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14 मार्च 2011

मध्यप्रदेशःमाध्यमिक शिक्षा मंडल में फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाला गिरोह सक्रिय

माध्यमिक शिक्षा मंडल में फर्जी मार्कशीट बनाने में बड़ा गिरोह काम कर रहा है। यह गिरोह फर्जी मार्कशीट बनाने के साथ फेल को पास व नंबरों को बढ़ाने का काम भी करता है। माशिमं में पिछले कुछ दिनों से लगातार पकड़ी गई फर्जी मार्कशीटों की ही सीआईडी जांच हो जाए, तो इसकी जद में कई फंसे नजर आएंगे। माशिमं में कई बार फर्जी मार्कशीटों के प्रकरण सामने आए हैं। गत पांच माह से इनकी संख्या ज्यादा हो गई है। मुजफ्फर नगर उप्र के 42 फर्जी मार्कशीट, बागपत इंदौर के 29 प्रकरण व अतिरिक्त सचिव दीपक देशपांडे के हस्ताक्षर से बनी फर्जी मार्कशीट की तो फाइल गायब हो गई है। सूत्रों की माने तो जल्द ही राजस्थान की फर्जी मार्कशीट के प्रकरण भी सामने आएंगे। सूत्रों का कहना है कि फर्जी मार्कशीट बनाने में बाहरी लोग मंडल के कुछ लोगों के साथ मिलकर काम को अंजाम दे रहे है। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि फर्जी मार्कशीट को जब मंडल में सत्यापन के लिए भेजा जाता है, तो सत्यापन की दो रिपोर्ट बनाई जाती है। पहली फर्जी मार्कशीट को सही बताने वाली सत्यापन रिपोर्ट को संबधित संस्था को भेज दिया जाता है। जबकि फर्जी मार्कशीट को फर्जी बताने वाली रिपोर्ट को सत्यापन शाखा अपने पास रख लेता है। ऐसा ही कुछ बागपत व मुज्जफर नगर उप्र की फर्जी मार्कशीटों के पकड़े जाने के मामले में हुआ है। सूत्रों का यह भी कहना है कि मुजफ्फर नगर उप्र की फर्जी मार्कशीट को जल्द सत्यापन कराने के लिए एक मंडल सदस्य काफी दबाव बना रहे थे। लेकिन मामला खुलने के बाद उन्होंने पूरे मामले से ही कन्नी काट ली। सूत्र यह भी बताते है कि वर्ष 1999 के पहले की डिजीटल की गई मार्कशीट में बड़ा हेर-फेर किया गया है। माशिमं आला अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरा मामला पुलिस को सौंपा जा रहा है।

सचिव से सहायक सचिव तक पहुंचा काम : 
माशिमं में मार्कशीटों की सत्यापन रिपोर्ट पर पहले सचिव के हस्ताक्षर हुआ करते थे। इसके बाद यह काम अतिरिक्त सचिव देखने लगे। बाद में सत्यापन का पूरा काम सहायक सचिव स्तर अधिकारी की देखरेख में होने लगा। यह है बागपत उप्र का मामला : प्राचार्य चौधरी चरण सिंह जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बागपत स्थान बड़ौत उप्र द्वारा बीटीसी वर्ष 2010 में प्रवेश हेतु माशिमं भोपाल को हाईस्कूल व हायर सेकंडरी की 31 अंकसूचियां सत्यापन के लिए प्राप्त हुई थीं। इनमें से 29 अंकसूचियां कूट रचित/ फर्जी होने के बावजूद अभिलेख सत्यापन शाखा में पदस्थ पंजीयक राधा बाथम व कक्ष अधिकारी ऊषा वासनिक द्वारा सत्यापित कर वापस भेज दी गई। लेकिन उप्र के उक्त संस्थान को सत्यापन के बावजूद अंकसूचियां संदिग्ध लगीं। संस्थान ने इन अंकसूचियों को पुन: मूल अभिलेख से सत्यापन हेतु माशिमं भोपाल भेजा। प्रारंभिक जांच में उक्त 31 में से 29 अंकसूचियां फर्जी पाई गई।

यह भी बनी फर्जी मार्कशीट : 
माशिमं में करीब एक साल पहले दसवीं की वंदना सिंह पिता ब्रह्मानंद सिंह के नाम से एक फर्जी मार्कशीट बनाई गई है। इस मार्कशीट में रोल नंबर 12800678 व केंद्र क्रमांक 28002 बताया गया है। उक्त मार्कशीट में संबधित शाखा के चार लोगों को हस्ताक्षर हैं। हस्ताक्षर डीलिंग रीना गजभिए, कक्षाधिकारी तेजकुंवर करारिया, सहायक सचिव राधा बाथम व अतिरिक्त सचिव दीपक देशपांडे के हस्ताक्षर हैं। मामला खुलने के बाद इसकी फाइल भी गायब हो गई है।

मुजफ्फर नगर उप्र की फर्जी मार्कशीट 
मुजफ्फर नगर उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग में भर्ती के लिए अभ्यार्थियों ने आवेदन दिया था। इसमें माध्यमिक शिक्षा मंडल से डीएड उत्तीर्ण करीब 80 अभ्यार्थियों को आवेदन लगे थे। मुजफ्फर नगर में आवेदन के बाद सभी अभ्यार्थी साक्षात्कार तक पहुंच चुके थे। इस बीच उक्त अभ्यार्थियों की मार्कशीट सत्यापन के लिए माशिमं में भेजी गई। माशिमं की सत्यापन शाखा ने इन सभी मार्कशीट को ओके रिपोर्ट भी दे दी। मुजफ्फर नगर में साक्षात्कार के पूर्व क्षेत्र के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मार्कशीट का मिलान किया जा रहा था। इसमें करीब पचास लोग ऐसे निकले, जिनमें मार्कशीट पर सील तो सभी की एक थीं, लेकिन हस्ताक्षर का मिलान नहीं हो पा रहा था। जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की शिकायत उप्र मुजफ्फर नगर के थाने में भी कर दी। साथ ही 45 मार्कशीटों की जांच के लिए मामला मंडल भेजा गया। यह मार्कशीट भी फर्जी निकली। 

दो अधिकारियों का निलंबन 
माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बागपत उप्र की फर्जी मार्कशीट के मामले में सत्यापन शाखा में पदस्थ पंजीयक राधा बाथम व कक्ष अधिकारी ऊषा वासनिक को प्रथम दृष्टतया में दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया है। इसके पूर्व भी इटारसी के फर्जी मार्कशीट प्रकरण में रामजी मिश्रा बर्खास्त हो चुके है(दैनिक जागरण,भोपाल,14.3.11)।

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