बीएड 2011-12 की 20 हजार सीटें और बची हैं। कला, वाणिज्य, विज्ञान और कृषि संकाय की ज्यादातर सीटें अब आगरा और मेरठ यूनिवर्सिटी से संबद्ध महाविद्यालयों में ही खाली हैं, जिनका विकल्प लॉक करने से ज्यादातर अभ्यर्थी कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि आगरा और मेरठ विवि का शैक्षिक सत्र विलंबित है। मनमानी फीस वसूली जाती है और ढंग की मार्किगिं भी नहीं होती है। ऐसे में दाखिले का औचित्य बेकार हो जाता है।
बीएड काउंसिलिंग में प्रदेश के 11 राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध 971 महाविद्यालयों की 80 हजार से ज्यादा सीटों का विकल्प लॉक कर दिया गया है। 70 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों को अलाटमेंट लेटर मिल चुके हैं और बाकी के लेटर सोमवार को जारी किए जाएंगे। काउंसिलिंग समन्वयक आरसी कटियार, डा. संदीप कुमार सिंह ने बताया कि रविवार सुबह विज्ञान, कृषि संकाय की 13276 सीटों और कला वाणिज्य संकाय की 14242 सीटों का विकल्प दिख रहा था। रात तक 7000 से ज्यादा सीटों का विकल्प लॉक हो गया है। बाकी की सीटों की काउंसिलिंग सोमवार को होगी। उन्होंने बताया कि कानपुर, जौनपुर, बरेली, झांसी, काशी विद्यापीठ वाराणसी, गोरखपुर, फैजाबाद विवि से संबद्ध महाविद्यालयों की सभी सीटों का विकल्प लॉक हो चुका है। अब आगरा और मेरठ विवि की सीटें खाली हैं, जहां शुरू से दाखिला लेने से अभ्यर्थी कतरा रहे हैं।
बीएड 2011-12 की दूसरी काउंसिलिंग तीन से सात अगस्त तक होगी। उच्च शिक्षा सचिव अवनीश कुमार अवस्थी का कहना है कि सीटें खाली रहने की स्थिति में वे अभ्यर्थी दूसरे चरण की काउंसिलिंग में आ सकेंगे, जो कि पहले चरण की काउंसिलिंग में शामिल नहीं हो सके। प्रथम काउंसिलिंग से सीट अलाट कराने वालों को मौका नहीं मिलेगा। प्रथम काउंसिलिंग के बाद की वरीयता सूची में जगह बनाने वालों को भी रैंकवार बुलाया जा सकता है(अमर उजाला,कानपुर,25.7.11)।
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