चाय का नाम सुनते ही ताजगी सी छा जाती है और तनाव से लेकर सिरदर्द दूर हो जाता है। हमें पता होना चाहिए कि हमारा दे श वि का सबसे बड़ा चाय निर्माता, निर्यातक और उपभोक्ता है। यही वजह है कि अपने यहां इस क्षेत्र में करियर के तमाम विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि इसके बारे में लोगों को पता नहीं लेकिन यह क्षेत्र दिलचस्प जरूर है। टी इंडस्ट्री में कई नौकरियां उपलब्ध हैं, जिनमें टी मैनेजमेंट खास है। टी टेस्टिंग भी स्पेशियलाइज्ड काम है। इनके अलावा रिसर्चर, प्लांटे शन मैनेजर, टी ब्रोकर, कंसल्टेंट आदि की नौकरियां उपलब्ध हैं।
इस क्षे त्र में काम करने वालों को प्लांटवर्क, प्रोसेसिंग, ऑक्शनिंग, ब्रां डिंग, मार्केटिंग और रिसर्च है। प्लांटेशन वर्क में चाय के पौधों को बड़ा करना होता है , जिसमें मिट्टी को तैयार करना, सही खाद का इस्तेमाल करना, सही वातावरण तैयार करना, पत्तियों को तरीके से तोड़ना आदि शामिल हैं। प्रोसेसिंग वर्क में पत्तियों का चूरा बनाना, तोड़ना और घुमाना शामिल है, जो फैक्ट्री में होता है। इसके बाद, चाय को पैक करके नीलामी केंद्रों में भेजा जाता है। यहां विभिन्न प्लांटेशन से आए चाय के सैंपल्स को टेस्ट, ब्लेंड और ब्रांड में पैक किया जाता है। प्लांटिंग, टेस्टिंग और मार्केट ट्रेंड की जानकारी रखने वाले टी ब्रोकर्स चाय की नीलामी करते हैं और मार्केटिंग से संबंधित व्यक्ति फाइनल प्रोडक्ट की मार्केटिंग करता है। हालांकि अब विभिन्न तरह की चाय को ब्लें ड करने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाने लगा है, फिर भी टी टेस्टर के निर्णय को अंतिम माना जाता है।
शिक्षा : आधारभूत शिक्षा प्राप्त व्यक्ति चाय इंडस्ट्री में प्रवेश कर सकता है और धीरे-धीरे काम की बारीकियां सीख सकता है। हालांकि एग्रीकल्चरल साइंस या बॉटनी/फूड साइंस/हॉर्टिकल्चर में बी. एस-सी. वालों को प्राथमिकता दी जाती है। बिजनेस मैनेजमेंट या मार्केटिंग वालों को मार्केटिंग की नौकरी के लिए रखा जाता है। नए लोगों को प्लांटेशन स्तर पर काम करने के लिए बतौर सहायक रखा जाता है। इसके बाद ही उसे असिस्टें ट मैनेजर, फिर मैनेजर बनाया जाता है। टी टेस्टर्स को चुनकर ट्रेनिंग दी जाती है। नेचुरल टैलेंट के अलावा, कुछ साल के लिए कड़ी ट्रेनिंग देने के बाद ही प्रोफेशनल टी टेस्टर बनाया जाता है। इसके बाद टेस्टिंग मैनेजर पद मिलता है। इन्हें मैनेजेरियल स्किल्स और मार्केटिंग क्षमताओं पर भी काम करना होता है।
व्यक्तिगत क्षमता : ऐसे लोगों को ही यह क्षेत्र चुनना चाहिए, जो दिलचस्प और आउटडोर जिंदगी को पसंद करते हों। प्लांटेशन/फैक्ट्री मैनेजरों का फिजिकली फिट, एडैप्टेबल और सेल्फ-रिलायंट होना जरूरी है। नेतृत्व के गुण और मजदूरों के साथ डील करने की क्षमता भी होनी चाहिए। चाय बाजार के बारे में जानकारी और मार्केटिंग का भी पता होना जरूरी है। टी एस्टेट के ज्योग्राफिकल लोकेशन और टोपोग्राफी की जानकारी भी हो। ब्रोकर बनने वालों का दिमाग सही और अनुशासन में होना चाहिए। निर्माताओं और खरीदारों के साथ दोस्ती निभाना जरूरी है।
विकल्प : चाय कंपनियां, चाय बागान, ब्रोकिंग हाउस, एसोसिएशन और टी बोर्ड ऑफ इंडिया में नौकरी के अवसर हैं। अनुभवी टी प्लांटर टी ब्रोकर या टी टेस्टर बन सकता है। सीनियर प्रोफेशनल्स एडवाइजर/कंसल्टेंट बन सकते हैं। पढ़ाई में रुचि रखने वाले टी प्लांटेशन्स में रिसर्चर पद पा सकते हैं।
टी टेस्टर : इनका काम चाय के विभिन्न फ्लेवर्स के बीच अंतर को बताता है और गुणवत्ता के मुताबिक, ब्रांडिंग करता है। अधिकतर चाय कंपनियां टी टेस्टर को अपने यहां रखती हैं ताकि क्वालिटी स्टैंर्डड बना रहे। टी टेस्टिंग को नौकरी पर रहकर ही सीखा जा सकता है। विभिन्न चायों के स्वाद और अरो मा को समझने का ज्ञान सीखा जाता है। इन्हें मैनेजेरियल के साथ माकर्े टिंग स्किल्स भी आना चाहिए। टी टेस्टर्स के विकसित टेस्ट बड्स होने चाहिए और इन्हें अपने सेंसिटिव को साफ रखना चाहिए। इन्हें स्मोकिं ग, ड्रिंकिंग और स्पाइसी फूड खाते रहना चाहिए। इस नौकरी की कमी यह है कि मौसम के दौरान एक दिन में 200-300 कप चाय का स्वाद लेना होता है, जो दांतों में धब्बे बना देता है और पाचन-तंत्र को कमजोर बना देता है । इन्हें आयात-निर्यात के काम के साथ रिसर्चर को टेस्ट, इकोनॉमिक वायबिलिटी और मैच्योरेबिलिटी पर सलाह भी देते हैं। घरेलू और विदेशी बाजारों पर भी इन्हें नजर रखना पड़ता है। कई युवा इसे बतौर करियर अपनाते हैं, क्योंकि यहां काम अलग ढंग से होता है और सैलरी भी ज्यादा मिलती है।
रिसर्चर : इस इंडस्ट्री का अहम हिस्सा है शोध करते रहना। बोटानिस्ट, बायो-टेक्नोलॉजिस्ट और अन्य वैज्ञानिक चाय पर शोध करते रहते हैं। ये टी टेस्टर्स से टेस्ट, इकोनॉमिक वायबिलिटी और मैच्योरेबिलिटी पर सलाह लेते हैं। असम के जोरहट स्थित टी रिसर्च एसोसिएशन में चाय पर शोध सबसे अधिक किया जाता है। रिसर्च एसोसिएशन के साथ टी प्लांटेशन भी रिसर्च के लिए लोगों को अपने यहां नौकरी पर रखते हैं।
ब्रोकर : प्लांटर-प्रोडय़ूसर और खरीदार के बीच ब्रोकर काम करता है। मार्केट ट्रेंड के साथ ही अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर नजर रखता है। टी इंडस्ट्री में बैकग्राउंड और टी टेस्टिंग क्षमता वाला ही ब्रोकर बनता है। नीलामी केंद्रों पर चाय के सैंपल को ब्रोकर ही सूचीबद्ध करता है। भारत में कई ब्रोकिंग हाउसेज हैं, जहां ब्रोकर चाय बागानों से आए चायों की सैं पलिंग करता है।
कंसल्टेंट : द टी बोर्ड ऑफ इंडिया और कई टी एसोसिएशन कंसल्टेंट को नौकरी पर रखते हैं। अनुभवी टी प्लांटर्स कंसल्टेंसी सर्विस का काम दे सकते हैं। वे बता सकते हैं कि चाय के पौ धों, स्रेत के बारे में बताने के अलावा लोगों को ट्रेनिंग भी देने का काम करते हैं।
आमदनी : कई कमियों के बावजूद युवा इसे बतौर करियर इसलिए अपना रहे हैं, क्योंकि यहां सैलरी अच्छी होने के साथ ही बंगला, गाड़ी और आकषर्क इंसेंटिव भी है। ट्रेनी को 8,000 प्रतिमाह मिल जाता है तो सीनियर प्रोफेशनल को 30,000 प्रतिमाह। विशेषज्ञों को 50,000 रुपये प्रति माह मिल जाता है।
संस्था
टी मैनेजमेंट में ट्रेनिंग के लिए 10 वीं या 12 वीं पास होना अनिवार्य है। संस्थाएं टी प्रोडक्शन से लेकर प्रोसेसिंग, फाइनेंस, मार्केटिंग और सेल्स पढ़ाती हैं। असम एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ प्लांटेशन मैनेजमेंट, बेंगलुरु दीपरस इंस्टीटय़ूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, कोलकाता एनआईटीएम, दार्जिलिंग टी रिसर्च एंड मैनेजमेंट एसोसिएशन, पश्चिम बंगाल असम दार्जिलिंग टी रिसर्च सेंटर, दार्जिलिंग यूपीएएसआई टी रिसर्च इंस्टीटय़ूट, तमिलनाडु बिड़ला इंस्टीटय़ूट ऑफ फ्यूचरिस्टिक स्टडीज, कोलकाता द टी टेस्टर्स एकेडमी, केरल
(स्पर्धा,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,30.8.11)
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