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14 मार्च 2011

मध्यप्रदेशःप्रोफेसरों ने बिन मांगे लगाई सर्विस बुक की फोटोकॉपी

उच्च शिक्षा विभाग ने जैसे तैसे प्रोफेसरों की वरिष्ठता सूची तैयार कर ली है तो उसमें भी में सैकड़ों की तादात में गलतियां हैं। इन गलतियों पर आपत्ति लेने प्रोफेसरों को 4 मार्च तक समय दिया था। इसमें कुछ प्रोफेसरों ने सर्विस बुक की फोटो कापी लगा दी है जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रोफेसरों की 2007 की वरिष्ठता सूची मप्र सिविल सेवा सामान्य भर्ती नियम 1961 के आधार पर तैयार कर ली गई है। विभाग ने इस अनंतिम को अंतिम सूची का नाम दिया है। विभाग ने प्रोफेसरों से आपत्ति मंगाई थी। विभाग में करीब सवा सौ प्रोफेसरों ने आपत्तियां दर्ज करा दी थीं। इसमें कुछ प्रोफेसर ऐसे हैं, जिनकी सर्विस बुक विभाग में जमा थी। इसके बाद भी उन्होंने उसकी फोटो कापी लगाकर आपत्ति को विभाग भेजा दिया। जबकि विभाग ने कहा था कि जिन प्रोफेसरों की सर्विस बुक यहां जमा हैं उनके उन्हें फारवर्ड कराने की जरूरत नहीं हैं। विभाग ने कहा कि ऐसे प्रोफेसरों को बख्शा नहीं जाएगा। आपत्तियों की समीक्षा होने पर उन पर कार्रवाई की जाएगी।

प्राचार्य पर होगी कार्रवाई : 
विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जानकारी में कोई गलती निकली है तो उसकी जिम्मेदार प्राचार्य और प्रोफेसर होंगे। इसके बाद भी प्रोफेसरों ने जानकारी देते हुए फार्म को प्राचार्य से फारवर्ड कर विभाग भेज दिया है। विभाग इन गलतियों का परीक्षण कर रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप प्राचार्य और प्रोफेसरों पर कार्रवाई होना निश्चित है। चिराग तले अंधे : सूची में किस प्रकार अनियमितताएं बरती गई हैं इसका अंदाजा यह देख लगाया जा सकता है। कि इस सूची को जिस अधिकारी के हस्ताक्षर से बनाया गया है उनका नियुक्ति स्थान ही गलत बताया गया है। विभाग में पदस्थ विभा शुक्ला की नियुक्ति बैतूल में हुई थी(दैनिक जागरण,भोपाल,14.3.11)।

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