इस वर्ष स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त 90 इंटर कॉलेजों को मिलने वाली अनुदान राशि में कमी की जाएगी। वित्त विभाग ने इंटर कॉलेजों को दिए जाने वाले अनुदान के मामले में कहा है कि क्यों नहीं खराब रिजल्ट देने वाले इंटर कॉलेजों को मिलने वाली अनुदान की राशि काटी जाए।
मालूम हो कि वर्ष 2010 में इंटर विज्ञान और वाणिज्य संकाय में रिजल्ट काफी खराब आया था। इसने 60 स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त इंटर कॉलेज ऐसे हैं जिनका रिजल्ट विज्ञान संकाय में 60 प्रतिशत से भी कम हुआ।
वहीं 20 ऐसे इंटर कॉलेज हैं जिनका वाणिज्य संकाय में रिजल्ट 40 फीसदी से भी कम हुआ। इसे लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय और वित्त विभाग के पदाधिकारी की बैठक गत सप्ताह हुई। इस संबंध में अंतिम निर्णय विभाग की अगली बैठक में लिया जाएगा।
अनुदान के बावजूद कॉलेजों का स्तर खराब
वित्त विभाग ने माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को कहा है कि अनुदान की राशि इंटर कॉलेजों को इसलिए दी जाती है कि कॉलेज में शिक्षा के स्तर में सुधार आए और उसकी गुणवत्ता बढ़े, लेकिन अनुदान की राशि देने के बाद भी इन कॉलेजों का स्तर खराब हुआ है।
कटौती होने पर 5000 शिक्षाकर्मी होंगे प्रभावित
अगर इंटर कॉलेजों को मिलने वाली अनुदान की राशि में कटौती होती है तो 5000 शिक्षाकर्मी प्रभावित होंगे। इस वर्ष 2010-11 में अनुदान की राशि करीब 6.5 करोड़ रुपए आवंटित की गई है। जिसे 90 स्थायी प्रस्वीकृत इंटर कॉलेजों के बीच बांटना है।
विज्ञान में 30.33 और वाणिज्य में 58.99 फीसदी रिजल्ट था
वर्ष 2010 में इंटर के तीनों संकाय में कुल 2,74,764 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें 1,41,872 छात्र परीक्षा में सफल हुए। विज्ञान संकाय में 2010 में मात्र 30.33 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए। वहीं वर्ष 2009 में इनका प्रतिशत 50.39 था।
वहीं वाणिज्य संकाय में 58.99 प्रतिशत छात्र ही उत्तीर्ण हो सके। वहीं 2009 में इनका प्रतिशत 78.53 था। वहीं कला में 2010 में पास करने वाले छात्रों का प्रतिशत 61.78 था। जबकि वर्ष 2009 में कला संकाय में 81.12 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए थे।
सीएम से समय मांगा जाएगा
इंटर कॉलेजों को मिलने वाले अनुदान की राशि में कटौती नहीं की जाए, इसके लिए सीएम और शिक्षा मंत्री से मिलकर एक वर्ष का समय मांगा जाएगा। इंटर कॉलेजों के लिए एक वर्ष का समय मांगा जाएगा, ताकि कॉलेज विज्ञान और वाणिज्य संकाय में अपना रिजल्ट सुधार सके।
चंद्रेश्वर पाठक, अध्यक्ष, राज्य इंटरमीडिएट शिक्षकेतर कर्मचारी संघ
अनुदान विकास के लिए होता है
जिन इंटर कॉलेजों में विज्ञान, वाणिज्य और कला में रिजल्ट खराब हो रहा है, उनके अनुदान की राशि में कटौती जरूर होनी चाहिए। अनुदान कॉलेज के स्तर को बढ़ाने के लिए दिया जाता है न कि स्तर गिराने के लिए। वित्त विभाग ने इस पर आपत्ति की है। इस पर अंतिम निर्णय अगली बैठक में लिया जाएगा।
फिदेलिस सोरेंग, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा(दैनिक भास्कर,रांची,5.2.11)
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