स्कूलों में सतत समग्र मूल्यांकन और बेहतर प्रदर्शन करने की छात्रों की जद्दोजहद के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों से फार्मेटिव (रचनात्मक)मूल्यांकन को पठन पाठन प्रक्रिया को बेहतर बनाने के माध्यम के रूप में उपयोग करने को कहा है।
बोर्ड ने स्कूलों से खुशनुमा शैक्षणिक माहौल में पढ़ाई कराने और फार्मेटिव परीक्षा को केवल जांच के उद्देश्य से नहीं लेने को कहा है। सीबीएसई के शिक्षा अधिकारी पी मणि ने कहा कि स्कूलों में आयोजित होने वाली परीक्षाओं के संदर्भ में छात्रों और शिक्षकों की कई प्रकार की उलझने सामने आई हैं। इस संबंध में विभिन्न विषयों पर गौर करने के बाद शिक्षकों से फार्मेटिव मूल्यांकन को एक अवसर के तौर पर देखने और सत्र में कम से कम दो बार अभिभावकों के साथ बैठक करने का सुझाव दिया गया है। बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि इस प्रकार अभिभावकों के साथ बैठक करने से प्रत्येक छात्र के कमजोर और मजबूत पक्षों के बारे में चर्चा की जा सकती है और पठन पाठन के संबंध में खाई को पाटने में मदद मिल सकेगी।
स्कूलों से कहा गया है कि प्रत्येक फार्मेटिव जांच के बाद छात्रों को पेश आ रही परेशानी का आकलन किया जाए। इस प्रकार के आकलन में छात्रों के योगदान, प्रैक्टिकल वर्क, प्रोजेक्ट वर्क, वर्कशीट आदि से जुड़े दो या दो से अधिक विषयों को शामिल किया जाए। फोर्मेटिव मूल्यांकन का उपयोग केवल जांच के उद्देश्य से नहीं किया जाए बल्कि कुछ का केवल पढ़ाई और कुछ का केवल मूल्यांकन के उद्देश्य से हो। सभी छात्रों को एक तरह के कार्य के आधार पर ग्रेड नहीं प्रदान किए जाए बल्कि एक फार्मेटिव जांच में कई विषयों को एक साथ समायोजित किया जाए।
सभी स्कूलों से विविधतापूर्ण खुशनुमा शैक्षणिक माहौल में पठन पाठन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। स्कूलों के प्रचार्यों एवं शिक्षकों से कहा गया है कि वे छात्रों को तनावमुक्त वातावरण में पढ़ाई लिखाई करने को कहें। स्कूलों से कहा गया है कि छात्रों को यूनिट टेस्ट या अन्य जांच परीक्षा पर जोर देने की बजाय शिक्षा ऐसे माहौल में हो जिससे अन्य पाठ्येतर गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इसे माध्यमिक स्तर पर बोर्ड की ओर से जारी फार्मेटिव मूल्यांकन नियमावली के आधार पर करने की सलाह दी गई है। स्कूलों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि छात्रों की पाठ्येतर गतिविधियों को इस तरह से आगे बढ़ाया जाए कि वह इसे सही भावना एवं संतुलित ढंग से पूरा करें। स्कूल से पाठ्यक्रम में निर्धारित विषयों के अतिरिक्त पाठ्येतर गतिविधियों में छात्रों की रुचि को तवज्जो देने को कहा गया है । इसमें बच्चों की जागरूकता, निर्णय क्षमता, तार्किक सोच, प्रभावी संवाद, शिक्षकों, आचार व्यवहार तथा पर्यावरण, नैतिक मूल्यों के प्रति उनकी रुचि को तवज्जो देने को कहा गया है(दैनिक ट्रिब्यून,दिल्ली,14.3.11)।
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