समय के साथ प्राथमिकताएं भी बदलती हैं। बात करियर की हो तो आधुनिक तकनीक में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। किसी ने सोचा नहीं होगा कि फायर ब्रिगेड के क्षेत्र में रोजगार पाने वालों की मांग इतनी तेजी से बढ़ जाएगी। महानगरों के साथ छोटे शहरों में जैसे-जैसे मॉल, बड़े रिटेल स्टोर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या बढ़ी है। उसी अनुपात में आग लगने जैसी घटनाएं भी बढ़ी हैं। इसके साथ स्थानीय प्रशासन और कोर्ट ने भी अब बड़ी इमारतों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए आग से बचाव और उपकरण लगाना जरूरी कर दिया है।
बदलाव यह भी आया है कि पहले जहां आग लगने पर ही फायर ब्रिगेड कर्मियों की जरूरत होती थी। अब किसी इमारत की नींव रखने के साथ ही प्रशिक्षित फायर कर्मियों की जरूरत शुरू हो जाती है। कारण है कि आग ही नहीं बल्कि किसी भी विपरीत स्थिति से बचने के लिए आपदा प्रबंधन में भी इन कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है। यही कारण है कि फायर इंजीनियरिंग के कोर्सों की ओर युवाओं की उत्सुकता एकाएक बढ़ी है।
क्या है फायर इंजीनियरिंग
फायर इंजीनियरिंग ऐसा अनोखा क्षेत्र है जिसमें आम लोगों के बीच रहकर काम करना होता है। सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग, एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग जैसे विषयों से इसका सीधा जुड़ाव होता है। आग लगने पर लोगों का कैसा व्यवहार हो, आम लोगों के साथ लाइफ गार्डस का कैसा व्यवहार हो, इन सब बातों पर भी जोर दिया जाता है। इससे जुड़ी कई तकनीकी बातें दूसरे क्षेत्रों से इसे अलग करती हैं। यंत्रों की तकनीकी जानकारी, स्पिंक्लर सिस्टम, अलार्म, पानी की बौछार का सटीक इस्तेमाल, क्राइसिंग मैनेजमेंट और कम समय और संसाधनों में ज्यादा लोगों की जान और माल की सुरक्षा के वैज्ञानिक तरीके इसमें शामिल हैं। बड़े मॉल्स और मेले आग के मामले में सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। मेरठ में कुछ वर्ष पूर्व ऐसा ही एक हादसा हो चुका है। फायर इंजीनियरों की इसी मांग को पूरा करने के लिए कई सरकारी व निजी संस्थानों ने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किए हैं।
योग्यता
इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जितनी डिग्री की है उतनी ही जरूरत कुछ व्यक्तिगत योग्यताओं की भी है। नेतृत्व क्षमता, तुरंत निर्णय की क्षमता, साहस, गजब का धैर्य, खुद को नियंत्रित करने की क्षमता जैसे गुण होने चाहिए। फायर इंजीनियरिंग में डिग्री या डिप्लोमा के साथ कुछ शारीरिक मानक भी होते हैं।
करियर बनाने के मौके
दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग के चेयरमैन वीरेंद्र गर्ग का कहना है कि इस क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। तेजी से बदलते वक्त के साथ फायर इंजीनियरिंग को लेकर निजी क्षेत्र में ढेरों विकल्प सामने आए हैं। इस क्षेत्र में सलाहकारों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। कारण है कि इमारत निर्माण और औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के क्षेत्र में कानूनन कुछ नियमों का पालन अनिवार्य जो कर दिया गया है। यही कारण है कि अब बड़े कैंपस वाली कंपनियों फायर प्रोटेक्शन इंजीनियरों की स्थायी भर्ती करने लगी हैं। बीमा क्षेत्र में भी नुकसान का सही अनुमान लगाने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की मांग बढ़ी है(हीरेन्द्र सिंह राठौड़,नई दुनिया,दिल्ली,14.3.11)।

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