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31 अगस्त 2011

औद्योगिक संगठनात्मक मनोविज्ञान मे करिअर

मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) का दायरा सिर्फ व्यक्ति के दिमाग और बर्ताव को पढ़ने भर तक ही सीमित नहीं है बल्कि इस यूनिक फील्ड में कई अन्य चीजों से संबंधित पढ़ाई, करियर भी शामिल है इसलिए साइकोलॉजी से संबंधित फील्ड में कुछ नया और हटकर करना चाहते हैं तो इंडस्ट्रियल/ऑर्गनाइजेशनल साइकोलॉजी भी बेहतरीन करियर संभावनाओं से भरा हुआ है। इंडस्ट्रियल/ऑर्गनाइजेशनल साइकोलॉजी को आई/ओ साइकोलॉजी से भी संबोधित किया जाता है। यह फील्ड मुख्य रूप से वर्कप्लेस प्रोडक्टिविटी में बढ़ोत्तरी और उससे संबंधित मुद्दे जैसे कर्मचारियों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर ध्यान केंद्रित करता है। इसके मुख्य कायरे में सुयोग्य व निपुण कर्मचारियों की नियुक्ति, टेस्ट कंडक्ट करना, प्रोडक्ट्स डिजाइन करना, ट्रेनिंग कोर्सेज क्रिएट करना और कार्यस्थल के अलग-अलग पहलुओं पर शोध करना आदि शामिल है। इंडस्ट्रियल-ऑर्गनाइजेशनल साइकोलॉजिस्ट अपनी जानकारी कार्यस्थल पर लागू करते हैं ताकि वर्कलाइफ और प्रोडक्टिविटी की गुणवत्ता को सुधारा जा सके। यह साइकोलॉजी से जुड़ा विशेष फील्ड है, जो भारत में तेजी से फैल रहा है। साइकोलॉजिस्ट के मैनेजमेंट और मार्केटिंग से संबंधित क्षेत्रों में रिसर्च-प्रक्रिया अप्लाई करता है। आई/ओ साइकोलॉजिस्ट कई बिजनेस में नये प्रोडक्ट्स डिजाइन करने, ट्रेनिंग कोर्सेज क्रिएट करने और कार्यस्थल के माहौल को जांचने के रूप में भी कार्य करते हैं। इसके अलावा, यह ह्यूमन रिसोर्स स्पेशलिस्ट के रूप में भी कार्य करता है, जो स्टाफ, ट्रेनिंग और कर्मचारियों के विकास में मदद करता है। आप चाहें तो बतौर कन्सल्टेंट भी काम कर सकते हैं ताकि खास तरह की समस्याओं को सुलझाने में मैनेजमेंट की मदद कर सकें।


योग्यता : इस फील्ड में प्रवेश करने के लिए आधारभूत साइकोलॉजी में डिग्री अनिवार्य है। आई/ओ साइकोलॉजिस्ट बनने के लिए साइकोलॉजी में बैचलर डिग्री और उसके बाद इंटर्नशिप के साथ मास्टर डिग्री जरूरी है। आज की इस प्रतिस्पर्धी युग में इस तरह की डिग्री ही उच्च पद पर नियुक्ति पाने के लिए काफी नहीं है इसलिए इस फील्ड में सफलता पानी है तो मास्टर्स के साथ डॉक्टोरेट डिग्री भी चाहिए।
काम के साथ पढ़ाई

आई/ओ साइकोलॉजिस्ट बनने के लिए पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल रूप से निपुण होने के लिए इंटर्नशिप एक्सपीरियंस भी फायदेमंद है। इससे आपको इसकी जटिलताएं और कॉन्सेप्ट्स समझने में मदद मिलती है। पढ़ाई को जितना ज्यादा वर्कप्लेस से जोड़ेंगे, उतनी ही जल्दी चीजों को समझ भी सकेंगे। मुंबई स्थित एसएनडीटी इंटर्नशिप करिकुलम का हिस्सा है। ऑर्गनाइजेशनल साइकोलॉजी में अधिकतर छात्र एचआर डिपार्टमेंट में कॉरपोरेट जॉब ही चुनते हैं।

कमाई

इस फील्ड में आय शैक्षिक योग्यता और अनुभव पर निर्भर है । किस कंपनी के साथ जुड़ रहे हैं इस पर भी वेतन निर्भर है । मास्टर डिग्री होल्डर फ्रेशर्स के लिए प्रत्येक महीने वेतन 25-30 हजार हो ती है, वहीं मास्टर डिग्री होल्डर्स, जिनके पास वर्क एक्सपीरियंस 4-5 साल का है , उन्हें 50-60 हजार प्रत्येक महीने वेतन मिल सकता है। डॉक्टोरेट होल्डर्स के पास कार्यानुभव 4-5 साल का है तो उन्हें 60 से 90 हजार हर महीने वेतन मिल सकता है।

एसएनडीटी, मुंबई यूनिवर्सिटी पुणो यूनिवर्सिटी, पुणो दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली संस्थान

गुण

आज कई छात्र बतौर साइकोलॉजी मेनस्ट्रीम करियर ऑप्शन चुन रहे हैं, फिर भी इसे व्यापक स्तर पर आज भी नहीं स्वीकारा गया है। इसकी बड़ी वजह यही है कि आम लोग या छात्र साइकोलॉजी को गंभीरता से नहीं लेते। भारत में आज भी यह काउंसलिंग और टीचिंग तक ही सीमित है इसलिए इस फील्ड में एक्सपोजर और पहचान की दरकार है। साइकोमेट्रिक टेस्टिंग उदाहरण के तौर पर ऐसा फील्ड है जो अब धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। कॉरपोरेट र्वल्ड में भी जल्द ही साइकोलॉजिस्ट की नियुक्तियां शुरू होने लगेंगी क्योंकि जिस तरह के गुण और मूल्य साइकोलॉजिस्ट कार्यस्थल या व्यक्ति के साथ कायम करते हैं, वह कार्य को बिल्कुल नए स्तर पर ले जाता है। आई/ओ साइकोलॉजिस्ट बनना उतना आसान नहीं, जितना लोग समझते हैं। इसके लिए खास किस्म के गुण और योग्यता होनी चाहिए, तभी इस फील्ड में सफलता प्राप्त की जा सकती है। एप्लाइड साइकोलॉजिस्ट के लिए कई तरह के वर्क असाइनमेंट के अनुरूप ही कार्य करने की जरूरत है। लगातार चीजों का अनुसरण करना, सीखना, सलाहकार से विचार-विमर्श करना और लोगों से संबंधित कामकाजी बर्ताव (वर्क बिहेवियर) समझने के लिए उनसे बातचीत करना अनुभव देता है।
(अंशुमाला,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,30.8.11)

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