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30 मार्च 2010

डीटीयू मे फिर परीक्षा का बहिष्कार

दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय में आंदोलन की आग फिर भ़ड़क उठी है। इस बार जूनियर छात्रों ने आंदोलन की कमान संभाली है। सोमवार से शुरू हुए मध्यावधि परीक्षा में आखिरी वर्ष के छात्र तो शामिल हुए पर पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्र नहीं। २२०० में से सिर्फ ३५ छात्र ही परीक्षा सेंटरपर नजर आए। छात्रों का कहना है कि सरकार जब तक कुलपति को नहीं हटाती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार करने के बाद विभिन्न अस्पतालों में जाकर रक्तदान भी किया।

विश्वविद्यालय में २ मार्च से सैक़ड़ों छात्र दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय को केन्द्रीय संस्थान का दर्जा फिरसे बहाल करने और कुलपति प्रो पीबी शर्मा को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन की अगुवाई पहले फाइनल ईयर के छात्र कर रहे थे। इन छात्रों ने प्रशासन व सरकार से बातचीत के बाद परीक्षा में शामिल होने की बात मान ली। लेकिन उनकी मांगे सरकार द्वारा अब तक नहीं मानी गई है।

आंदोलन में शामिल एक छात्र ने बताया कि हमने सरकार से तुरंत कुलपति को हटाने की मांग है। इसके साथ ही डीटीयू को पहले की तरह दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के रूप में ही चलाने की मांग की है। इस मांग को पूरा करने में सरकार को थो़ड़ा वक्त भले ही लगे पर कुलपति को हटाने को लेकर समझौता नहीं होगा।

छात्रों ने बताया कि कुलपति प्रो पीबी शर्मा को यहां रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। वे छात्रों पर अपना विश्वास खो चुके हैं। वे यहां रहकर अपनी मनमानी करना चाहते हैं। छात्र उन पर संस्थान में अनियमितता को भी ब़ढ़ावा देने का भी आरोप लगा रहे हैं।

परीक्षा में शामिल नहीं होने वाले छात्रों ने राममनोहर लोहिया, एलएनजेपी और राजधानी के अन्य अस्पतालों में जाकर रक्तदान किया। एक छात्र ने बताया कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि युवा इंजीनियरों का खून देश और समाज के काम आ सके। आगे आने वाले दिनों में अपने आंदोलन को जारी रखते हुए वे कई और रचनात्मक काम शुरू करेंगे।

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय ने १५ मार्च से होने वाली परीक्षा का छात्रों द्वारा बहिष्कार करने के बाद दोबारा से मध्यावधि परीक्षा शुरू करने का निर्णय लिया था। इस फैसले के तहत ही २९ मार्च से परीक्षा शुरू की गई। छात्र चाहते हैं कि यह विश्वविद्यालय दिल्ली कॉलेज इंजीनियरिंग के रूप में ही केन्द्र सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के तहत चले। इंजीनियरिंग कॉलेज को राज्य स्तरीय संस्थान के रूप में चलाने पर वे नाराज हैं।
(नई दुनिया,दिल्ली,30.3.2010)

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