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17 जून 2010

डीयू में कोटे की सीटों पर दाखिले आसान नहीं

कोटे के दम पर फूले नहीं समा रहे अनुसूचित जाति/ जनजाति के छात्रों के लिए इस बार डीयू की राह मुश्किल होने जा रही है। कारण उपलब्ध सीटों के मुकाबले आवेदनों में आया जबरदस्त उछाल है। दाखिला प्रक्रिया में इस बार कोटे के तहत 12,150 सीटें आरक्षित है, जबकि आवेदकों का आंकड़ा 18,438 पहुंच गया है। यानी 22 जून को जारी होने वाली पहली दाखिला सूची में नंबर आने के बाद भी चूके मतलब दाखिले की दौड़ से बाहर हुए। डीन छात्र कल्याण प्रो. एसके विज ने बताया कि बीते वर्षो के मुकाबले इस बार कोटे की सीटों के लिए रिकॉर्ड आवेदन हुआ हैं। आवेदनों की संख्या को देखते हुए साफ हो गया कि हिस्से आई सीट छोड़ना मतलब पछताना है।

डिप्टी डीन डॉ. गुरप्रीत सिंह टुटेजा ने बताया कि 22 जून को अनुसूचित जाति/ जनजाति के लिए पहली दाखिला सूची जारी हो रही है। सूची में मौका पाने वाले छात्रों के लिए दो बातें अहम है पहला कि उन्हें जहां मौका मिल रहा है दाखिला ले लें और दूसरा, यदि उन्हें मिला विकल्प पसंद नहीं है तो वे एडमिशन स्लिप लेकर उसे अगले चरण के लिए लौटा दें। डॉ. टुटेजा कहते हैं कि ऐसा करना इसलिए जरूरी है कि यदि आप पहली दाखिला सूची में नंबर आने पर भी एडमिशन स्लिप नहीं लेते है तो प्रशासन मानकर चलता है कि आप कोटे की लाभ नहीं चाहते है। ऐसे में चूकने वाले छात्रों को अंत में मौका दिया जाता हैं और कुछ ऐसा ही स्लिप लेकर दाखिला न लेने वालों के साथ किया जाता है।

विकलांग श्रेणी के तहत मौके अधिक

अनुसूचित जाति/ जनजाति कोटे में जहां एक-एक सीट पर मारामारी मचने जा रही है वहीं दूसरी ओर, विकलांग श्रेणी के छात्रों के लिए इस बार अधिक संभावनाएं है। कोटे के तहत करीब 1,620 सीटे आरक्षित है, जबकि पंजीकरण के तहत आवेदन केवल 456 हुए हैं, ऐसे में हर चार सीटों पर एक उम्मीदवार है। डीन छात्र कल्याण की ओर से जारी जानकारी के अनुसार आगामी 23 जून को इस क्षेत्र के लिए दाखिला प्रक्रिया की शुरुआत होगी और पहली दाखिला के साथ-साथ दाखिले की प्रक्रिया भी इसी दिन शुरू कर दी जाएगी।

एक नजर में अनुसूचित जाति/ जनजाति के आवेदन

वर्ष 2007 में - 11,826

वर्ष 2008 में - 12,126

वर्ष 2009 में - 15,406

वर्ष 2010 में - 18,438

नोट- 2007, 08 व 09 में विकलांग श्रेणी के आवेदन भी शामिल है।
(Dainik Bhaskar,17.6.2010)

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