मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

10 मार्च 2011

मध्यप्रदेशः8वीं तक कोई वसूली नहीं

शासकीय स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक किसी भी मद में वसूली नहीं की जाएगी। नवीं-दसवीं में 140 व ग्यारहवीं-बारहवीं में दो सौ रुपए शुल्क लिया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने बुधवार को इसके आदेश जारी कर दिए है। यह शुल्क आगामी सत्र से लागू होगा। जानकारी के अनुसार प्रदेश भर में शासकीय स्कूलों में स्थानीय शुल्क के नाम पर वसूली की जाती रही है। यह शुल्क भी स्कूलों में अलग-अलग लिया जाता रहा है। इस बारे मे मिली शिकायतों को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने बुधवार को आदेश जारी करते हुए कहा है कि कक्षा एक से आठ तक किसी भी मद में फीस की वसूली नहीं की जाएगी। आठवीं तक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देनी होगी। वहीं नवीं-दसवीं कक्षा में विभिन्न मदों में 140 रुपए और ग्यारहवीं-बारहवीं में 200 रुपए देना होंगे। इसके अलावा नवीं से बारहवीं तक परीक्षाओं के लिए जाने वाले शुल्क के लिए अलग से दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।


यह रहता है अंश : 
विभिन्न मदों में वसूली जाने वाली फीस में विज्ञान शुल्क की पूरी राशि शाला के खाते में रहती है। क्रीड़ा शुल्क का 45 प्रतिशत शाला, दस प्रतिशत विकासखंड व 45 प्रतिशत डीईओ के खाते में जाती है। डीईओ के खाते में जाने वाली 45 प्रतिशत राशि में 20 प्रतिशत संभाग को देना होती है। स्काउट गाइड शुल्क 95 प्रतिशत शाला, एक-एक प्रतिशत जिला व संभाग व तीन प्रतिशत राज्य के खाते में जाती है। रेडक्रास शुल्क की 70 प्रतिशत राशि शाला, दस प्रतिशत जिला व बीस प्रतिशत राशि राज्य के खाते में जाती है।

प्रायवेट स्कूल कम जमा करते हैं शुल्क : 
प्रायवेट संस्थाओं द्वारा विभिन्न मदों की राशि छात्रों से वसूल करने के बाद जिला या राज्य स्तर पर बहुत कम राशि जमा करते हंै। सूत्रों के अनुसार डीईओ कार्यालय में विगत वर्षो की प्रायवेट स्कूलों की जमा राशि का हिसाब ही नहीं मिल पा रहा है(दैनिक जागरण,भोपाल,10.3.11)।

1 टिप्पणी:

  1. यहाँ हरियाणा में वापस दे चुके है फंड्स ही थे नाम मात्र .....इनके आभाव में चोक/डस्टर खरीदने के भी मोहताज हो गए मिडिल स्कूल

    जवाब देंहटाएं

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।