शिक्षा का स्तर उठाने के लिए सरकार ने उत्तराखंड बोर्ड के पैटर्न में बदलाव करते हुए उसे सीबीएसई पैटर्न तो कर दिया परंतु इसका लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा। हकीकत यह है कि विद्यार्थियों को मालूम ही नहीं कि आखिर पैटर्न में बदलाव क्या हुआ और उसका फर्क क्या पड़ा। जबकि शिक्षक मान रहे हैं कि पैटर्न बदलने से शिक्षा का स्तर गिर गया है और यह बदला हुआ पैटर्न यूके बोर्ड के विद्यार्थियों पर भारी पड़ रहा है। सर्वशिक्षा अभियान के तहत नये-नये प्रयोग करते हुए यूके बोर्ड का पैटर्न सीबीएसई की तरह कर दिया गया। इसके तहत पूर्व की भांति यूके बोर्ड में एक विषय की दो परीक्षा (हिन्दी विषय की तीन) बंद करते हुए एक विषय की एक ही परीक्षा कर दी गई। इसके अलावा कक्षा छह से आठ तक विद्यार्थी को फेल न करने का तरीका अपनाया गया। शुक्रवार को हाईस्कूल के विद्यार्थियों का पहला पेपर (हिन्दी) का था। परीक्षा कक्ष से बाहर निकाले विद्यार्थियों के चेहरे की खुशी देखते ही पता चल रहा था कि पेपर उनकी कल्पना के अनुरूप काफी आसान था। परीक्षा देकर बाहर निकले डीएवी इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की व्यक्तिगत परीक्षा दे रहे छात्र संजय निवासी डीएल रोड के अनुसार हिन्दी का पेपर काफी आसान आया था। परंतु पैटर्न में क्या बदलाव आया उसकी जानकारी उसे नहीं थी। सीएनआई के छात्र मोहित निवासी चाटवाली गली और चुक्खु मोहल्ला निवासी अभिषेक को भी हिन्दी का पेपर काफी आसान लगा। उन्होंने कहा कि पेपर में कुछ प्रश्न सलेबस से बाहर के भी थे परंतु वे इतने कठिन नहीं थे कि समझ कर किए न जा सके। पैटर्न में बदलाव की जानकारी उन्हें नहीं थी। उन्होंने कहा कि पेपर वैसा ही था जैसा पहले आया करता था। दूसरी ओर अपना नाम न बताने की शर्त पर कुछ शिक्षकों ने कहा कि पैटर्न में बदलाव से छात्रों का काफी नुकसान हुआ है। जो बच्चा शुरू से यूके बोर्ड के पैटर्न पर पढ़ता रहा हो उसके लिए सीबीएसई का पैटर्न एकदम नया है। इस नये पैटर्न से ताल-मेल बैठा पाना इतना आसान नहीं है। इसका सीधा असर बोर्ड परिक्षाओं के परिणाम में देखने को मिलेगा। इसके अलाव किसी भी तरह से छात्र को धक्का मारकर अगली कक्षा में भेजने की प्रवृत्ति भी काफी नुकसानदेह है। इससे भी बोर्ड परिक्षाओं के परिणाम पर बुरा असर पड़ेगा(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,19.3.11)।
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