ विश्वविद्यालय का एक और नमूना शनिवार को सामने आ गया। बीएड प्रवेश निरस्त मामले का हल निकालने में जल्दबाजी करने का नतीजा है कि काउंसिलिंग निरस्त कर अधिकारी बैकफुट पर आ गए हैं। इसको चोला ओढ़ाया जा रहा है समय कम होने का। लविवि कुलसचिव और बीएड प्रवेश परीक्षा समन्वयक के हर पल बदलते निर्णय ने शासन ही नहीं बीएड के अभ्यर्थियों को भी स्तब्ध और परेशान कर दिया है। प्रदेश की बीएड प्रवेश परीक्षा का आयोजन इस बार लखनऊ विवि ने कराया है। इसकी जिम्मेदारी लविवि कुलसचिव जीपी त्रिपाठी और प्रदेश के समन्वयक प्रो.अखिलेश चौबे को सौंपी गई थी। अधिकारी बिना सोचे समझे एक कदम बढ़ाते हैं, नतीजतन उन्हें चार कदम पीछे आना पड़ता है। तीसरी काउंसिलिंग रद करना भी इसी की परिणति है। फीस कन्फर्मेशन रसीद न पाने वाले अभ्यर्थियों की पढ़ाई यथावत रखने का आदेश हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिया था। लविवि अधिकारियों ने इस आदेश की परवाह किये बिना ऐसे सभी अभ्यर्थियों को तीसरी काउंसिलिंग में सीट देने का निर्णय ले लिया। काउंसिलिंग का पूरा प्रस्ताव बनाकर शासन भेज दिया और शासन ने उस पर मुहर लगा दी। इस पेंच को दैनिक जागरण प्रमुखता से उठाया। फीस कन्फर्मेशन न पाने वाले छात्रों ने भी तीसरी काउंसिलिंग में शामिल होने से मना कर दिया। छात्रों द्वारा काउंसिलिंग बहिष्कार के निर्णय के बाद अधिकारी चेते। इसका हल निकालने का प्रयास हुआ लेकिन कुछ नहीं सूझा। आखिर में काउंसिलिंग स्थगित करनी पड़ी। शासन को भेजे प्रस्ताव में अधिकारियों ने यथाशीघ्र काउंसिलिंग खत्म करने की बात कही थी और अब समय कम होने का चोला ओढ़ा रहे हैं। छात्र हित में होगा निर्णय : लविवि प्रवक्ता प्रो.एसके द्विवेदी का कहना है कि कुलपति प्रो.मनोज कुमार मिश्र ने काउंसिलिंग के पहले सभी गड़बडियों को चिह्नित करने और उन्हें निपटाने का निर्देश दिया है। प्रवेश निरस्त मामले में किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है, छात्र हित में ही निर्णय लिया जाएगा(दैनिक जागरण,लखनऊ ,२४.१०.२०१०)।
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