दिल्ली विविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों को यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधा अब और महंगी हो गई है। स्वास्थ्य सुविधा के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों से लिया जाने वाला सदस्यता शुल्क 60 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। इतना ही नहीं इस सदस्यता शुल्क बढ़ोतरी को जून 2009 से लागू कर दिया गया है और बकाया शुल्क को डीयू कर्मियों के वेतन से काट लिया गया है। डीयू कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ. राजीव रे ने बताया कि कर्मियों के वेतन से दो साल के करीब 11 हजार रुपये काटे गए हैं। यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर ने सभी कॉलेजों के प्राचायरे को इस बाबत जानकारी देते हुए पत्र भी लिखा है। इसमें कहा गया है कि छठे वेतन आयोग के मद्देनजर सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधा शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी जून 2009 से लागू की गई है। डॉ. रे ने कहा कि वर्ष 2009 में पूर्व समकुलपति ने इस फैसले को लागू होने से रोक दिया था। लेकिन अब नये कुलपति ने ऑडिट को लेकर होने वाली परेशान के मद्देनजर इसे लागू कर दिया है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन सेवानिवृत्त डीयूकर्मियों को हुई है, जो वर्ष 2009 के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। जबकि वर्ष 2009 से पूर्व सेवानिवृत्त हुए डीयू कर्मी यह शुल्क देने से बच गये हैं। डॉ रे ने बताया कि हेल्थ सेंटर योजना से करीब 4 हजार डीयूकर्मी जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि शुल्क बढ़ोतरी के बाद सेवानिवृत्त हुए कई डीयूकर्मी इस सुविधा का लाभ उठाना छोड़ सकते हैं। हालांकि डीयूकर्मी को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधा सीजीएचएस की सुविधा जैसी नहीं है। सीजीएचएस सुविधा में स्वास्थ्य खर्च का अधिकतम भुगतान होता है, जबकि डीयू स्वास्थ्य सुविधा में इलाज का पूरा भुगतान नहीं मिलता है(राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,25.7.11)।
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