पहली से आठवीं कक्षा में दाखिला लेने वाले छात्रों से आवेदन फॉर्म का शुल्क वसूलने के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के ‘कारण बताओ नोटिस’ के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया विवि प्रशासन ने विद्यार्थियों से लिया गया शुल्क लौटाने का फैसला किया है। जामिया ने दाखिला लेने वाले प्रत्येक स्टूडेंट से आवेदन फॉर्म के लिए 250 रुपये लिए थे। बाद में, एक संगठन नवा-ए-हक ने आयोग में आपत्ति दर्ज करते हुए इसे शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन बताया। संगठन की इस शिकायत को आयोग ने गंभीरता से लेते हुए जामिया प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के जवाब में जामिया ने आयोग को सूचित किया है कि वह ईडब्ल्यूएस कोटे के विद्यार्थियों से लिये रुपये लौटाएगा। जामिया ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि उनके यहां ऐसे विद्यार्थियों की संख्या काफी कम है। जामिया विविद्यालय ने कहा है कि इस शुल्क को वापस लेने के लिए विद्यार्थी या उसके अभिभावक को सभी संबंधित दस्तावेजों से आना होगा। गौरतलब है किशिक्षा का अधिकार कानून के तहत पहली से आठवीं क्लास तक निशुल्क शिक्षा का प्रावधान है। विद्यार्थियों से आवेदन फॉर्म के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता है। साथ ही नर्सरी में दाखिले के दौरान किसी तरह का साक्षात्कार और परीक्षा लेने की मनाही भी है(राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,25.7.11)।
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