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30 मार्च 2010

शिक्षक आवास योजना

पहली अप्रैल से लागू होने जा रहे शिक्षा का अधिकार कानून के अमल के लिए ही लगभग तीन लाख से अधिक और शिक्षकों की जरूरत है। जबकि माध्यमिक स्तर पर लगभग दो लाख और शिक्षकों की दरकार है। इतना ही नहीं, सिर्फ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 30 से 40 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इस स्थिति के बावजूद गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए बेहतर शिक्षक ढूंढे़ नहीं मिल रहे हैं। लिहाजा शिक्षक पेशे को और आकर्षक बनाने की योजना के तहत उनके लिए अलग से आवासीय योजना भी शुरू करने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक देशभर में शिक्षकों की कमी से केंद्र व राज्य सरकारें अच्छी तरह वाकिफ हैं। कोशिशें भी हो रही हैं कि प्रतिभाशाली छात्र शिक्षक पेशे से जुड़ें। बेहतरीन तनख्वाह समेत दूसरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं। फिर भी अच्छी पढ़ाई-लिखाई करने वाले होनहार छात्रों में इस पेशे में आने को लेकर ललक नहीं दिख रही है। उनकी एक वजह उनके लिए आवासीय संकट भी है। खासतौर से महिलाओं के सामने यह एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आता है। महानगरों में तो और भी बड़ी समस्या है। इस स्थिति से सरकार के माथे पर भी बल हैं। उसने स्कूली से लेकर उच्च शिक्षा तक में सुधार का व्यापक कार्यक्रम तो तैयार कर लिया है, लेकिन जब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले शिक्षक ही नहीं होंगे तो फिर सारी तैयारियां बेमानी साबित होंगी। बताते हैं कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस स्थिति को महसूस करके ही शिक्षक बनने में छात्रों की रुझान पैदा करने के लिए एक आवासीय योजना शुरू करने पर काम कर रहा है। तर्क है कि पुलिस, सेना, रेलवे समेत दूसरे तमाम केंद्रीय महकमों के कर्मचारियों के लिए आवासीय योजना है, तो फिर शिक्षकों के लिए क्यों नहीं हो सकती। सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने एडुसिल इंडिया (एजूकेशनल कंसलटेंट आफ इंडिया) से इसके लिए एक फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी तैयार करा ली है। अलबत्ता उस पर अमल का अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन देशभर में प्राइमरी, अपर प्राइमरी, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के लगभग 70 लाख शिक्षकों की दिक्कतों को मद्देनजर जल्द ही इस पर सकारात्मक पहल हो सकती है।
(राजकेश्वर सिंह,दैनिक जागरण,दिल्ली,30.3.2010)

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